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कोरोना से जंग में भारत को मिली पहली कामयाबी, इस 'सुई' से लोगों को नहीं होगी परेशानी

वैक्सीन और सिरिंज के मामले में भारत ना केवल आत्मनिर्भर है बल्कि इस वक्त हर कंपनी 100 प्रतिशत क्षमता पर काम करके वैश्विक बाजार की जरूरतों के हिसाब से तैयारी कर रही है.

पूजा मक्कड़ | Dec 02, 2020, 22:23 PM IST

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) से बचाने वाली वैक्सीन (Corona Vaccine) किस कंपनी की होगी? कैसे लगाई जाएगी? किसे कितनी डोज दी जाएगी? ये सभी वो सवाल हैं जिनके जवाब आज हर इंसान जानना चाहता है. हर व्यक्ति ये जानने के लिए उत्सुक है कि उस तक वैक्सीन कब तक पहुंचेगी और उसे ये वैक्सीन कैसे लगाई जाएगी. लेकिन किसी का भी ध्यान इस ओर नहीं गया कि वैक्सीन लगाने के लिए सबसे पहले जिस चीज की जरूरत होगी इसके पुख्ता इंतजाम हैं भी या नहीं. यहां हम बात कर रहे हैं सिरिंज (Syrienge) की.  

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ZEE NEWS ने खोजा जवाब

ZEE NEWS find answer

ZEE NEWS की टीम जब इस सवाल का जवाब खोजने निकली तो पता चला कि सिरिंज के मामले में भारत पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन चुका है. कोरोना वायरस (Coronavirus) से बचाने के लिए जितनी भी सिरिंज की जरूरत पड़ेगी, वो सभी भारत में बनाई जा रही हैं. इस पर बड़े पैमाने पर काम शुरू हो गया है.

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हर शख्स को मिलेगी वैक्सीन की इतनी 'डोज'

Every person will get 0.5 ML dose of Corona Vaccine

कोरोना वैक्सीन की एक डोज 0.5 ml की होगी. इसलिए ऐसी सिरिंज बनाई जा रही हैं, जिसमें 0.5 ML की डोज आ सकती है. फिलहाल दुनिया में जितनी भी वैक्सीन बनाई जा रही हैं, वो दो डोज की वैक्सीन हैं. अभी तक के अनुमान के मुताबिक, ये डोज आधे एमएल की होगी. उसी हिसाब से ये सिरिंज बनाई गई हैं. 

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तेजी से हो रहा 'ऑटो डिसेबल सिरिंज'

Auto Disable Syringes is used for vaccination

ये ऑटो डिसेबल सिरिंज (Auto Disable Syrienge) है. यानी इससे एक बार इंजेक्शन लगाए जाने के बाद ये दोबारा इस्तेमाल नहीं की जा सकती. विश्व में इसी तरह की सिरिंज को सबसे सुरक्षित माना जाता है.

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पहले किसे लगाया जाएगा कोरोना का टीका

Who will be put corona vaccine first

भारत की जनसंख्या 135 करोड़ है. मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि पहले उन लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है. इसमें हेल्थ केयर वर्कर, बुजुर्ग और बीमार लोग शामिल हैं. 

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2021 में 90 करोड़ सिरिंज की जरूरत

90 crore syringes needed in 2021

हालांकि अगर संक्रमण की चेन टूट गई तो हो सकता है कि हर किसी को वैक्सीन लगाने की जरूरत ही न पड़े. इसके अलावा 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी. कोई भी नई वैक्सीन पहले वयस्कों को लगाई जाती है. बच्चों पर लगाने के लिए इसके लिए ट्रायल अलग से करने पड़ते हैं. एक अनुमान के मुताबिक, भारत को पहले वर्ष में तकरीबन 90 करोड़ सिरिंज की जरूरत पड़ेगी.

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1 घंटे में 1 लाख सिरिंज बना रही ये कंपनी

This company is making 1 lakh syringes in 1 hour

कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई अभी तक मजबूती से लड़ी गई है, लेकिन अब इस लड़ाई में वो जीतेगा जो सबसे पहले अपने देशवासियों तक वैक्सीन पहुंचा देगा. भारत इस दिशा में भी पीछे नहीं है. ये तस्वीरें इसी बात का भरोसा दिला रही हैं. ये भारत की सबसे बड़ी सिरिंज बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान सिरिंज का प्लांट है. हरियाणा के फरीदाबाद में बने इस प्लांट में काम किस रफ्तार से चल रहा है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यहां इस वक्त हर एक घंटे में एक लाख सिरिंज बनाई जा रही हैं.

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20 करोड़ सिरिंज बनाने का मिला ऑर्डर

Order to make 20 million syringes

कंपनी को 20 करोड़ सिरिंज बनाने का ऑर्डर मिल चुका है, जिसमें से 10 करोड़ बनकर तैयार हैं. हालांकि भारत की जरूरत इससे कहीं ज्यादा है. कोरोना की वैक्सीन दो बार में लगाई जाएगी. पहली डोज के 28 दिन बाद दूसरी डोज. इस लिहाज से फिलहाल 90 करोड़ वैक्सीन लगाए जाने का आंकलन किया गया है. इतने बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन के लिए सरकार ने ऑटो डिसेबल सिरिंज चुनी है. 

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कामयाबी का पहला पड़ाव हुआ पार

The first step of success passed

वैक्सीन और सिरिंज के मामले में भारत ना केवल आत्मनिर्भर है बल्कि इस वक्त हर कंपनी 100 प्रतिशत क्षमता पर काम करके वैश्विक बाजार की जरूरतों के हिसाब से भी तैयारी कर रही है. हालांकि अभी चुनौतियां कम नहीं हैं. वैक्सीन की कोल्ड स्टोरेज, वेस्ट डिस्पोजल और सबसे बड़ी बात, इंजेक्शन लगाने के लिए ट्रेंड हेल्थ स्टाफ. इन चुनौतियों को हल करने पर अभी काम चल रहा है. लेकिन पहला बड़ा पड़ाव यानी वैक्सीन और सिरिंज. इन्हें कामयाबी से पार किया जा चुका है.