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मोदी कैबिनेट के ऐसे मंत्री जिन्होंने बस में काटी है टिकट, लोगों के दिल में बनाई जगह

नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में एक ऐसे मंत्री भी शामिल हुए है जिन्होंने आम लोगों के लिए संघर्ष किया और लड़ाई भी लड़ी. इस दौरान उन्होंने बस कंडक्टर का भी काम किया है. आम लोगों की दिल में जगह बनाने वाले इस मंत्री ने राजनीतिक सफर के दौरान विपक्ष के दिग्गज नेताओं से भीड़ने से भी गुरेज नहीं किया.

मोदी कैबिनेट के ऐसे मंत्री जिन्होंने बस में काटी है टिकट, लोगों के दिल में बनाई जगह
वार्ड पार्षद से लेकर सांसद तक का चुनाव इन्होंने लड़ा. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: एनडीए के नेतृत्व कर्ता नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट में शामिल मंत्रियों के विभाग का बंटवारा हो गया. जिसमें राजस्थान के तीन मंत्रियों में से गजेंद्र सिंह शेखावत को कैबिनेट और कैलाश चौधरीअर्जुन राम मेघवाल को राज्य मंत्री के रुप में शामिल किया गया.

इस बार विभागों में बंटवारे में बाड़मेर से सांसद कैलाश चौधरी को कृषि राज्य मंत्री बनाया गया. राष्ट्रपति भवन से शुक्रवार को जारी प्रेस-विज्ञप्ति में इस बात की जानकारी दी गई. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान बाड़मेर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए कैलाश चौधरी ने राज्य मंत्री के रुप में शपथ ली. उन्होंने चुनाव में बाड़मेर से कांग्रेस प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह को मात दी.

चुनाव के दौरान कैलाश चौधरी ने कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह को 3, 23, 808 वोट से शिकस्त दी. इस दौरान चुनाव में कैलाश चौधरी को 8,46,526 मत मिला. राजनीतिक विश्लेषकों के लिए नतीजा चौकाने वाला था. 

राजस्थान के बाड़मेर जिले के बायतू के रहने वाले कैलाश चौधरी का जन्म 20 सितंबर, 1973 को हुआ था. उन्होंने एमए के साथ बीपीएड की डिग्री भी हासिल की है. 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में बायतू विधानसभा से बीजेपी की टिकट पर उन्होंने पहली बार जीत हासिल की थी. लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान कैलाश चौधरी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा.

आपको बता दें कि बीजेपी ने अपने सीटींग उम्मीदवार का टिकट वहां से काट दिया था. जिसके बाद वे चुनाव जीतने में कामयाब हुए. बाड़मेर सीट पर कांग्रेस से कभी बीजेपी के दिग्गज नेता रहे मानवेन्द्र सिंह के चुनाव मैदान में होने के कारण यह सीट काफी चर्चा में रही. 

राजनीतिक जीवन में किया संघर्ष
कैलाश चौधरी ने अपने राजनीतिक सफर में काफी संघर्ष किया है. इस दौरान उन्होंने राजनीति में खास पहचना नहीं मिलने के कारण बस कंडक्टर का भी काम किया. 1999 में वार्ड पार्षद का चुनाव हारने वाले चौधरी 2004 में जिला परिषद के सदस्य के तौर पर भी निर्वाचित हुए. जिसके बाद बायतू से तीन बार चुनाव लड़ने वाले चौधरी सिर्फ एक बार विधानसभा चुनाव जीतने में कामयाब हुए.

राजनीतिक जीवन का एक वाक्या उनकी राजनीति को आगे बढ़ाने में कामयाब हुआ. साल 2006 में कवास में बाढ पीड़ित के लिए राहत कार्य कर रहे चौधरी ने उनकी समस्याओं से संबंधित ज्ञापन देने के दौरान तब की यूपीए अध्यक्ष रही सोनिया गांधी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लड़ पड़े थे.