मणिपुर हमले की एनएससीएन (के) ने ली जिम्मेदारी, सेना प्रमुख ने की स्थिति की समीक्षा

इम्फाल : मणिपुर के चंदेल जिले में गुरुवार को भारतीय सेना के 6 डोगरा रेजीमेंट पर हुए भीषण हमले पर ताजा घटनाक्रम उभर रहे हैं। इस हमले से जुड़े ताजा घटनाक्रम इस प्रकार हैं-  

मणिपुर हमले की एनएससीएन (के) ने ली जिम्मेदारी, सेना प्रमुख ने की स्थिति की समीक्षा

इम्फाल : मणिपुर के चंदेल जिले में गुरुवार को भारतीय सेना के 6 डोगरा रेजीमेंट पर हुए भीषण हमले पर ताजा घटनाक्रम उभर रहे हैं। इस हमले से जुड़े ताजा घटनाक्रम इस प्रकार हैं-  

-उग्रवादियों के हमले में गुरुवार को 18 सैनिकों के शहीद होने और 11 अन्य के घायल होने की घटना के मद्देनजर सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग आज इम्फाल पहुंचे और स्थिति की समीक्षा की।

-सेना के सूत्रों ने बताया कि सुहाग को तीसरी कोर के कमांडर और शीर्ष पुलिस अधिकारी घटना के बारे में जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उग्रवादियों के खिलाफ दीर्घकालिक और लक्षित अभियानों के लिए एक विस्तृत अभियान योजना पर काम किया जा रहा है।

-सूत्रों ने बताया कि फिलहाल ध्यान शहीद सैनिकों के शवों को भेजने और क्षेत्र की पूरी तरह छानबीन करने पर केंद्रित है। दो दशक में इस तरह के सबसे भीषण हमले में उग्रवादियों ने गुरुवार को मणिपुर के चंदेल जिले में घात लगाकर सेना के एक काफिले को निशाना बनाया जिसमें कम से कम 18 जवान शहीद हो गए और 11 अन्य घायल हो गए।

-सेना और नागरिक प्रशासन के अधिकारियों को संदेह है कि हमले के पीछे मणिपुर के उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और कांगलेई यावोल कन्ना लुप (केवाईकेएल) का हाथ है, जिन्होंने बारूदी सुरंगों, रॉकेट चालित ग्रेनेडों और स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीती रात हमले की निन्दा की तथा इसे बर्बर और दुखद करार दिया।

-घात लगाकर किए गए इस भीषण हमले के कुछ घंटों बाद उग्रवादी संगठन नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल आफ नागालैंड-खपलांग (एनएससीएन (के)) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। मणिपुर के चंदेल जिले में हुए इस हमले में भारतीय सेना के 6 डोगरा रेजीमेंट के 18 जवान मारे गए। बता दें कि (एनएससीएन (के)) ने इस साल मार्च में सरकार के साथ अपना युद्धविराम खत्म कर दिया था। 

'तलाशी और नष्ट' अभियान

 

रिपोर्टों के मुताबिक केंद्र सरकार ने सेना से कहा है कि वह पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठनों-एनएससीएन (के) और अन्य उग्रवादियों समूहों के खिलाफ 'तलाशी और नष्ट' अभियान शुरू करे। रिपोर्टों के मुताबिक सरकार ने सेना से हाल कि दिनों में हिंसा में संलिप्त आतंकवादी समूहों को कड़ाई से निपटने का निर्देश दिया है।

गुरुवार को सेना पर हुआ हमला पिछले दो दशकों का सबसे बड़ा हमला है। आतंकी एवं उग्रवादी समूहों से कड़ाई से निपटने का निर्णय एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। इस बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल, सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग और अन्य शीर्ष अधिकारी मौजूद थे।

राजनाथ सिंह ने निर्देश दिया कि हमले में शामिल किसी उग्रवादी को खुला नहीं घूमने देना चाहिए और इस हमले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ यथासंभव कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। रक्षा सूत्रों ने कहा कि सेना पर पिछले दो दशक में हुआ यह सबसे भयावह हमला है।

सेना के प्रवक्ता कर्नल रोहन आनंद ने दिल्ली में बताया, ‘हमले में 18 सैन्यकर्मी मारे गये और 11 घायल हो गये।’ पहले आनंद ने मरने वालों की संख्या 20 बताई थी। पुलिस ने बताया कि एक संदिग्ध उग्रवादी भी मारा गया है।

हमला गुरुवार सुबह नौ बजे के आसपास तब हुआ जब गश्ती दल पारालोंग और चारोंग गांवों के बीच में एक स्थान पर पहुंचा था। मणिपुर के गृह सचिव जे. सुरेश बाबू ने कहा, ‘यह काम पीएलए का लगता है जिसमें ‘केवाईकेएल’ संगठन की ओर से मदद मिलने का भी संदेह है। हम अभी और जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।’ हालांकि सेना का मानना है कि हमले में केवाईकेएल का हाथ है।

सेना के अनुसार हमले का स्थान भारत-म्यामां सीमा से करीब 15-20 किलोमीटर दूर है। रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस कायराना कृत्य को अंजाम देने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

एक पुलिस अधिकारी ने यहां बताया कि 6 डोगरा रेजीमेंट का एक दल इंफाल से लगभग 80 किलोमीटर दूर तेंगनोपाल-न्यू समतल रोड पर सामान्य दिनों की तरह रोड ओपनिंग पेट्रोल (आरओपी) पर था। उसी समय एक अज्ञात उग्रवादी संगठन ने घात लगाकर शक्तिशाली देसी बम (आईईडी) से दल पर हमला कर दिया।

(एजेंसी इनपुट के साथ)