साख बरकरार रखना मीडिया के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती : मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि मीडिया के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती अपनी साख को बरकरार रखना है। साथ ही उन्होंने लोकतंत्र के ‘‘शुद्धिकरण’’ के लिए आलोचना के महत्व पर बल दिया लेकिन आरोप लगाये जाने के चलन से असहमति जतायी।

साख बरकरार रखना मीडिया के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती : मोदी

कोल्हापुर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि मीडिया के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती अपनी साख को बरकरार रखना है। साथ ही उन्होंने लोकतंत्र के ‘‘शुद्धिकरण’’ के लिए आलोचना के महत्व पर बल दिया लेकिन आरोप लगाये जाने के चलन से असहमति जतायी।

उन्होंने मराठी समाचारपत्र ‘‘पुढारी’’ के प्लेटिनम जुबली समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘यदि आलोचना नहीं हुई तो लोकतंत्र ठहर जायेगा। बहता हुआ जल स्वच्छ रहता है लेकिन यह बंध जाने पर गंदला हो जाता है। लोकतंत्र को शुद्ध करने का सर्वोत्तम तरीका आलोचना है।’’

मोदी ने कहा, ‘‘आलोचना का गुणगान होना चाहिए क्योंकि इससे सत्य की परीक्षा होती है और यह गलत राह पर जाने से रोकती है। मीडिया यह सेवा कर सकता है। दुखद है कि आलोचना नहीं हो रही जिसके कारण सरकार में लोग बिगड़ गये हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह लोकतंत्र का दुर्भाग्य है कि बहुत कम आलोचना हो रही है और केवल आरोप लगाये जा रहे है। आरोप लगाने से हमें कुछ हासिल नहीं होता।’’ प्रधानमंत्री कहा कि उस लोकतंत्र में मीडिया के समक्ष अपनी साख को बरकरार रखना सबसे बड़ी चुनौती है जहां संवाद का बहुत महत्व होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘आपातकाल में देखा गया कि व्यक्तिगत ताकत की भूख के लिए लोकतंत्र का दमन किया गया। समाचारपत्रों पर ताले जड़ दिये गये एवं इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाने वाले मालिकों को जेल में डाल दिया गया। केवल सरकार जो चाहती थी वही छप रहा था। जब लोगों को यह पता चला तो उन्होंने समाचारपत्र पढना ही छोड़ दिया।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘वर्षों की साधना के बाद मीडिया ने इस प्रकार की साख हासिल की है कि आम आदमी सुनी सुनायी बातों पर ध्यान नहीं देता और भरोसा करता है कि समाचारपत्र उन्हें सच्चाई बतायेगा। इससे उन पर बड़ी जिम्मेदारी भी आ जाती है।’’ उन्होंने कहा कि कई समाचारपत्रों ने दमन के वाबजूद अपनी साख को बरकरार रखा एवं पुढारी उनमें से एक है।

मीडिया से धारदार आलोचना की शपथ लेने का आह्वान करते हुए मोदी ने कहा कि आलोचना के लिए काफी कठिन कार्य की जरूरत पडती है। आरोप लगाना आसान होता है। आलोचना जितनी धारदार होगी, उतना ही शासन बेहतर होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘इलेक्ट्रानिक मीडिया के आने से अखबारों के लिए चुनौतियां बढ़ गयी हैं। जब 24 घंटे चलने वाले चैनल शुरू हुए तो प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गयी। लोगों को सच्ची खबर चाहिए और अब अच्छी खबर की भूख बढ़ गयी है। जो लोग इसे समझते हैं, उनकी साख बढ़ेगी।’’ मोदी ने कहा कि लोकतांत्रिक ढांचे में सरकार जो दावा करती है लोग उस पर विश्वास करने के लिए तैयार नहीं होते और चाहते हैं कि उन्हें सच किसी अन्य स्रोत से पता चले।

उन्होंने कहा, ‘‘यह लोकतंत्र की ताकत है जहां संवाद सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है।’’