बासमती चावल पर उबली सियासत, इन वजहों से खिंची पंजाब-मध्य प्रदेश के बीच तलवारें

मध्यप्रदेश के बासमती चावल के पेटेंट के दावे पर कांग्रेस शासित पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बयान से सियासी भूचाल ला दिया है.

बासमती चावल पर उबली सियासत, इन वजहों से खिंची पंजाब-मध्य प्रदेश के बीच तलवारें
साल 2008 से चल रही है बासमती राइस को जीआई टैग की लड़ाई.

भोपाल: मध्यप्रदेश के बासमती चावल के पेटेंट के दावे पर कांग्रेस शासित पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बयान से सियासी भूचाल ला दिया है. साल 2008 से चल रही ये लड़ाई मौजूदा वक्त में कमलनाथ और शिवराज सरकार पर दोषारोपण में बदल गई है.

शुरुआत पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के ट्वीट से हुई, जिसमें मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग देने के दावे पर आपत्ति जाहिर की गई थी. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से यह डिमांड की तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का नाराजगी भरा ट्वीट सामने आया. इसे मध्य प्रदेश के किसानों के साथ अन्याय से जोड़ते हुए शिवराज ने कॉन्ग्रेस की कमलनाथ सरकार को कोसना शुरू कर दिया. यही नहीं प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश के दावे को तरजीह देने की मांग भी की गई.

कैप्टन अमरिंदर सिंह पर राजनैतिक हमले हुए तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मैदान में उतरे. उन्होंने ट्वीट करके कहा कि मैं मध्य प्रदेश के किसानों के साथ हूं और प्रदेश के बासमती को जीआई टैग के दावे के पक्ष में हूं. पंजाब के मुख्यमंत्री अपने किसानों की बात कर रहे हैं और मैं अपने किसानों की बात करूंगा.

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जीआई टैग देने वाली संस्था एपीडा के डायरेक्टर और एमपी के बीजेपी नेता चेतन सिंह ने मामले में दखल देते हुए कहा-'फरवरी 2020 में मद्रास हाई कोर्ट ने एमपी के बासमती को जीआई टैग देने का दावा खारिज कर दिया. इससे पहले हुई 8 सुनवाइयों में मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से पक्ष रखने के लिए कोई वकील ही पैरवी करने नहीं पहुंचा. इस वक्त मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार काबिज थी.' कमलनाथ एमपी को बासमती का पेटेंट देने के लिए इतने ही फिक्रमंद है तो उन्होंने वाणिज्य और उद्योग मंत्री रहते हुए पहल क्यों नहीं की? यह काम उन्हीं के मंत्रालय के अंतर्गत आता था कमलनाथ 10 साल इस मंत्रालय के मंत्री रहे. चेतन सिंह ने कहा कि एपीडा की बैठक में एमपी को बासमती का जीआई टैग देने के लिए 47 में से 42 सदस्यों ने सहमति दी है. लेकिन कोर्ट में फैसला होने के कारण आदेश जारी नहीं किया जा सका.

कांग्रेस के नेशनल मीडिया कोऑर्डिनेटर अभय दुबे ने कहा-'बीजेपी भ्रम फैला रही है. मद्रास हाई कोर्ट में चले मामले में एपीडा की तरफ से ही विरोध किया गया था. मध्य प्रदेश में 15 साल बीजेपी की सरकार रही, लेकिन अब तक बासमती जीआई टैग से महरूम है. कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने तो यह आरोप भी लगाए कि बीजेपी केवल पंजाब के मुख्यमंत्री का जिक्र कर रही है, जबकि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने भी मध्य प्रदेश को जीआई टैग को लेकर आपत्ति जताई है.

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ये है बासमती का अर्थ शास्त्र -
- लजीज खुशबू और लंबे आकार के कारण बासमती मशहूर है.
- हर साल करीब 15 लाख टन बासमती का निर्यात होता है.
- पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर को बासमति का टैग मिल चुका है.
- प्रदेश को करीब 32 हजार करोड़ रुपये कमाई इसके 
- भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश बासमती उत्पादक देश है.
- चीन और ब्राजील भी बासमती की कमी को पूरा करने वाले देशों में हैं.
- खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा बासमती चावल की डिमांड है.
- भारत से ईरान में 21.7%, साउदी अरब में 20%, यूएई में 10.5%, इराक में 10.4%, यूरोप में 9% निर्यात होता है.
- मध्य प्रदेश को बासमती का पेटेंट यानी जीआई टैग मिला तो डिमांड की पूर्ति के साथ किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी.
- मध्य प्रदेश के बासमती उत्पादकों को फिलहाल अधिकतम 34 रुपए प्रति किलो का भाव मिलता है.  जीआई टैग के बाद इसके दाम 124 रुपए प्रति किलो हो सकते हैं.
- मध्यप्रदेश के किसान विदेशों में चावल निर्यात करके लगभग तीन हजार करोड़ की विदेशी मुद्रा प्रतिवर्ष का लाभ पहुंचाते हैं. जीआई टैग से आमदनी दोगुना हो सकती है.
- मध्यप्रदेश के 13 जिलों मुरैना, भिंड, ग्वालियर, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, विदिशा, रायसेन, सीहोर, होशंगाबाद, जबलपुर और नरसिंहपुर में बासमती का उत्पादन होता है.

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