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राजस्थान में अब तक नहीं हुई सभी किसानों की कर्जमाफी, नए ऋण में भी हो रही देरी

बता दें कि राजस्थान में कर्जमाफी के लिए 21 लाख 75 हजार किसानों ने आवेदन किया है. जिसमें से सरकार द्वारा 19 लाख 8 हजार 419 किसानों का कर्जमाफ किया जा चुका है.

राजस्थान में अब तक नहीं हुई सभी किसानों की कर्जमाफी, नए ऋण में भी हो रही देरी
अब तक सरकार ने 7841 करोड़ का ऋण माफ कर दिया है.

जयपुर: राजस्थान में लोकसभा चुनाव से पहले सभी किसानों को कर्ज से मुक्त करने का दावा किया था, लेकिन सरकार बनने के 5 महींने बाद प्रदेश में अब तक लाखों किसान ऐसे है जो कर्ज में डूबे है. गहलोत सरकार ने 7 फरवरी से कर्जमाफी की शुरूआत की थी, लेकिन पांच महीने बाद भी लाखों किसान कर्ज के बोझ से उभर नहीं पा रहे है.

राजस्थान में किसान कर्जमाफी के जरिए सत्ता में आई गहलोत सरकार पांच महीने बाद भी अब तक सभी किसानों की कर्ज माफी नहीं कर पाई है. लाखों किसान ऐसे है जो कर्ज में डूबे है. वहीं खरीफ का सीजन शुरू हो चुका है और मानसून भी नजदीक है. लेकिन अभी भी लाखों किसानों का कर्ज माफ ही नहीं हो पाया है. साथ ही अब तक सरकारी ऋण मिलने की शुरूआत भी नहीं हुई है.

बता दें कि राजस्थान में कर्जमाफी के लिए 21 लाख 75 हजार किसानों ने आवेदन किया है. जिसमें से सरकार द्वारा 19 लाख 8 हजार 419 किसानों का कर्जमाफ किया जा चुका है. अब तक सरकार ने 7841 करोड़ का ऋण माफ कर दिया है. यानि 2 लाख 66 हजार 581 हजार किसान अभी भी कर्ज में डूबे हुए है. बताया जा रहा है कि आधार वेरिफिकेशन के कारण लाखों किसानों को ऋण माफ नहीं हो पा रहा है. प्रदेश में बॉयोमैट्रिक आधार सिस्टम से ही गहलोत सरकार ऋण माफ की प्रकिया को पूरी कर रही है.

वहीं किसानों को कर्ज देने वाली गहलोत सरकार खुद कर्ज में डूबी हुई है. केवल कांग्रेस सरकार ही नहीं बल्कि बीजेपी सरकार भी कर्ज में डूबी हुई थी. वसुंधरा और गहलोत सरकार में किसान कर्जमाफी योजना में 8-8 हजार करोड़ का खर्च का अनुमान है. वसुंधरा सरकार ने 2 हजार करोड़ का लोन तो बजट से चुका दिया, लेकिन 6 हजार करोड़ गहलोत सरकार के लिए छोड़ गई. जिसके बाद गहलोत सरकार ने भी किसानों का कर्जमाफ करने का ऐलान किया. सरकार पर 6 हजार करोड का वित्तीय भार होने के बावजूद भी किसानों ने कर्ज तो माफ कर दिए, लेकिन अब सरकार खुद कर्ज मे डूबी हुई है. गहलोत सरकार पर 14 हजार करोड का वित्तीय भार आ गया. जिसके बाद में साढे चार हजार करोड़ सरकार ने वित्तिय संसाधनों से और 5 हजार करोड़ एनसीडीसी से लिया. इसके बावजूद अभी भी सरकार 7 हजार करोड़ के कर्ज मे डूबी हुई है.

वित्तिय संसाधनों के अभाव के चलते किसानों को फिर से नया कर्ज बांटने में भी देरी की गई. हर साल खरीफ सीजन का 1 अप्रैल से किसानों को ऋण बांटा जाता है, लेकिन राजस्थान के 25 लाख से ज्यादा किसानों को अब तक फसली ऋण का इंतजार है. सरकार अब 3 महीने बाद 6 जुलाई को किसानों को ब्याजमुक्त सहकारी फसली ऋण देने जा रही है. लेकिन सरकारी योजना में देरी के कारण अधिकतर किसानों को साहूकारों से अधिक ब्याज दर पर कर्ज लेना पडा. क्योंकि मानसून से पहले किसानों को बुआई के लिए समय पर बीज और खाद की व्यवस्था करनी होती है. वहीं जब मानसून ही शुरू हो जाएगा तो ये कर्ज किस काम का रहेगा.