राजस्थान के सियासी गलियारों में कुछ बड़ा होने वाला है? माकन के रीट्वीट ने बढ़ाई राजनीतिक तपिश

ट्वीट में आगे कहा गया कि सोनिया गांधी, जो 20 साल से अधिक समय तक पार्टी अध्यक्ष रहीं, ने कभी भी अपनी उपलब्धियों को उजागर नहीं किया. हालांकि कांग्रेसियों ने गैर-जिम्मेदाराना तरीके से काम करना जारी रखा

राजस्थान के सियासी गलियारों में कुछ बड़ा होने वाला है? माकन के रीट्वीट ने बढ़ाई राजनीतिक तपिश
सिद्धू के समर्थन में माकन के रीट्वीट से पायलट के बारे में अटकलें हुई तेज. (फाइल फोटो)

Jaipur: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके पूर्व डिप्टी सचिन पायलट के बीच जारी खींचतान के बीच कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी अजय माकन के एक रीट्वीट ने गहलोत खेमे को हैरान कर दिया है. माकन ने एक ट्वीट को रीट्वीट किया जिसमें नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) को पंजाब पीसीसी प्रमुख (Punjab Congress Chief) बनाए जाने का समर्थन किया गया और अमरिंदर सिंह, अशोक गहलोत और दिवंगत शीला दीक्षित जैसे मुख्यमंत्रियों के रवैये पर सवाल उठाया गया. मूल ट्वीट में कहा गया है कि जैसे ही ऐसे नेता मुख्यमंत्री बनते हैं, वे विश्वास करने लगते हैं कि पार्टी उनकी वजह से जीती है.

माकन द्वारा रीट्वीट किए गए ट्वीट में कहा गया, 'कोई भी नेता अपने दम पर नहीं जीतता. गरीब और कमजोर वर्ग के वोट नेहरू और गांधी परिवार के नाम पर दिए जाते हैं. हालांकि, चाहे वह अमरिंदर सिंह (Amrinder Singh) हो या गहलोत (Ashok Gehlot) या शीला या कोई भी. वरना मुख्यमंत्री बनते ही ये सोचने लगते हैं कि उनकी वजह से पार्टी जीती है.'

ट्वीट में आगे कहा गया कि सोनिया गांधी (Sonia Gandhi), जो 20 साल से अधिक समय तक पार्टी अध्यक्ष रहीं, ने कभी भी अपनी उपलब्धियों को उजागर नहीं किया. हालांकि कांग्रेसियों ने गैर-जिम्मेदाराना तरीके से काम करना जारी रखा, यह मानते हुए कि जीत उनके चमत्कार थे.' ट्वीट ने यह भी कहा कि अगर पार्टी कहीं हार गई, तो राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर दोष लगाया गया. लेकिन अगर पार्टी जीती, तो मुख्यमंत्रियों ने अपने माथे पर जीत का सेहरा सजाया.

ट्वीट यह कहकर समाप्त होता है, नेतृत्व ने सिद्धू को पंजाब पीसीसी प्रमुख के रूप में अभिषेक करके सही काम किया. ताकत दिखाना जरूरी था. माकन (Ajay Maken) द्वारा इस लंबे ट्वीट को रीट्वीट करने के बाद, राजस्थान में राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही थीं कि पंजाब की कहानी राजस्थान में भी दोहराई जा सकती है.

पार्टी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने बातचीत में कहा, 'इस समय दो खेमों (राज्य में) के बीच इस खींचतान को खत्म करने के लिए निर्णायक कार्रवाई का है. लोग और पार्टी कार्यकर्ता इसका खामियाजा भुगत रहे हैं. कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी है, क्योंकि वहां राज्य में आज तक कोई कैबिनेट विस्तार नहीं हुआ है.' पार्टी कार्यकर्ता ने यह भी बताया कि भले ही राज्य सरकार ने अपना आधा कार्यकाल पूरा कर लिया हो, लेकिन कई राजनीतिक नियुक्तियां लंबित हैं. 2023 में जब चुनाव की घोषणा होगी तो हम किस चेहरे के साथ जनता के बीच जाएंगे? उन्होंने कहा, राजस्थान में पीसीसी की ताकत घटकर 39 हो गई थी, क्योंकि पिछले साल पायलट कैंप द्वारा विद्रोह के बाद इसे भंग कर दिया गया था.

पार्टी कार्यकर्ता ने कहा, 'क्या दो साल में जमीन पर मजबूत उपस्थिति हासिल करना संभव है? हमें तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है.' इस बीच, सिद्धू की नियुक्ति ने पायलट खेमे में उम्मीद जगा दी है क्योंकि यह बेहतर समय के लौटने का इंतजार कर रहा है. इससे पहले जब माकन ने पायलट को पार्टी की स्टार एसेट बताया था तो युवा नेता ने कहा था. माकन के बयान पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए क्योंकि यह आलाकमान से आता है.' गहलोत खेमे के सामने अब सवाल यह है कि क्या ताजा रीट्वीट पर भी आलाकमान का आशीर्वाद है.

(इनपुट-आईएएनएस)