इतिहास के झरोखे के बीच प्रभु यीशु की हर धर्म के लोगों ने की प्रार्थना, मनाया क्रिसमस

यदि इन सभी चर्च के इतिहास पर प्रकाश डाला जाए तो, इनमें सबसे ज्यादा पुरानी क्राइस्ट चर्च कैथेड्रल है. जिसकी स्थापना स्थापना 1844 में की गई थी.

इतिहास के झरोखे के बीच प्रभु यीशु की हर धर्म के लोगों ने की प्रार्थना, मनाया क्रिसमस

कर्ण मिश्रा/जबलपुर: आकर्षक सजावट भव्य इमारत और खुशी का माहौल, कोई डेढ़ सौ वर्ष पुराना है तो, कोई इससे भी ज्यादा सालों का गौरवशाली इतिहास खुद में समेटे हुए है. कुछ की हालत जर्जर होने के बाद उनका रिनोवेशन कर उन्हें नया रूप दिया गया है तो कई ऐसे भी हैं जो डेढ़ सदी बाद भी जस के तस हैं. आज क्रिसमस को लेकर शहर के इन्हीं चर्च में रौनक के साथ खास साज सज्जा की गयी. रात में प्रभु यीशु के जन्म पर भजन गाय गए, तो वही सुबह की शुरुआत प्रभु यीशु की प्रार्थना से हुई. 

विश्व की स्थापत्य व कला के दर्शन
शहर के इन सभी चर्च में विश्व की स्थापत्य व कला झलकती है. यदि आपको इटली, अमेरिका की स्थापत्य कला को देखना है तो, शहर की केथोड्रिल क्राइस्ट चर्च, होली ट्रिनिटी चर्च, इंग्लिश मैथाडिस्ट चर्च, सेंट पीटर्स एंड पॉल केथेड्रेल चर्च के साथ और भी चर्च है जिन्हें देखने लोग दूर दूर से आज जबलपुर पहुंचे हैं. आपको बता दें कि सभी चर्च 150 से 200 वर्ष पुराने हैं और मसीही समाज इस दिन खास पूजा भी करते हैं. 

यीशु के जन्मोत्सव पर हुई विशेष पूजा, सजे गिरजाघर, दिखी आकर्षक झांकी
यीशु के जन्मोत्सव याने क्रिसमस पर्व में शहर के सभी गिरजाघरों मे रौनक बिखरी रही है. सुबह से ही मसीही समाज के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोगों ने गिरजाघरो मे पहुंचकर भगवान यीशु के दर्शन किए और जन्मोत्सव उपलक्ष्य मे बनाई गई झांकियों को देखा.क्रिसमस पर सभी चर्च आकर्षक साज-सज्जा से सजे दिखे और खुबसूरत नजारा पेश हुआ. चर्च पहुंचे लोगों ने सभी को क्रिसमस पर्व की बधाई दी और यीशु मसीह के शांति, प्रेम और सदभाव के नारे को आत्मसात करने का आव्हान किया. भंवरताल स्थित होली ट्रिनिटी चर्च में यीशु के जन्म की झांकियां बनाई. जिसमे मदर मरियम और जन्म समय से जुड़े तथ्यों की लोगों की जानकारी भी प्रदर्शित की गई. 

फ्रेंडर्स के साथ सेलिब्रेशन ओर सेल्फी का दिखा रंग
इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र एवं अन्य धर्म के लोग भी गिरजाघरों मैं प्रभु यीशु से प्रार्थना करने पहुंचे और खुशी के साथ सेल्फी लेते हुए नजर आए. जबलपुर में पढ़ने आई शिखा और मुस्कान दोनों बहुत अच्छी दोस्त है और आज के दिन वह पेन्टीनाका स्तिथि सेंट पीटर्स एंड पॉल केथेड्रेल चर्च पहुंचे और क्रिसमस सेलिब्रेट किया. वहीं, जबलपुर के पास नरसिंहपुर से अपनी फ्रेंडस के साथ आई प्रगति सिंह ने भी खूब मस्ती की.

इतिहास के झरोखो में अलग स्थान, यह चर्च बनी जबलपुर की पहचान
यदि इन सभी चर्च के इतिहास पर प्रकाश डाला जाए तो, इनमें सबसे ज्यादा पुरानी क्राइस्ट चर्च कैथेड्रल है. जिसकी स्थापना स्थापना 1844 में की गई थी. सबसे खास बात यह है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बंधुओं ने इस चर्च के निर्माण कार्य के दौरान काम किया था. शहर के अंदर बोट शेप में बना सेंट पीटर एंड पौल चर्च की स्थापना सन 1870 में जबलपुर के पेंटी नाका क्षेत्र में की गई थी. उस समय इसके निर्माण में दस हजार रुपये खर्च हुए थे. वहीं सन 1997 में आए भूकंप से इसकी इमारत काफी नुकसान हुआ था. जिसके बाद सन 2000 में इसका रेनोवेशन किया गया.

इसी तरह की होली ट्रिनिटी चर्च भी इतिहास के पन्नों में अपना एक अलग स्थान रखता है. जहां आज क्रिसमस के दिन विशेष आकर्षक साज-सज्जा की गई. यह चर्च सन 1938 में स्थापित किया गया था. इतिहास के झरोखे और प्रभु यीशु पर विश्वास के साथ क्रिसमस का पर्व लोग बेहद खुशी के साथ मना रहे हैं.