close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान: कारगिल के शहीद, जिनके इंतजार में 64 दिनों तक वीरांगना रहीं थी भूखी-प्यासी

यह कहानी राजस्थान के एक रणबांकुर की वीरांगना का है. जिन्होंने राजस्थान की एक लोकोक्ति 'जननी जणे तो ऐड़ो जण के दाता के सूर' को चरितार्थ करके दिखाया.

राजस्थान: कारगिल के शहीद, जिनके इंतजार में 64 दिनों तक वीरांगना रहीं थी भूखी-प्यासी
राजस्थान के ऐसे वीर सपूत नागौर के परबतसर तहसील के गांव हरनावा के हुए.

हनुमान तंवर, नागौर: आज (शुक्रवार) को कारगिल दिवस के मौके पर पूरा देश में भारतीय सेना के ऐसे वीरों को याद कर रहा है. जिन्होंने अपनी जान मातृभूमि के लिए न्योछावर किया. इस दौरान पाकिस्तानी घुसपैठियों को भारत की भूमि से जाने को मजबूर कर दिया.  इस दौरान एक ऐसी वीरांगना भी थी. जिन्होंने अपने पति के शहादत की खबर सुनने के बाद 64 दिनों तक खाना पीना छोड़ दिया.

यह कहानी राजस्थान के एक रणबांकुर की वीरांगना का है. जिन्होंने राजस्थान की एक लोकोक्ति 'जननी जणे तो ऐड़ो जण के दाता के सूर' को चरितार्थ करके दिखाया. 

राजस्थान के ऐसे ही एक वीर सपूत हुए नागैर जिले के परबतसर तहसील के गांव हरनावा के. जो सेना में भर्ती होने के बाद अपने घरवालों से हमेशा कहते थे कि अब देश की बात करो, घर की बात नहीं. कारगिल युद्ध के दौरान राजस्थान की घरती के लाल शहीद मंगेज सिंह ने दुश्मनों से लड़ते लड़ते जान न्योछावर कर दिए.

इस दौरान शहीद की विरांगना संतोष कंवर अपने जाबांज पति के शव के इंतजार में लगातार 21 दिनों तक अनशन किया. जिसके बाद राजस्थान के तत्कालीन सीएम भैरोसिंह शेखावत व विदेश मंत्री वसुंधरा राजे खुद वीरांगना के गांव पहुंचे. इस दौरान वीरांगना ने नेताओं के हाथ से पानी पीने के बावजूद शहीद का शव घर पर आने तक अनशन पूरी तरह नहीं तोड़ा. 

नागौर जिले के परबतसर उपखण्ड क्षेत्र के हरनावा गांव के शहीद मंगेज सिंह राठौड़ का जन्म 2 अक्टूबर 1958 में हुआ था, मंगेज सिंह परिवार में तीन भाईयों में सबसे छोटे थे. उनका 10 वीं क्लास पास करने के बाद उनका विवाह हुआ था. शहीद मंगेज सिंह 11 वी राजपूताना राइफल्स बटालियन में सूबेदार पद पर तैनात थे.

जानिए कैसे हुई शहादत
शहीद मंगेज सिंह को 6 जून 1999 को 10 सैनिकों के साथ तुर्तुक क्षेत्र में भेजा गया. इस दौरान ऑटोमेटिक हथियारों से लैस पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के जवानों पर हमला कर दिया. इस दौरान सैनिक अपनी एलएमडी व मिडियम गन संभालते हुए टारगेट से 50 मीटर ही दूर ही थे. हमले में भारतीय सेना के 6 जवान घायल हो गए. गोली मंगेज सिंह को भी लगी. लेकिन घायल होने के बावजूद वे घायल सैनिकों को संभालने और वहां से ले जाने का आदेश देकर आगे बढ़े. इस दौरान घायल अवस्था में ही आगे बढ़ बंकर के पीछे पाकिस्तान सैनिकों पर कई राउंड फायरिंग किया. जिससे 7 पाकिस्तानी सैनिक ढेर हो गए.

सैनिक के शहादत की जानकारी 6 जून 1999 को परिवारजनों को मिली. लेकिन उनका शव तत्काल बरामद नहीं हो सका. जिसकी खोजबीन लगातार जारी रही. सर्च ऑपरेशन के बाद भारतीय सेना ने 5 अगस्त 1999 को शहीद का शव मिला. राजस्थान के इस वीर सपुत के नाम पर कारगिल में भारत के कब्जे वाले क्षेत्र का नामकरण मंगेज सिंह हरनावा के नाम से किया गया है. वहीं, प्रदेश सरकार ने उनके नाम से एक विद्यालय का नामकरण भी किया है.