100 से ज्यादा कंपनियों को करोड़ों का चूना लगाया, 7 गिरफ्तार; तरीका जानकर हो जाएंगे हैरान!

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने करोड़ों की ठगी करने वाले 7 शातिर महाठगों को गिरफ्तार किया है. एक्सपोर्ट कंपनियों की शिकायत के बाद पुलिस ने इन्हे धर दबोचा. डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के सिस्टम की खामियों का फायदा उठाने वालों ने सरकार की तरफ से मिलने वाले रकम अपने खातों में ट्रांसफर कराई थी.

100 से ज्यादा कंपनियों को करोड़ों का चूना लगाया, 7 गिरफ्तार; तरीका जानकर हो जाएंगे हैरान!
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने करोड़ों की ठगी करने वाले 7 शातिर महाठगों को गिरफ्तार किया है. एक्सपोर्ट कंपनियों की शिकायत के बाद पुलिस ने इन्हे धर दबोचा. डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के सिस्टम की खामियों का फायदा उठाने वालों ने सरकार की तरफ से मिलने वाले रकम अपने खातों में ट्रांसफर कराई थी. साइबर सेल की आगे जांच में चौकाने वाले खुलासे हु जिसमें साइबर सेल ने पुणे के एक चार्टड अकाउंटेंट समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है.

साइबर सेल ने उन दो अलग-अलग मॉड्यूल का खुलासा किया है, जो डीजीएफटी ( DGFT) यानी डायरेक्टर जनरल ऑफ फोरैन ट्रेड के पोर्टल से कंपनी की जानकारियां चुराने के बाद डिजिटल सिग्नेचर के जरिए सरकार से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि अपने अकाउंट में ट्रांसफर करा लेते थे. विदेशी मुद्रा भारत में लाने के एवज में सरकार ऐसी कंपनियों को कुछ रकम ट्रांसफर करती थी और रकम उनके निशाने पर होती थी.

साइबर सेल को चार एक्सपोर्ट हाउस ने शिकायत की थी कि उन्होंने पिछले साल अमेरिका, यूएई, यूके, में गारमेंट एक्सपोर्ट किया था. और उनके एक्सपोर्ट हाउस के बैंक एकाउंट में ऑनलाइन ट्रांसफर होने वाली रकम उन तक नहीं पहुंच रही. पकड़े गए शातिर ठग दरअसल सरकारी विभाग DGFT के पोर्टल पर जाकर RoSCTL (Rebate of State & Central Taxes and Levies) Licenses of genuine Exporters की जानकारी चुरा लेते थे. जिसके बाद एक्सपोर्ट की प्रक्रिया पूरी होते ही ये पोर्टल पर जाकर डिजिटल साइन के जरिए कंपनियों को जाने वाली रकम अपने खाते में ट्रांसफर करवा लेते थे. गिरोह अभी तक 100 से ज्यादा एक्सपोर्ट कंपनियों को करीब 3 करोड़ से ज्यादा का चूना लगा चुका है.

साइबर सेल को अपनी जांच में पता चला कि ये लोग इम्पोर्ट एक्पोर्ट कोड (IEC CODE) का इस्तेमाल करके कंपनी के डायरेक्टर और कंपनी की सारी डिटेल्स निकाल लेते थे. जिससे ये पता चल जाता था कि कंपनी का रिबेट सरकार की तरफ से बाकी है. उसके बाद फर्जी दस्तावेजोंं के आधार पर DSC यानी डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट हासिल कर लेते और वीडियो वेरिफिकेशन के समय खुद को कंपनी का डायरेक्टर बता देते थे. DSC मिलने के बाद ये लोग DGFT वेबसाइट पर जाकर लॉग इन करने के बाद रिबेट की रकम को अलग अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए आवेदन करते. दरअसल DGFT की वेबसाइट में कुछ खामियां थी जिसका फायदा ये लोग उठाते थे. फिलहाल साइबर सेल इन महाशतिर ठगों से पूछताछ कर इनकी बाकी क्राइम कुंडली भी खंगाल रही है. 

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