डीडवाना में बच्चों को शिक्षित कर रही ट्रेन, ड्राप आउट रोकने के लिए शिक्षकों का नवाचार

सरकारी विद्यालयों के प्रदेश में हालात किसी से छिपे हुए नहीं है लेकिन नवरंगपुरा विद्यालय उन विद्यालयों के लिए एक मिसाल हैं, जहां ड्रॉपआउट की समस्या ज्यादा है.

डीडवाना में बच्चों को शिक्षित कर रही ट्रेन, ड्राप आउट रोकने के लिए शिक्षकों का नवाचार
विद्यालय में हुए सकारात्मक बदलावों का असर बच्चों पर भी देखा जा रहा है.

हनुमान तंवर, डीडवाना: डीडवाना उपखंड के नवरंगपुरा के उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के ड्रॉप आउट की समस्या बहुत ही बड़ी समस्या थी. ऊपर से निजी विद्यालयों का दिखावा इस विद्यालय से बच्चों को दिनों-दिन दूर कर रहा था. 
विद्यालय में छात्र-छात्राओं की घटती संख्या विद्यालय परिवार के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी. इसी से निपटने के लिए विद्यालय परिवार ने एक अनोखा कदम उठाया है. 

नागौर जिले का छोटा सा ग़ांव नवरंगपुरा इन दिनों काफी चर्चा में है. कारण है यहां के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की एक पहल. जी हां, हम बात कर रहे हैं नवरंगपुरा की शिक्षा एक्सप्रेस की, जो यहां के शिक्षकों ने अपने जेब से पैसे लगाकर और भामाशाहों के सहयोग से तैयार की है और यही वजह है कि इस विद्यालय की चर्चा पूरे जिले में हो रही है.

नवरंगपुरा उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के ड्रॉपआउट की बड़ी समस्या थी. ऊपर से निजी स्कूलों की चकाचौंध के कारण भी अभिभावकों का विद्यालय से मोहभंग हो गया था. बच्चों की गिरती संख्या शिक्षकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी. इस समस्या को दूर करने के लिए संस्थाप्रधान ने ग्रामीणों से मिलकर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए काफी प्रयास स्कूल स्टाफ के साथ किया लेकिन नतीजा सिफर रहा. इस पर अपने सीनियर्स से जब इस बात पर यहां के प्रधानाध्यक ने चर्चा की तो उन्होंने कुछ अलग करने की सलाह दी और उसी सलाह पर स्टाफ से मशविरा करके शिक्षा एक्सप्रेस तैयार की गई.

अब ग्रामीण विद्यालय में रुचि ले रहे 
ट्रेन के डिब्बों की तरह नजर आने वाली यह वही स्कूल है, जो ड्रॉपआउट की समस्या से जूझ रही थी. स्कूल में बच्चे कम होने से ग्रामीण भी इसपर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे थे लेकिन शिक्षकों की पहल के बाद न केवल अब ग्रामीण विद्यालय में रुचि ले रहे हैं बल्कि अब विद्यालय के कार्यक्रमों में भी भाग ले रहे हैं. यही नहीं, अब विद्यालय में भामाशाहों की मदद से कई काम भी करवाए गए हैं.

नजर आ रहा सकारात्मक बदलावों का असर 
विद्यालय में हुए सकारात्मक बदलावों का असर बच्चों पर भी देखा जा रहा है. यहां पढ़ने वाले बच्चे अपने इस नए अंदाज वाले स्कूल में काफी खुश नजर आ रहे हैं. यही नहीं, अब यहां आसपास के गांवों से भी बच्चे आने लगे हैं और ग्रामीणों ने यह भी वादा किया है कि अगले सत्र से बच्चों को इसी स्कूल में पढ़ाएंगे.

ड्रॉपआउट की समस्या ज्यादा 
सरकारी विद्यालयों के प्रदेश में हालात किसी से छिपे हुए नहीं है लेकिन नवरंगपुरा विद्यालय उन विद्यालयों के लिए एक मिसाल हैं, जहां ड्रॉपआउट की समस्या ज्यादा है. जरूरत इस बात की है कि सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से कॉम्पटीशन को एक चैलेंज के रूप में लेना होगा तभी सरकारी स्कूलों के हालात सुधर पाएंगे.