सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करें : अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने जाति, भाषा या सम्प्रदाय का विचार किये बिना सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने की जरूरत पर आज बल दिया और कहा कि लोगों को जेल में डाले जाने के भय के बिना विरोध प्रकट करने की इजाजत होनी चाहिए। केरी की यह टिप्पणी एमनेस्टी इंटरनेशनल के खिलाफ बेंगलुरू में राष्ट्रद्रोह का आरोप लगाये जाने के बाद अमेरिका द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थन में बोलने के कुछ दिन बाद आयी है।

नई दिल्ली : अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने जाति, भाषा या सम्प्रदाय का विचार किये बिना सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने की जरूरत पर आज बल दिया और कहा कि लोगों को जेल में डाले जाने के भय के बिना विरोध प्रकट करने की इजाजत होनी चाहिए। केरी की यह टिप्पणी एमनेस्टी इंटरनेशनल के खिलाफ बेंगलुरू में राष्ट्रद्रोह का आरोप लगाये जाने के बाद अमेरिका द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थन में बोलने के कुछ दिन बाद आयी है।

केरी ने यहां आईआईटी में कहा, ‘अमेरिका और भारत को हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखना होगा और उस स्वतंत्रता को बरकरार रखना होगा जो हमारे देशों को परिभाषित करती है।’’ उन्होंने कहा कि सभी को हमारे नागरिकों की जाति, भाषा या सम्प्रदाय का विचार किये बिना हमारे सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करनी होगी।

केरी ने यह बात आतंकवाद के मूल कारण पर प्रहार करने की जरूरत पर बोलते हुए कही और यह भी कहा कि यह अलग अलग देशों में भिन्न है। उन्होंने कहा, ‘ताकि वे प्रतिकार या प्रतिशोध के भय या जेल होने के डर के बिना शांतिपूर्ण तरीके से अपने विचार व्यक्त कर सके।’ उन्होंने यद्यपि युवाओं में निराशा के लिए भ्रष्टाचार और कुशासन को मुख्य कारण में से एक बताया। केरी ने कहा, ‘हमें मिलकर और सद्भाव से काम करना होगा, जिससे कि आतंकवादियों के लिए भागने की कोई जगह न हो, छिपने की कोई जगह न हो और अपना भविष्य की योजना अथवा तैयारी के लिए कोई जगह नहीं हो।’ उन्होंने कहा कि किसी को भी आतंकवादियों को सफल नहीं होने देना चाहिए और उसके मूल कारण पर प्रहार करना जरूरी है।

केरी ने कहा कि जो समाज अपने नागरिकों को समान मौके नहीं देता वह उन्हें एक संभावित अतिवादी या आतंकवादी बना देता है। उन्होंने कहा, ‘इसलिए इसका यह भी मतलब है कि हमें प्रत्येक धर्म और सम्प्रदाय के बीच सहिष्णुता, स्वीकार्यता, करूणा, परस्पर समझ के सेतु का निर्माण करना होगा।’