सस्ते डेटा के दिन लद गए! जानें टेलीकॉम कंपनियों के दाम बढ़ाने की असल वजह
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सस्ते डेटा के दिन लद गए! जानें टेलीकॉम कंपनियों के दाम बढ़ाने की असल वजह

सबसे ज्यादा हैरानी की बात ये है कि रिलायंस जिओ जैसी जो कंपनी सबसे सस्ती सेवाओं के वादे के साथ बाजार में आई थी, अब उसने भी अपने प्लान महंगे कर दिए हैं. इस कंपनी का टेलीकॉम क्षेत्र के 37 प्रतिशत बाजार पर कब्जा है, जबकि एयरटेल और वोडाफोन की हिस्सेदारी 30 और 23 प्रतिशत है.

सस्ते डेटा के दिन लद गए! जानें टेलीकॉम कंपनियों के दाम बढ़ाने की असल वजह

नई दिल्ली: अब से आपके प्रीपेड मोबाइल फोन का खर्च हर महीने 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा. देश की बड़ी-बड़ी प्राइवेट टेलिकॉम कंपनियों ने पहले तो आपको मुफ्त में सिम कार्ड, कॉलिंग और इंटरनेट प्लान बेचे और आपको इस मुफ्त के DATA की लत लगवा दी. जब आपको दिन भर अपने मोबाइल फोन पर खुलकर बात करने और वीडियो देखने की आदत पड़ गई तो इन कंपनियों ने अपनी सेवाएं महंगी कर दीं.

इन कंपनियों ने बढ़ाए दाम

भारत की लगभग हर प्राइवेट टेलीकॉम कंपनी ने अपने प्रीपेड टैरिफ प्लान 20 से 25 प्रतिशत तक महंगे कर दिए हैं. भारत में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या 100 करोड़ है और इन 100 करोड़ उपभोक्ताओं में से 95 करोड़ प्रीपेड प्लान का ही इस्तेमाल करते हैं. पिछले हफ्ते एयरटेल ने प्रीपेड प्लान के दाम 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की थी, इसके बाद Vodafone Idea ने भी अपने प्रीपेड प्लान के दाम 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिए और अब Reliance Jio ने भी अपने प्रीपेड प्लान को 21 प्रतिशत महंगा कर दिया है. यानी अगर आप इनमें से किसी भी कंपनी का सिम कार्ड इस्तेमाल करते हैं तो आपको कॉलिंग और DATA के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे.

1 जीबी डाटा का अभी कितना आता है खर्च

एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया के नए दाम लागू हो चुके हैं जबकि रिलायंस जिओ के प्रीपेड टैरिफ प्लान की कीमतें 1 दिसंबर से लागू होंगी. दुनिया के जिन 30 देशों में कॉलिंग और डाटा प्लान सबसे सस्ते हैं, उनमें भारत 28वें नंबर पर है. भारत में आपको एक जीबी डाटा के लिए औसतन 6 रुपये 75 पैसे चुकाने पड़ते हैं. जबकि जिंबाब्वे जैसे देश में एक जीबी डाटा के लिए 75 डॉलर्स यानी करीब साढ़े 5 हजार रुपये देने पड़ते हैं. इतने ही डाटा के लिए ग्रीस में ढाई हजार रुपये स्विटजरलैंड में डेढ़ हजार रुपये और अमेरिका में 600 रुपये देने पड़ते हैं. यानी भारत में कॉलिंग और मोबाइल फोन पर दिन भर वीडियो देखना दुनिया के कई देशों के मुकाबले बहुत सस्ता है लेकिन अब सस्से डाटा के ये दिन जाने वाले हैं.

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जिओ के चक्कर में हुआ नुकसान?

वर्ष 2016 में रिलायंस जिओ ने भारत में बहुत कम दामों में अपनी सेवाएं शुरू की थीं, इसके बाद तीन वर्षों में ही इस कंपनी के यूजर्स की संख्या 40 करोड़ तक पहुंच गई. दबाव में आकर बाकी की प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों को भी अपने प्लान सस्ते करने पड़े, जिससे इन कंपनियों का घाटा जबरदस्त तरीके से बढ़ गया. उदाहरण के लिए इसी साल सितंबर में एयरटेल को 763 करोड़ रुपये और वोडाफोन आइडिया को 7 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ था. इन कंपनियों का कहना है कि दाम बढ़ाने से इनका घाटा कम होगा और ये कंपनियां 5G टेक्नोलॉजी में निवेश कर पाएंगी. इसके अलावा एयरटेल और वोडाफोन आइडिया पर भारत सरकार के 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पैसे बकाया हैं. जिन्हें इन्हें वापस करना है और दाम बढ़ने के बीचे एक ये भी एक बड़ी वजह है.

मुफ्त के चक्कर में लगी आदत

सबसे ज्यादा हैरानी की बात ये है कि रिलायंस जिओ जैसी जो कंपनी सबसे सस्ती सेवाओं के वादे के साथ बाजार में आई थी, अब उसने भी अपने प्लान महंगे कर दिए हैं. इस कंपनी का टेलीकॉम क्षेत्र के 37 प्रतिशत बाजार पर कब्जा है, जबकि एयरटेल और वोडाफोन की हिस्सेदारी 30 और 23 प्रतिशत है. जब इन कंपनियों के बीच प्राइस वार शुरू हुआ था और इनके प्लान बहुत ज्यादा सस्ते हो गए थे हमने तभी कहा था कि एक दिन ऐसा आएगा, जब यूजर्स को डाटा प्लान की लत लगवाने के बाद ये कंपनियां अचानक अपने प्लान महंगे कर देंगी और हर महीने प्रति व्यक्ति औसतन 15 जीबी इंटरनेट डाटा खर्च करने वाले भारत के लोगों के पास ज्यादा पैसे खर्च करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा अब ठीक वैसा ही हो रहा है. इसलिए याद रखिए कि आपको जब भी कोई चीज मुफ्त में दी जाती है तो वो असल में मुफ्त नहीं होती बल्कि ऐसा सिर्फ आपको उस चीज की आदत लगाने के लिए किया जाता है और फिर जैसे ही आप उस पर निर्भर हो जाते हैं कंपनियां आपसे मुनाफा कमाने की तरफ देखने लगती हैं.

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