बाबा विजयदास, बेटे-बहू और पत्नी की मौत के बाद बन गए थे साधु, परिवार में अब सिर्फ पोती
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बाबा विजयदास, बेटे-बहू और पत्नी की मौत के बाद बन गए थे साधु, परिवार में अब सिर्फ पोती

Bharatpur : राजस्थान के भरतपुर के पसोपा गांव में चल रहे साधु-संतों के आंदोलन में शामिल बाबा विजय दास ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह कर लिया था. पैतृक गांव में संत विजयदास का अंतिम संस्कार किया गया.

 

बाबा विजयदास, बेटे-बहू और पत्नी की मौत के बाद बन गए थे साधु, परिवार में अब सिर्फ पोती

Bharatpur : बाबा विजय दास, हरियाणा में फरीदाबाद जिले के बडाला गांव के रहने वाले थे. साधु बनने से पहले से उनका नाम मधुसूदन शर्मा था जो कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे. बाबा विजय दास के बेटे और बहू की मौत हो गई थी जिसके बाद बाबा विजय दास और उनकी 3 साल ही परिवार में रह गयी थी.

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बाबा विजयदास की पत्नी की मौत पहले ही हो चुकी थी. इस घटना के बाद वो साधु बन गए थे. बेटे और बहू की मौत के बाद वो अपनी पोती को लेकर बरसाने के मान मंदिर आ गए थे. बाबा विजय दास ने अपनी पोती दुर्गा को गुरुकुल में पढ़ने के लिए भर्ती करा दिया था.

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क्यों किया बाबा विजय दास ने आत्मदाह ?

राजस्थान के भरतपुर में ब्रज क्षेत्र की पहाड़ियों में हो रहे खनन को लेकर लंबे वक्त से साधु संत विरोध कर रहे थे. 550 दिनों से जारी आंदोलन का कोई हल नहीं निकल रहा है. इस बीच सरकार के साथ बातचीत का दौर भी चला लेकिन बात नहीं बनी. इस बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे बाबा हरि बोल दास ने आत्मदाह की चेतावनी तक दे दी थी.  20 जुलाई को आंदोलन को तेज करने की चेतावनी भी दी गयी थी. सरकार के कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने साधु संतों से बात की इस बीच बाबा नारायण दास मोबाइल टॉवर पर चढ़ गए और फिर बाबा विजयदास से आत्मदाह कर लिया.

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