कोरोना से जंग जीतने को तैयार महाराष्ट्र, दुनिया की सबसे बड़ी प्लाज्मा थेरेपी का ट्रायल शुरू

महाराष्ट्र सरकार ने लोगों से अपील की है कि जो कोरोना मरीज कोरोना वायरस से ठीक हो चुके हैं, उन्हें अन्य रोगियों के लिए प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आना चाहिए. 

कोरोना से जंग जीतने को तैयार महाराष्ट्र, दुनिया की सबसे बड़ी प्लाज्मा थेरेपी का ट्रायल शुरू
महाराष्ट्र में दुनिया का पहला प्लाज्मा थेरेपी सेंटर.

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र सीएम उद्धव ठाकरे ने दुनिया के सबसे बड़े 'प्लाज्मा थेरेपी परीक्षण केंद्र' की शुरूआत की है. यहां पर कोरोना (Coronavirus) रोगियों का इलाज प्लाज्मा थेरेपी के जरिए किया जाएगा. इसी के साथ प्लाज्मा थेरेपी को बड़े पैमाने पर प्रयोग करने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य भी बन गया है.

महाराष्ट्र सरकार ने लोगों से अपील की है कि जो कोरोना मरीज कोरोना वायरस से ठीक हो चुके हैं, उन्हें अन्य रोगियों के लिए प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आना चाहिए. महाराष्ट्र के 23 मेडिकल कॉलेजों में प्लाज्मा थेरेपी की सुविधा शुरू की गई है.

अप्रैल में किया गया था ट्रायल

महाराष्ट्र सरकार ने बताया कि ये पहली बार है कि प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल गंभीर रूप से बीमार रोगियों को ठीक करने के लिए किया जा रहा है. ट्रायल के दौरान दावा किया गया है कि यहां दस में से नौ मरीज प्लाज्मा थेरेपी से ठीक हो रहे हैं. प्लाज्मा थेरेपी का पहला प्रयोग राज्य में अप्रैल में किया गया था. 

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स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि यह सुविधा राज्य के 23 मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध होगी. प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग दुनिया भर में हल्के लक्षणों वाले रोगियों के इलाज के लिए किया जाता है. हालांकि, महाराष्ट्र पहला राज्य है जहां इस थेरेपी से हल्के और गंभीर रोगियों का इलाज किया जा रहा है. 

वहीं, चिकित्सा शिक्षा मंत्री अमित देशमुख ने कहा कि महाराष्ट्र ने विश्व रिकॉर्ड प्रणाली शुरू करके दुनिया के लिए एक उदाहरण पेश किया है. राज्य सरकार ने प्लाज्मा डोनेशन, प्लाज्मा बैंक, प्लाज्मा ट्रायल और इमरजेंसी ऑथराइजेशन जैसी सुविधाओं को भी शुरू किया गया है.

क्या होता है प्लाज्मा

प्लाज्मा खून में मौजूद पीले रंग का तरल होता है. रेड ब्लड सेल, वाइट ब्लड सेल और प्लेट्लेट्स को अलग करने के बाद प्लाज्मा बचता है.

प्लाज्मा थेरेपी से कैसे होगा इलाज

प्लाज्मा खून का तरल हिस्सा है. इसके जरिए जरूरत पड़ने पर एंटीबॉडी बनाया जाता है. कोरोना अटैक के बाद शरीर वायरस से लड़ना शुरू करता है. यह लड़ाई एंटीबॉडी लड़ती है जो प्लाज्मा की मदद से ही बनती हैं. अगर शरीर पर्याप्त एंटीबॉडी बना लेता है तो कोरोना हार जाएगा. कोरोना से ठीक होने के बाद भी एंटीबॉडी प्लाज्मा के साथ शरीर में रहती हैं, जिन्हें दान किया जा सकता है. आपको बता दें कि कोरोना से ठीक हो चुके मरीज www.plasmayoddha.in पर रजिस्ट्रेशन करके प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं.