उमर अब्दुल्ला ने कहा- 'सैन्य समाधान राजनीतिक मुद्दों को नहीं सुलझा सकता'

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज (रविवार) कहा कि कश्मीर में ‘राजनीतिक मुद्दा’ का हल नहीं करने के केंद्र के फैसले ने राज्य में स्थिति बदतर कर दी है. साथ ही, उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सैन्य समाधान का इस्तेमाल ‘राजनीतिक समस्या’ को सुलझाने में नहीं किया जा सकता. 

उमर अब्दुल्ला ने कहा- 'सैन्य समाधान राजनीतिक मुद्दों को नहीं सुलझा सकता'
उमर ने कहा कि सैन्य समाधान का इस्तेमाल ‘राजनीतिक समस्या’ को सुलझाने में नहीं किया जा सकता (फाइल फोटो)

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज (रविवार) कहा कि कश्मीर में ‘राजनीतिक मुद्दा’ का हल नहीं करने के केंद्र के फैसले ने राज्य में स्थिति बदतर कर दी है. साथ ही, उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सैन्य समाधान का इस्तेमाल ‘राजनीतिक समस्या’ को सुलझाने में नहीं किया जा सकता. 

विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर ने आरोप लगाया कि केंद्र ने राज्य सरकार के साझा न्यूनतम कार्यक्रम (गठजोड़ के एजेंडा) से औपचारिक रूप से और सार्वजनिक तौर पर अपनी दूरी बना ली है. केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ शासन में है. उमर ने कहा कि कश्मीर में राजनीतिक मुद्दों में शामिल नहीं होने के केंद्र सरकार के सचेत फैसले ने राज्य में स्थिति बदतर कर दी, ऐसे में पीडीपी-भाजपा सरकार के पूरी तरह से नाकाम रहने से बेचैनी और असंतोष की भावना कई गुना बढ़ गई है.

नेकां नेता ने कहा कि पीडीपी-भाजपा गठजोड़ करीब ढाई साल से सत्ता में हैं, जबकि चुनाव से पहले दोनों पार्टियों ने अलग-अलग किए गए वादों तथा फिर सामूहिक रूप से गठजोड़ के तौर पर न्यूनतम साझा कार्यक्रम में किए वादों में एक को भी पूरा नहीं किया है. उन्होंने यहां पार्टी मुख्यालय नवा-ए-सुबह में एक कार्यक्रम के दौरान यह टिप्पणी की. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर में राजनीतिक अनिश्चितता की भावना अभूतपूर्व है क्योंकि मौजूदा राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने राजनीतिक भागीदारी और पहल के अभाव के चलते एक बहुत ही संकटपूर्ण स्थिति बना दी है.

नेकां के कार्यकारी अध्यक्ष ने घाटी में छात्रों और युवाओं के दमन की निंदा करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ अनियंत्रित बल के बेलगाम इस्तेमाल और आक्रामक तरकीब शांति बहाल करने में मदद नहीं करेगा, बल्कि यह जमीन पर पहले से मौजूद अलगाव की स्थिति को और हवा देगा. उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं की बढ़ती बेचैनी और असंतोष पर ध्यान देने की बजाय महबूबा मुफ्ती सरकार ने छात्रों के प्रदर्शन को कुचलने के लिए अभूतपूर्व तरीके से निर्मम बल का सिलसिलेवार तरीके से सहारा लिया है. उन्होंने दावा किया कि स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि श्रीनगर में महिला कॉलेज के परिसरों के अंदर भी आंसू गैस के गोले छोड़े गए.

उमर ने कहा कि क्या महबूबा से उम्मीद की जा सकती है कि वह महिला कॉलेज में जाएं और परेशान छात्राओं के साथ बैठें तथा उनकी शिकायतें सुनें? उन्होंने राज्य सरकार को जीएसटी लागू करने का कोई दुस्साहस करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर की तुलना अन्य राज्यों से नहीं की जा सकती. हमारा अपना संविधान है, हमें विशेष दर्जा प्राप्त है और हमारी अपनी वित्तीय स्वायत्तता है- जिस पर कोई बात नहीं हो सकती.’’ उन्होंने कहा कि नेकां राज्य की वित्तीय स्वायत्तता का किसी भी कीमत पर क्षरण करने की इजाजत नहीं देगी.