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राजस्थान में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, बारिश के लिए हिंदू-मुस्लिम ने किया धार्मिक आयोजन

नवाबी नगरी टोंक में जिस तरह से बारिश के लिए अनूठे तरीके से कामना की जा रही है, जो दुनिया को ऐसा संदेश दे रही है जिसे शायद हर किसी को सीख लेने की जरूरत है. 

राजस्थान में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, बारिश के लिए हिंदू-मुस्लिम ने किया धार्मिक आयोजन
टोंक जिले में विभिन्न स्थानों बरसात के लिए आयोजन हो रहे है.

पुरूषोत्तम जोशी/टोंक: मानसून की बेरूखी और ईंद्रदेव की नाराजगी से हर कोई चिंतित और परेशान है. तेज धूप और सूखे की मार से खेतों में पड़ रही दरार को देखकर धरतीपुत्र परेशान हैं. बारिश की कामना को लेकर प्रदेशभर में अलग-अलग तरीके से ईंद्रदेव की मनुहार हो रही है, लेकिन नवाबी नगरी टोंक में जिस तरह से बारिश के लिए अनूठे तरीके से कामना की जा रही है, जो दुनिया को ऐसा संदेश दे रही है जिसे शायद हर किसी को सीख लेने की जरूरत है. 

बारिश की जितनी जरूरत किसान को है उतनी ही जरूरत एक आम आदमी को भी है. पानी है तो ही जीवन है और उसी के साथ जरूरी है खेती. लेकिन ऐसा सालों बाद हुआ है कि सावन के महीने में जेठ जैसी भीषण गर्मी और सूर्यदेव की तपीश सहने को मिल रही है. इसी भीषण गर्मी से आहत आमजन ने ईश्वर से बारिश की अपने ही तरीके से मनुहार शुरू कर दी है.

राजस्थान के टोंक जिले में भी विभिन्न स्थानों पर गांव-गांव,शहर-शहर आयोजन हो रहे है. कोई बारिश की कामना के लिए हवन कर रहा है. कोई पूजा कर रहा है. लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि देश के नवाबी नगरी टोंक के मुस्लिम समाज के नसीहत दी है. यह सीख शायद उन लोगों के लिए है जो देश में धार्मिक वैमन्स्य फैलैने की बात करते हैं. 

बारिश के लिए प्रदेश के हिंदू धर्मावलंबी पूजा पाठ व अखंड कीर्तन कर रहे हैं. वहीं पीपलू में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने भी खेत में जाकर विशेष नमाज अदा कर बारिश की अल्लाह ताला से दुआ मांगी हैं. बारिश की कामना को लेकर क्षेत्र के मुस्लिम धर्मावलंबियों को जंगल स्थित खेत में एकत्र होकर रहमत, बरकत वाली बारिश को लेकर सुबह के वक्त मस्जिद के इमाम मौलाना याकूब ने विशेष नमाज अदा करवाई. 

इस मौके सदर रहीमुल्ला टेलर, आरिफ खान, अमजद पठान, एहसान नद्दाफी, वसीम, शरीफ, मुन्ना, आसिफ, सलीम आदि मौजूर रहे. वहीं हिंदू धर्मावलंबी के लोगों ने मंदिरों में भजन-संकीर्तन शुरू किया हैं. श्रावण मास में शिव के जलाभिषेक करते हुए बारिश की कामना कर रहे हैं. इस विशेष नमाज को इस्तिस्का की नमाज कहते हैं. इसमें दो रकअत नमाज होती है और नमाज के बाद दो बार खुदबा होता है. इसमें दुआ भी विशेष तरह से मांगी जाती है. आम तौर पर दुआ के लिए जिस तरह से हाथ लोग उठाते हैं, इस नमाज में हाथ उलटकर दुआ मांगी जाती है. 

नमाज के दौरान बारिश के लिए जो दुआ मांगी गई, उसमें इमाम याकूब ने मांगा कि अल्लाह सभी के लिए रहम का रास्ता फरमा, बारिश कर दे, किसानों को राहत दे. यहां रहने वाले सभी को राहत दे. सभी गर्मी से परेशान हैं. जात और धर्म भले ही अलग हो, लेकिन देश एक है. बात जब एकता और अखंडता की हो तो फिर हिंदूस्तान जैसी मिसाल कही देखने को मिल नहीं सकती. उसी की एक बानगी नवाबी नगरी टोंक में देखने को मिली है, जो वाकई उन लोगों के लिए नसीहत जरूर है, जो बांटने, तोड़ने और जातिवाद की बात करते हैं.