कोरोना ने तोड़ी माटी पुत्रों की कमर, लॉकडाउन की वजह मिट्टी के बर्तनों का कारोबार ठप

कोरोना वायरस की वजह से देश में लागू लॉकडाउन ने किसानों के साथ-साथ कुम्हारों की भी कमर तोड़कर रख दी है. माटी पुत्रों का प्रमुख सीजन गर्मी में व्यवसाय पूरी तरह बंद हो गया है. जिससे इनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है. बड़े व्यापारियों के लाखों के मटके गोदाम में खराब हो रहे हैं.

कोरोना ने तोड़ी माटी पुत्रों की कमर, लॉकडाउन की वजह मिट्टी के बर्तनों का कारोबार ठप
फाइल फोटो

रतलाम: कोरोना वायरस की वजह से देश में लागू लॉकडाउन ने किसानों के साथ-साथ कुम्हारों की भी कमर तोड़कर रख दी है. माटी पुत्रों का प्रमुख सीजन गर्मी में व्यवसाय पूरी तरह बंद हो गया है. जिससे इनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है. बड़े व्यापारियों के लाखों के मटके गोदाम में खराब हो रहे हैं. वहीं छोटे व्यापारियों के भी चक्के थम गए हैं.  

दरअसल मिट्टी के बर्तन का व्यवसाय वैसे तो साल भर चलता है, लेकिन गर्मियों में मटके और नांद की खासी डिमांड होती है, रतलाम जिले के पंचेड़ में मिट्टी की नांद बनाने का बड़े स्तर पर काम होता है. जिससे व्यापारी खासा मुनाफा कमाते हैं. वहीं इस दौरान शादियों का भी सीजन होने से इन्हें अच्छी कमाई होती है.

ग्रामीणों ने नांद बनाने के लिए मिट्टी व अन्य सामान पहले ही खरीद लिया था, लेकिन नांद बनाने के लिए मिट्टी घोलने और भट्टी में तपाने के लिए मजदूर की जरूरत होती है. मगर लॉकडाउन की वजह से ना तो मजदूर मिल पा रहे हैं, ना ही व्यवसाय चल रहा है.

आपको बता दें कि लॉकडाउन की वजह से बड़े व्यवसायों को भी खासा नुकसान पहुंच रहा है. गर्मी के सीजन को देखते हुए वे लाखों रुपये के मटके पहले ही राजस्थान और गुजरात से खरीद कर ले आते हैं 3 महीने के सीजन में बड़े व्यवसायियों को 4 से 5 लाख का मुनाफा होता है. वहीं छोटे कारोबारी जो खुद मटके व मिट्टी के बर्तन घर पर बनाकर बेचते है उन्हें इस सीजन में 1 से डेढ़ लाख की कमाई होती है.

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कोरोना वायरस की महामारी की वजह से व्यापार पूरी तरह से ठप पड़ा है. इनके कर्ज चुकाने की चुनौती है. साथ ही रोजी रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

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