नितिन गडकरी का बयान बीजेपी के अंदर का विरोध दिखाती है: राकांपा
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नितिन गडकरी का बयान बीजेपी के अंदर का विरोध दिखाती है: राकांपा

राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक ने केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी के एक दिन बाद यह दावा किया कि गडकरी खुद को 'मोदी के एक विकल्प' के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं

13 जनवरी को वार्षिक मराठी साहित्य उत्सव में गडकरी ने कहा था कि नेताओं को अन्य क्षेत्रों में दखल नहीं देना चाहिए

नई दिल्ली: जनता से किए वादों को पूरा नहीं करने वाले नेताओं की जनता द्वारा पिटाई किए जाने संबंधी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बयान के बाद राकांपा ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय मंत्री की टिप्पणियां प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी की नाकामी के खिलाफ 'बीजेपी के अंदर उठ रही आवाज' को प्रदर्शित करती है.

राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक ने केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी के एक दिन बाद यह दावा किया कि गडकरी खुद को 'मोदी के एक विकल्प' के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि बीजेपी आगामी लोकसभा चुनाव हारने जा रही है.

मलिक ने कहा, 'तीन राज्यों (राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़) में हुए विधानसभा चुनावों के बाद गडकरी जी जिस तरह से मुखर हुए हैं, उससे संकेत मिलता है कि चुनाव के बाद मोदी या बीजेपी की सरकार नहीं रहेगी'. गौरतलब है कि पिछले महीने हिंदी पट्टी के इन तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में राकांपा की सहयोगी पार्टी कांग्रेस विजेता बन कर उभरी थी और उसने वहां बीजेपी को सत्ता से बेदखल कर दिया.

मलिक ने कहा, 'कहीं ना कहीं, मोदी की नाकामी को लेकर बीजेपी के अंदर भी आवाज उठ रही है. चूंकि बीजेपी हारने जा रही है, इसलिए वह (गडकरी) खुद को मोदी के विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं'. 

दरअसल, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गडकरी ने रविवार को कहा था कि जो नेता लोगों को सपने बेचते हैं, लेकिन उन्हें पूरा कर पाने में नाकाम रहते हैं तो जनता उनकी पिटाई भी करती है. मंत्री ने जोर देते हुए कहा था कि वह अपने वादों को पूरा करने में यकीन रखते हैं. 

इससे पहले, पिछले महीने गडकरी ने पुणे में एक कार्यक्रम में कहा था कि नेतृत्व में शिकस्त और नाकामियों को स्वीकार करने की प्रवृत्ति होनी चाहिए. उनकी यह टिप्पणी हालिया विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मिली हार के बाद आई थी. इस बीच, यवतमाल में 13 जनवरी को वार्षिक मराठी साहित्य उत्सव में गडकरी ने कहा था कि नेताओं को अन्य क्षेत्रों में दखल नहीं देना चाहिए. 

साहित्य उत्सव में शामिल होने के लिए लेखिका नयनतारा सहगल को दिया गया न्यौता कथित तौर पर एक राजनीतिक दल के दबाव में आकर वापस लिए जाने के बाद हुए विवाद के बाद गडकरी ने यह टिप्पणी की थी.

(इनपुट-भाषा)

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