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एक मैसेज ने 44 दोस्तों को किया एकजुट, कर्ज में डूबे दोस्त को रोड पर आने से बचाया

बिजनेस में घाटे से आर्थिक संकट में घिरे एक दोस्त को 44 दोस्तों ने एक दिन में विपत्ति से उबार लिया. बैंक का कर्ज चुकाने के लिए एक ही दिन में 11 लाख रुपए इकट्ठा कर लिए.

एक मैसेज ने 44 दोस्तों को किया एकजुट, कर्ज में डूबे दोस्त को रोड पर आने से बचाया
ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे दोस्तों ने मध्य प्रदेश के दोस्त के लिए जुटाई लोन की रकम.

रतलाम: सोशल मीडिया के एक से बढ़कर एक एप्लिकेशन की दुनिया में रिश्ते और दोस्ती सिर्फ मोबाइल के कीपैड पर सिमटकर रह गए हैं, लेकिन इस आधुनिकता में भी कुछ दोस्तों की दोस्ती ऐसी भी है जो सोशल मीडिया की मदद से और ज्यादा गहरी हो गयी है. ऐसी ही दोस्ती एक चर्चित फिल्म के गाने के बोल को चरितार्थ करती है- 'ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छौड़ेंगे.'

आज के समय में सोशल मीडिया में व्यस्त जिंदगी बस सेल्फी और हाई-हेलो के मैसेज में सिमट गई है. स्कूल कॉलेज के समय दिन रात साथ रहे दोस्त कामकाज और भागदौड़ की जिंदगी में कभी कभार मोबाइल पर मिल पाते हैं. बावजूद इसके हिंदुस्तानियों ने हजारों मिल दूर होने के बाद भी दोस्ती की मिसाल कायम की है. अपने एक दोस्त के सड़क पर आने से पहले 44 दोस्तों का सहारा मिल गया. 

दरअसल, बिजनेस में घाटे से आर्थिक संकट में घिरे एक दोस्त को 44 दोस्तों ने एक दिन में विपत्ति से उबार लिया. बैंक का कर्ज चुकाने के लिए एक ही दिन में 11 लाख रुपए इकट्ठा कर लिए.

यह वाकया 20 दिन पहले 29 जून को भोपाल में हुआ. संकट में घिरा दोस्त भोपाल में रहता था और उसके 44 दोस्त देश और विदेश में रहते हैं. सभी 1992 में इंदौर के एसजीएस आईटीएस  कॉलेज (SGS INSTITUTE OF TECH. AND SC) में एक साथ पढ़े थे. कॉलेज की 1992 बैच में 100 स्टूडेंट थे. उनके साथ भोपाल का कृष्णा (परिवर्तित नाम) भी पढ़ता था.

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पिछले महीने में भोपाल के कृष्ना (परिवर्तित नाम) ने ऑस्ट्रेलिया में शिफ्ट हो चुके बैच के एक साथी अशोक गुप्ता को कॉल कर अपनी परेशानी बताई. 

भोपाल के कृष्णा को बिजनेस में बड़ा घाटा हुआ था. भोपाल के टीटी नगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक का एक करोड़ से ज्यादा का लोन चुकाने के लिए कृष्णा अपनी फैक्ट्री तक बेच चुका था. मकान भी बैंक के पास गिरवी था. बैंक ने 30 जून तक लोन नहीं चुकाने पर कुर्की की चेतावनी दी थी. 30 जून तक हर हाल में कृष्णा को बैंक में 17 लाख रुपये जमा करवाने थे. दोस्त को विपत्ति में देख ऑस्ट्रेलिया में शिफ्ट हो चुके अशोक ने मदद का निर्णय लिया. 

अशोक के दिमाग में एक प्लान आया. इसके बाद उसने वाट्स एप पर बीते माह 26 जून को साथ में पढ़े सभी स्टूडेंट्स में से 44 दोस्तों को हेल्प कृष्णा नाम से ग्रुप तैयार कर मदद का अनुरोध किया. वाट्स एप पर मैसेज मिलते ही ग्रुप में शामिल दोस्त सक्रिय हो गए. एक ही दिन में रात 10.30 बजे तक 44 दोस्तों ने 11 लाख रुपए कृष्णा की मदद के लिए एक ही अकांउट में जमा करा दिए. बैंक से 17 लाख की राशि को वन टाइम सेटलमेंट के तहत 11 लाख की राशि जमा कर कर्ज़ा उतार दिया.

सभी 44 दोस्तों ने बगैर कोई सवाल किए 25-25 हजार रुपए की मदद की. इसका परिणाम यह निकला कि बैंक की ओर से दी गई 30 जून तक की मोहलत के बजाए 29 जून को ही दोस्तों ने कृष्णा के मकान के पेपर बैंक से रिलीज करा लिए. 

इतना ही नहीं इस मदद के पहले व्हाट्स ग्रुप पर अशोक ने एक शर्त भी रखी थी फिलहाल केवल मदद करना है. इस वक्त कोई बहस इस बात पर नहीं होगी की आखिर कृष्णा इस हालत में कैसे पहुंचा.

ऑस्ट्रेलिया में रह रहे कृष्णा के दोस्त ने बताया कि किस तरह पढ़ाई के दिनों में वे सभी साथ रहे. पढ़ाई के दिनों को याद करते हुए ऑस्ट्रेलिया वाले दोस्त ने बताया कि कृष्णा की हाइट कम है. ऐसे में वह जब कभी कहीं खड़ा होता तो कृष्णा के कंधे पर हाथ रखकर सहारा लेता था. 

वहीं मददगार ग्रुप में नागदा के एक और साथी पंकज मारु भी शामिल थे. पंकज मारू ने बताया कि जब अशोक गुप्ता ने ग्रुप बनाया तो एक शर्त भी रखी कि कोई भी नुकसान का कारण नहीं पूछेगा. सुबह मदद के लिए बनाए व्हाट्सएप ग्रुप में 44 दोस्तों ने बताये गए बैंक अकाउंट में 11 लाख रुपये जमा भी करवा दिए. 

पंकज मारू बताते हैं कि हम दोस्तों के पढ़ाई के दिनों के कई यादगार पल हैं, लेकिन एक वक्त जब में ग्रुप सचिव रहा था तब गलती हो जाने पर सभी दोस्त मिलकर गलती करने वाले कि मस्ती मज़ाक में कंबल कुटाई करते थे. एक बार सचिव रहते मैंने जामफल की सब्जी बीज सहित बनवा दी थी. फिर मेरी कंबल कुटाई के वक्त सबसे आगे भोपाल का कृष्णा ही रहा था. आज भी कंबल कुटाई की मौज मस्ती के दिनों ने हमारी दोस्ती को और गहरा कर दिया है.