मध्य प्रदेश के महानगरों की हवा हुई साफ, प्रदूषणकारी तत्वों का स्तर गिरा

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा एनएएमपी के 2015 से 2017 के दौरान तीन साल के वायु गुणवत्ता सूचकांक के आंकड़ों में यह बात सामने आयी है

मध्य प्रदेश के महानगरों की हवा हुई साफ, प्रदूषणकारी तत्वों का स्तर गिरा
प्रदेश के महानगरों में पीएम10 और पीएम 2.5 का स्तर कम हुआ है

नयी दिल्ली: देश के दस लाख से अधिक आबादी वाले 43 महानगरों में पिछले तीन साल के दौरान हवा की गुणवत्ता को सुधारने के प्रयासों के मिले जुले परिणाम सामने आये हैं. राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (एनएएमपी) के तहत मध्य प्रदेश के महानगरों में हवा में मौजूद प्रदूषणकारी तत्वों (पीएम10 और पीएम 2.5) का स्तर गिर रहा है वहीं, महाराष्ट्र के महानगरों की हवा में ये तत्व लगातार बढ़ रहे हैं. 

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा एनएएमपी के 2015 से 2017 के दौरान तीन साल के वायु गुणवत्ता सूचकांक के आंकड़ों में यह बात सामने आयी है. मंत्रालय द्वारा हाल ही में एनएएमपी के संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र के दस में से मुंबई सहित छह महानगरों में पीएम 10 का स्तर बढ़ा है. जबकि मध्य प्रदेश के चार में से तीन महानगरों (ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर) में पीएम10 और पीएम 2.5 दोनों का स्तर तीन साल में कम हुआ. प्रदेश की राजधानी भोपाल में पीएम10 का स्तर घटता बढ़ता रहा, जबकि पीएम 2.5 का स्तर गिरा है.

रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के मुंबई शहर में एक ओर पीएम 10 का स्तर तीन साल में 106 से बढ़कर 151 पर पहुंच गया और पीएम 2.5 का स्तर 2015 में 26 अंक से घटकर 2016 में 20 होने के बाद 2017 बढ़कर 40 अंक पर पहुंच गया. इसके उलट नवी मुंबई में पीएम 10 का स्तर 2015 में 125 से घटकर 2017 में 105 पर आ गया. 

विशेषज्ञों के अनुसार, पड़ोस के दो शहरों में हवा की गुणवत्ता में असमानता की वजह स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत प्रदूषण नियंत्रण के स्थायी उपायों को माना जा रहा है. मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत वायु गुणवत्ता एवं स्वच्छता संबंधी विभिन्न योजनाओं को दिल्ली मुंबई सहित अन्य महानगरों के उपनगरीय इलाकों में पुराने शहर की तुलना में प्रभावी तरीके से लागू करना आसान साबित हो रहा है। इसलिये इनके परिणामों में विषमता साफ झलक रही है. 

महाराष्ट्र के अन्य महानगरों नागपुर, नासिक, पुणे और ठाणे में पीएम 10 का स्तर बढ़ा है. इसके अलावा परियोजना में शामिल उत्तर प्रदेश के सात महानगरों में आगरा और इलाहाबाद के अलावा अन्य सभी शहरों गाजियाबाद, कानपुर, लखनऊ, मेरठ और वाराणसी में पीएएम 10 का स्तर बढ़ा है. आगरा में पीएम 10 का स्तर 2015 में 186 से घटकर 2017 में 185 और इलाहाबाद में 250 से घटकर 140 पर आ गया है. जबकि राज्य के अन्य शहरों में पीएम 10 की मात्रा औसतन 150 से बढ़कर 250 तक पहुंच गयी है. 

इसके अलावा, राजधानी दिल्ली में भी तीन सालों में पीएम 10 और पीएम 2.5 के मिले जुले परिणाम मिले. दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक पर पीएम 10 का स्तर 2015 में 220 से बढ़कर 2016 में 278 और 2017 में घटकर 241 हो गया. इसी प्रकार पीएम 2.5 का स्तर 2015 में 95 से बढ़कर 2016 में 118 और 2017 में घटकर 106 रह गयी. 

उल्लेखनीय है कि एनएएमपी के तहत दस लाख से अधिक आबादी वाले 43 महानगरों सहित देश के 312 शहरों में 731 स्थानों से वायु गुणवत्ता निगरानी की जा रही है. इसमें वायु प्रदूषण के चार प्रमुख कारकों पीएम 10 पीएम 2.5, सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के स्तर पर 2015 से सतत निगरानी की जा रही है. इनमें से दिल्ली सहित 102 शहरों में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा राज्य प्रदूषण नियंत्रण समितियों के सहयोग से विशेष कार्ययोजना के तहत वायु प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने की मुहिम शुरु की है.

(इनपुट-भाषा)