ज्योतिष: इस तारीख से कम होने लगेगा 'कोरोना', 'वायरस की कुंडली' खोल रही हर राज!

ग्रह नक्षत्रों की प्रतिकूल स्थिति के आधार पर ज्योतिष आंकलन यह कहता है कि 30 अप्रैल (April) के बाद कोरोना का असर कम होने लगेगा. 

ज्योतिष: इस तारीख से कम होने लगेगा 'कोरोना', 'वायरस की कुंडली' खोल रही हर राज!
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास से जानें कोरोना की भविष्यवाणी.

Delhi/Jaipur: पूरे देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) कहर मचा रहा है. अस्पतालों में ऑक्सीजन (Oxygen) और बेड (Bed) की कमी हो गई है. श्मशान घाटों में दाह संस्कार के लिए शवों की लंबी लाइनें हुई हैं.

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वहीं, पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर (Jaipur) के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास (Anish Vyas) ने बताया कि सभी जगह से आ रही नकारात्मक खबरों के बीच ज्योतिष से यह सकारात्मक समाचार मिल रहा है कि ग्रह नक्षत्रों की प्रतिकूल स्थिति के आधार पर ज्योतिष आंकलन यह कहता है कि 30 अप्रैल (April) के बाद कोरोना का असर कम होने लगेगा. 

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मई (May) माह में कोरोना का असर कुछ शहरों में कम होगा. कुछ शहरों में धीरे-धीरे घटने लगेगा लेकिन शिव के अवतार और संकट मोचन श्री राम भक्त हनुमान जी के वार यानि मंगलवार 1 जून के बाद कोरोना का असर तेजी से घटेगा और कम होगा. 

पूरी दुनिया पर ही कोरोना का कहर
चीन के वुहान शहर (Wuhan City) से सामने आया कोरोना वायरस आज पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले चुका है. महामारी के रूप में आज यह वायरस भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, यूरोप सहित विश्व के अधिकतर देशों में फैल चुका है. करोड़ों लोग इस वायरस से प्रभावित हो चुके हैं. पूरे विश्व में महामारी से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन लोगों के मन में एक ही सवाल है कि इस वायरस से कब राहत और मुक्ति मिलेगी? वैज्ञानिक और डॉक्टर लगातार इसका इलाज खोजने में लगे हुए हैं. वहीं, ज्योतिष आंकलन चल रहा है.

1 जून के बाद कोरोना का असर तेजी से घटेगा 
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि मंगलवार 1 जून के बाद कोरोना का असर तेजी से घटेगा और कम होगा. कोरोना महामारी के मृत्यु दर में कम होगी और संक्रमण में कमी आएगी. जीवन सामान्य होने लगेगा. सभी व्यापारिक गतिविधि और जनजीवन दिनांक 30 जून के बाद सामान्य हो जायेगा. आप सभी को पहले भी बता चुका हूं कि राहु वृषभ में और केतु वृश्चिक राशि में होने के कारण असाध्य बीमारियों का इलाज मिलेगा. इस बार राहु और केतु आविष्कार के मूड में आए हैं. भारतीय वैज्ञानिकों को कोरोना महामारी के वैक्सीन में और अधिक सफलता मिलेगी. हिंदू नव संवत्सर 2078 के राजा और मंत्री मंगल होने के कारण अमंगल नहीं होगा. 

ज्योतिष में इस संकट को विषाणुजनित महामारी का संकट कहा गया
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से देखें तो कोरोना वायरस का सामने आना एवं महामारी का रूप लेना ये मात्र कोई संयोग नहीं है बल्कि इसके पीछे बहुत विशेष ज्योतिषीय कारण और वर्तमान ग्रह स्थितियां हैं. इसी वजह से कोरोना वायरस विश्वस्तर पर एक महामारी के रूप में फैलता जा रहा है. पूरी दुनिया पर कोरोना वायरस का खतरा मंडरा रहा है. सभी इससे बचने के उपाय खोज जा रहे हैं. भारत में ज्योषित विज्ञान भी कोरोना वायरस पर अध्ययन कर रहा है. ज्योतिष में इस संकट को विषाणुजनित महामारी का संकट कहा गया है.

सभी ग्रह कोरोना महामारी के लिए जिम्मेदार 
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि चीन के वुहान शहर से 26/12/2019 यानी अमावस्या, मूला, मकर लग्न में (प्रातः 09.49 बजे) सुर्खियों में आया. उस समय छह ग्रह अर्थात् सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु, शनि और केतु धनु राशि में थे. धनु मकर राशि से बारहवाँ घर (अस्त) था. ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि मंगल वृश्चिक में, शुक्र मकर राशि में और राहु मिथुन राशि में था. शुक्र को छोड़कर पूरे आठ ग्रह इस महामारी को जन्म देने में सीधे तौर पर शामिल थे. उस समय शुक्र के पास अमृत संजीवनी थी और शुक्र ने कई लोगों को बचा लिया. ऐसे ग्रह संयोग सौ वर्षों में एक बार होते थे. यह सभी ग्रह कोरोना महामारी के लिए जिम्मेदार हैं. 

जल्द महामारी का प्रभाव कम होने की उम्मीद 
विख्यात भविष्यवक्ता अनीष व्यास ने बताया कि जीवन और मृत्यु भगवान के हाथ में है और कोई भी अगर महामारी आरंभ हुई है तो उसका अंत भी समय पर हुआ है. कोरोना महामारी पर ज्योतिष आंकलन किया गया. दिनांक 26 दिसम्बर 2019 और प्रश्न कुंडली के अनुसार और भगवान पाल बालाजी की कृपा से मुझे इस पर जो जानकारी मिली, आपके साथ शेयर कर रहा हूं. ज्योतिष आंकलन यह कहता है कि शिव के अवतार और संकट मोचन श्री राम भक्त हनुमान जी के वार यानि मंगलवार 1 जून के बाद से कोरोना वायरस के अटैक से राहत मिलना शुरू हो जाएगी और इसके संक्रमण का प्रभाव कम होना शुरू हो जाएगा. एक महीने के अंदर इस महामारी का प्रभाव भी कम होने की उम्मीद है. 

गुरु और केतु का योग हैं जिम्मेदार
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिष में राहु और केतु दोनों को संक्रमण (बैक्टीरिया, वायरस) इंफेक्शन से होने वाली सभी बीमारियों और छिपी हुई बीमारियों का ग्रह माना गया है. गुरु जीव और जीवन का कारक ग्रह है, जो हम सभी व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है इसलिए जब भी गुरु और राहु या गुरु और केतु का योग होता है तब ऐसे समय में संक्रामक रोग और ऐसी बीमारिया फैलती हैं, जिन्हें चिहि्नत करना अथवा समाधान कर पाना बहुत मुश्किल होता है पर इसमें भी खास बात ये है कि राहु के द्वारा होने वाली बीमारियों का समाधान आसानी से मिल जाता है, लेकिन केतु को एक गूढ़ और रहस्यवादी ग्रह माना गया है इसलिए जब भी बृहस्पति और केतु का योग होता है तो ऐसे में इस तरह के रहस्मयी संक्रामक रोग सामने आते हैं, जिनका समाधान आसानी से नहीं मिल पाता और ऐसा ही हो रहा है इस समय कोरोना वायरस के केस में.

कोरोना वायरस का कारण
विख्यात भविष्यवक्ता अनीष व्यास ने बताया कि मार्च 2019 से ही केतु धनु राशि में चल रहा है लेकिन चार नवम्बर 2019 को गुरु का प्रवेश भी धनु राशि में हो गया था, जिससे गुरु और केतु का योग बन गया था. जो रहस्मयी संक्रामक रोगों को उत्पन्न करता है. चार नवम्बर को गुरु और केतु का योग शुरू होने के बाद कोरोना वायरस का पहला केस चीन में नवम्बर के महीने में ही सामने आया था. यानि नवम्बर में गुरु-केतु का योग बनने के बाद ही कोरोना वायरस एक्टिव हुआ. इसके बाद एक और नकारात्मक ग्रह स्थिति बनी. 26 दिसंबर को हुआ सूर्य-ग्रहण जिसने कोरोना वायरस को एक महामारी के रूप में बदल दिया. 26 दिसंबर को हुआ सूर्य ग्रहण समान्य नहीं था क्योंकि इस सूर्य ग्रहण के दिन छः ग्रहों के (सूर्य, चन्द्रमा, शनि, बुध, गुरु, केतु) एकसाथ होने से ष्ठग्रही योग बन रहा था, जिससे ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव बहुत तीव्र हो गया था. भारत में इसका प्रभाव विरोध-प्रदर्शनों में की गयी हिंसा के रूप में दिखा. साथ ही कोरोना वायरस के मामले भी बढ़ते गए. कुल मिलाकर नवम्बर में केतु-गुरु का योग बनने पर कोरोना वायरस सामने आया और 26 दिसंबर 2020 को सूर्य ग्रहण के बाद इसने एक बड़ी महामारी का रूप धारण कर लिया.

गुरु और केतु योग ने पहले भी मचाई थी तबाही
विख्यात कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि सन 1918 में स्पैनिश फ्लू (Spanish Flu) नाम से एक महामारी फैली थीç जिसकी शुरुआत स्पेन से हुई थी. इस महामारी से दुनिया में करोड़ों लोग संक्रमित हुए थे. उस समय भी गुरु-केतु का योग बना हुआ था. सन 1991 में ऑस्ट्रेलिया में माइकल एंगल नाम का बड़ा कम्प्यूटर वायरस सामने आया था, जिसने इंटरनेट और कम्यूटर फील्ड में वैश्विक स्तर पर बड़े नुकसान किये थे और उस समय भी गोचर में गुरु-केतु का योग बना हुआ. सन 2005 में एच-5 एन-1 नाम से एक बर्ड फ्लू फैला था और उस समय में भी गोचर में गुरु-केतु का योग बना हुआ था. ऐसे में जब भी गुरु-केतु का योग बनता है उस समय में बड़े संक्रामक रोग और महामारियां सामने आती हैं. 2005 में जब बृहस्पति-केतु योग के दौरान बर्ड फ्लू (Bird Flu) सामने आया था तब गुरु-केतु का योग पृथ्वी तत्व राशि में होने से यह एक सीमित एरिया में ही फैला था जबकि चार नवम्बर को गुरु-केतु का योग अग्नि तत्व राशि (धनु) में बना है जिस कारण कोरोना वायरस आग की गति से पूरे विश्वभर में फैलता जा रहा है.

इनका करें उपयोग
विख्यात भविष्यवक्ता अनीष व्यास ने बताया कि शास्त्रार्थ उल्लेख है कि हमारे जीवन में कुछ ऐसी वस्तुएं हैं, जिन में किसी भी नकारात्मक वस्तु को रोकने की शक्ति होती है और इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है. यह आसानी से कहीं पर भी मिल जाती है. ज्योतिष शास्त्र में हींग, प्याज, अदरक, नींबू, लहसुन, तुलसी, काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, इलायची और राई को किसी भी संक्रमण और नकारात्मक ऊर्जा का काट बताया गया है. सरसों के तेल की मालिश अपने हाथ पीठ छाती और पैरों पर जरूर करें. जीवन से बढ़कर कोई भी आवश्यक वस्तु नहीं है. भीड़-भाड़ से दूर रहना, मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग करने में हम सबकी भलाई है. कर्फ्यू लॉकडाउन आइसोलेटेड क्वांटरिन का पालन हम सभी की जिम्मेदारी है. कोविड वैक्सीन जरूर लगवाएं.

और क्या-क्या करें उपाय
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि हं हनुमते नमः, ऊं नमः शिवाय, हं पवननंदनाय स्वाहा का जाप करें. महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती पाठ करना चाहिए. माता दुर्गा, भगवान शिव हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए. घर पर हनुमान जी की तस्वीर के समक्ष सुबह और शाम आप सरसों के तेल का दीपक जलाएं. सरसों के तेल का दीपक सुबह 9:00 बजे से पहले और सांयकाल 7:00 बजे के बाद जलाना है. गोमूत्र, कपूर, गंगाजल, नमक और हल्दी मिलाकर प्रतिदिन घर में पोछा लगाएं. घर के मुख्य द्वार के दोनों साईड ( अंदर-बाहर ) बैठे हुए पंचमुखी बालाजी की तस्वीर लगाएं. ईश्वर की आराधना संपूर्ण दोषों को नष्ट एवं दूर करती है.

विख्यात कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिष डराने के लिए नहीं डर को भगाने का अचूक अस्त्र माना जाता है. परेशानी या समस्या कितनी भी ताकतवर हो लेकिन उसका निवारण उससे अधिक ताकतवर होता है. ज्योतिषी आपका भाग्य विधाता नहीं आपका भाग्य वक्ता होता है. उसे जादूगर के रूप में नहीं अच्छे सलाहकार के रूप में काम में लीजिए. ईश्वर की सत्ता हम सभी को स्वीकार करनी होगी क्योंकि ईश्वर की आराधना में शक्ति होती है और संकट मोचन हनुमान जी हमें इस संकट से बचाएंगे.