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जालोर: बिना मरम्मत खंडहर बना पुलिस थाना, दबंगों ने किया जमीन पर कब्जा

क्षेत्र के करीब तीन दर्जन से अधिक गांवों व क्षेत्रफल की दृष्टि से जिले का सबसे बड़ा पुलिस थाना होने के साथ ही गुजरात सीमा से सटा होने के चलते यहां तस्करी सहित अन्य मामले भी होते रहते हैं. 

जालोर: बिना मरम्मत खंडहर बना पुलिस थाना, दबंगों ने किया जमीन पर कब्जा
सरवाना पुलिस थाना जर्जर हालात के चलते खुद असुरक्षित हो चुका है.

बबलू मीणा/जालोर: राजस्थान के जालोर ज़िले के सांचोर विधानसभा क्षेत्र का सरवाना पुलिस थाना पूरी तरीक़े से जर्जर हालत में जिसके चलते आमजन की सेवा में तैनात पुलिसकर्मियों की जान पर कभी भी आ सकती है. इसको लेकर विभाग के आला अधिकारियों को भी कई बार अवगत करवाया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. आपको बता दें पुलिस थाने के भवन इस तरीक़े से खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं कि कभी भी वो गिर सकती है. लेकिन भगवान भरोसे पूरा पुलिस थाना चल रहा है. इतना ही नहीं पुलिस थाने की सरकारी ज़मीन पर भी दबंगों ने कब्ज़ा कर लिया लेकिन पुलिस बेबस लाचार नज़र आ रही है.

क्षेत्र में सामरिक दृष्टि से महत्व रखने के वाला सीमांत सरवाना पुलिस थाना जर्जर हालात के चलते खुद असुरक्षित नजर आ रहा है. क्षेत्र के करीब तीन दर्जन से अधिक गांवों व क्षेत्रफल की दृष्टि से जिले का सबसे बड़ा पुलिस थाना होने के साथ ही गुजरात सीमा से सटा होने के चलते यहां तस्करी सहित अन्य मामले भी होते रहते हैं. इसके बावजूद इस थाने की ना तो मरम्मत करवाई जा रही है और ना ही पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया जा रहा है. इसके अलावा यह थाना विभिन्न सुविधाओं से भी वंचित है. पुलिस थाने के पिछवाड़े रेजीडेंसी क्वार्टर बने हुए तो हैं, लेकिन ये भी इतने जर्जर हो चुके हैं कि यहां पर रहने वाले कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं. वहीं थाने का मालखाना भी पूरी तरह से जर्जर हो गया है. ऐसे में पुलिस की ओर से सामान व अन्य जब्त की गई वस्तुएं मालखाने में रखने के बजाय मजबूरन अन्य कमरों या खुले में रखना पड़ रहा है. ऐसे में आमजन की सुरक्षा के लिए स्थापित किया गया यह थाना खुद असुरक्षित सा नजर आ रहा है.

सरवाना पुलिस थाना परिसर में बने करीब दस क्वार्टर के अलावा चार अन्य कमरे भी जर्जर हो चुके हैं. थाने में पीने के लिए पानी की सुविधा तक नहीं है. वहीं थाने के चारों ओर दीवार नहीं होने से कंटीली झाडिय़ों से बाड़ बना रखी है. पूर्व में यहां स्थित करीब 35 बीघा जमीन के अतिक्रमण का मामला भी सुर्खियों में रहा था. इसके बावजूद सरकार की ओर से यहां सुविधाओं के नाम कुछ नहीं दिया जा रहा है.

गुजरात सीमा से सटा होने के चलते भारी मात्रा में यहां से अवैध रूप से शराब, अफ़ीम की तस्करी बड़ी मात्रा में की जाती है. लेकिन पर्याप्त नफरी की कमी की वजह से पुलिस इन पर लगाम लगाने में नाकाम में क्योंकि पुलिस के पास मौजूदा संसाधन इस तस्करी पर लगाम लगाने को लेकर नाकाम साबित हो रहे है. गुजरात में भारी मात्रा में इसी एरिया से शराब की तस्करी होती है. हरियाणा से ट्रक इस एरिया में शराब पहुंचाती है और उसके बाद छोटी छोटी गाड़ियों के ज़रिये गुजरात में शराब की सप्लाई की जाती है.

बेसिक फोन व इंटरनेट सुविधा भी नहीं. सरवाना पुलिस थाना सामरिक दृष्टि के साथ ही गुजरात की सीमा से सटा हुआ है. जिसके कारण इसका काफी महत्व भी है, लेकिन क्षेत्र में होने वाली किसी घटना के दौरान ग्रामीण पुलिस को बेसिक फोन पर सूचना तक नहीं दे पा रहे हैं. कारण कि पिछले दस साल से अधिक समय से यहां का बेसिक फोन बंद है. एक भी नंबर नहीं है. मजे की बात तो यह है कि ग्रामीण अंचल में लगे पूर्व के सभी सूचनापट् के नम्बर बंद पड़े हैं. इनमें से एक पर भी कॉल नहीं लगता है. वहीं जो सूचना पट्ट पर अधिकारियों के नंबर लिखे है वह सालों पहले यहां से स्थानांतरित होकर चले गए हैं. ऐसे में ग्रामीणों को घटना-दुर्घटना के दौरान पुलिस का सूचना देना भी मुश्किल हो गया है.