कोटा: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया JK लोन अस्पताल का दौरा, कहा...

कोटा के बूंदी सांसद और लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि वह बच्चों की मौतों पर बेहद गंभीर हैं. ओम बिरला ने  JK लोन अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से लेकर NICU वार्ड का जायजा लिया. 

कोटा: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया JK लोन अस्पताल का दौरा, कहा...
ओम बिरला ने अगले 15 दिन में सभी उपकरण दुरुस्त करने निर्देश दिए हैं.

कोटा: राजस्थान के जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले ने देश भर में हड़कंप मचा दिया है. इसी को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कोटा के जेके लोन अस्पताल को दौरा किया. साथ ही, अस्पताल के हर हिस्से का दौरा करने के बाद ओम बिरला ने अस्पताल प्रबंधन को कई निर्देश भी दिए.

कोटा के बूंदी सांसद और लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि वह बच्चों की मौतों पर बेहद गंभीर हैं. ओम बिरला ने  JK लोन अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से लेकर NICU वार्ड का जायज़ा लिया. वहीं, अस्पताल के हर हिस्से का दौरा कर अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए. साथ ही ओम बिरला ने कहा कि अगले 15 दिनों में अस्पताल की सभी कमियों को पूरा किया जाए. अस्पताल में उपकरणों की कमी और ख़राब पड़े उपकरणो को ठीक कर अस्पताल के हालातों में सुधार किया जाए. बिरला ने मीडिया से बात करते हुए बिरला ने कहा की अगले 15 दिन में सभी उपकरण दुरुस्त किए जाए इसको लेकर निर्देश दिए है.  

बिरला ने कहा की बच्चों की मौत को लेकर हम गम्भीर है. साथ ही उन्होने, प्रदेश सरकार से भी इस मामले पर बात की है. JK लोन अस्पताल प्रबंधन से बिरला ने कहा कि अस्पताल में जो भी उपकरण की कमी है उन्हें जल्द पूरा करें. जन सहयोग से अस्पताल में धन की कमी नहीं होगी. 

गौरलतब है कि, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को कहा था कि JK लोन अस्पताल में 10 बच्चों की मौत की जांच के लिए एक टीम कोटा भेजी गई है. साथ ही उन्होंने दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए है. गहलोत ने चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गलेरिया को कोटा का दौरान करने और तत्काल आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.

सीएमओ के आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि की थी कि गहलोत मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं. एसएमएस कॉलेज के अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. अमरजीत मेहता, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ व अन्य लोग गलेरिया के साथ कोटा का दौरा करेंगे. गौरतलब है कि दिसंबर में 77 बच्चों की मौत हुई है, जबकि सोमवार व मंगलवार को 10 बच्चों की मौत हुई थी.

वहीं, अस्पताल के सूत्रों ने कहा था कि सभी बच्चों को अस्पताल में गंभीर हालत में लाया गया था. अस्पताल अधीक्षक एच.एल.मीणा ने कहा था, 'हमारी जांच कहती है कि 10 मौतें सामान्य थीं और बच्चों की मौत लापरवाही की वजह से नहीं हुई है'. इसी तरह विभाग के प्रमुख (पीडियाट्रिक्स) अमृत लाल बैरवा ने कहा था कि राष्ट्रीय एनआईसीयू के रिकॉर्ड के अनुसार, शिशुओं की 20 फीसदी मौतें स्वीकार्य हैं, जबकि कोटा में 10-15 फीसदी मौतें हुई हैं. उन्होंने कहा था कि बच्चों को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था.