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चूरू: यहां भगवान खुद ही ताले में कैद, कर रहे अपनी रिहाई का इंतजार

भगवान एक महीने से ताले में कैद हैं. 1 महीने से भगवान की पूजा-अर्चना तो छोड़िए, साफ-सफाई तक नहीं हुई है.

चूरू: यहां भगवान खुद ही ताले में कैद, कर रहे अपनी रिहाई का इंतजार
मंदिर में कोई भी पुजारी नहीं होने के चलते मंदिर की मूर्ति के आगे ताला लगा हुआ है.

चूरू: अभी तक आपने भगवान से कैद की रिहाई की दुआएं, मन्नतें मांगते लोगों को देखा होगा, या फिर खुद भी मांगी होगी. भगवान परेशानियों से आज़ाद करते हैं. वहीं चूरू के सरदारशहर में एक ऐसा मंदिर है, जिसमें भगवान खुद ही कैद हैं. 

शहर के वार्ड नंबर 33 में शमशान घाट स्थित भूतनाथ (Bhootnath) भगवान एक महीने से ताले में कैद हैं. 1 महीने से भगवान की पूजा-अर्चना तो छोड़िए, साफ-सफाई तक नहीं हुई है. आसपास के श्रद्धालु बड़ी ही श्रद्धा के साथ भगवान की पूजा करने के लिए आते हैं लेकिन भगवान भूतनाथ (Bhootnath) की मूर्ति के आगे ताला लगा होने के चलते वापस लौट जाते हैं. 

दरअसल, मंदिर में पूजा करने वाले पुजारी को अच्छे पैसे नहीं मिलने के चलते वह मंदिर छोड़कर चला गया. मंदिर को माहेश्वरी पंचायती ट्रस्ट (Maheshwari Panchayti Trust) चलाता है. माहेश्वरी पंचायती ट्रस्ट ही इस मंदिर की पूरी देखभाल करता है लेकिन आसपास के लोगों का कहना है कि मंदिर के पुजारी को ट्रस्ट कम पैसे देता था. इसके चलते पुजारी ने मंदिर छोड़ दिया. अब पिछले 1 महीने से मंदिर में कोई भी पुजारी नहीं होने के चलते मंदिर की मूर्ति के आगे ताला लगा हुआ है. 

bhootnath temple churu

मंदिर के आगे ताला लगाना बहुत बड़ा पाप
लोगों का कहना है कि माहेश्वरी ट्रस्ट मंदिर (Maheshwari Panchayti Trust) को मोहल्लेवासियों के सुपुर्द कर दे तो वो मंदिर में पुजारी की व्यवस्था कर सकते हैं लेकिन ट्रस्ट न तो मंदिर में पुजारी की व्यवस्था कर रहा है और न ही मंदिर की साफ-सफाई करवा रहा है. श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर में कई बार हम साफ सफाई करते हैं और बाहर से ही मूर्ति की पूजा करते हैं लेकिन भगवान के मंदिर के आगे ताला लगाना बहुत बड़ा पाप है. शास्त्रों के मुताबिक, किसी भी मूर्ति की एक बार प्राण-प्रतिष्ठा होने के बाद उस मूर्ति की पूरे विधि-विधान से पूजा करना अनिवार्य होता है लेकिन ट्रस्ट इस बारे में नहीं सोच रहा है. 

2004 में हुई थी मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा स्थापना
बता दें कि 2004 में भूतनाथ मंदिर (Bhootnath Temple) के अंदर मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी,  इस भव्य मंदिर का निर्माण हरीश चांडक ने अपने पिता की पावन स्मृति में करवाया था. फिलहाल इस मंदिर में ताला लगा हुआ है. ऐसे में लोगों को इंतज़ार है कि आखिर कब मंदिर का ताला खुलेगा और भगवान आज़ाद होंगे?

Edited By: Muzammil Ayyuub, News Desk