जाट बहुल नागौर लोकसभा सीट रहा है कांग्रेस का गढ़, BJP दे रही है कड़ी टक्कर

नाथूराम मिर्धा के बाद नागौर की पब्लिक ने उनके पुत्र भानुप्रकाश मिर्धा को सांसद बनाया. 

जाट बहुल नागौर लोकसभा सीट रहा है कांग्रेस का गढ़, BJP दे रही है कड़ी टक्कर
यह जिला जाट राजनीति का केंद्र माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नागौर: नागौर लोकसभा राजस्थान का एक प्रमुख लोकसभा क्षेत्र है. मारवाड़ की यह सीट जाट राजनीति का प्रमुख केंद्र मानी जाती है. नागौर की राजनीति आजादी के बाद से ही राजनैतिक परिवारों के इर्द गिर्द ही घूमती रही है. नागौर की राजनीति का प्रमुख घराना जो माना जाता है वह है मिर्धा परिवार फिर चाहे दिग्गज किसान नेता नाथूराम मिर्धा हों या फिर रामनिवास मिर्धा दोनो ने देश की सबसे बड़ी सभा यानी संसद में नागौर की बात रखी. 

यही कारण रहा था कि जब देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने नागौर को अपना केंद्र माना था और ग्राम सशक्तिकरण को लेकर नागौर से ही बलबतराय मेहता समिति की सिफारिशों के आधार पर पंचायतराज की शुरुआत की थी. इसके बाद सन 1971 से एक एसे राजनीतिक शख्स का उदय हुआ जिसका नाम नाथूराम मिर्धा था. उन्होंने नागौर की बात पूरे देश में रखी. 

नाथूराम मिर्धा के बाद नागौर की पब्लिक ने उनके पुत्र भानुप्रकाश मिर्धा को सांसद बनाया. मिर्धा परिवार का यह दमखम यहीं नही रुका बल्कि इसके बाद बाबा के नाम से पहचान बनाने वाली नाथूराम मिर्धा की पोती डॉ. ज्योति मिर्धा ने भी कांग्रेस की ओर से यहां चुनाव जीता. हालांकि, जब नरेंद्र मोदी लहर आइ उस समय भाजपा ने पूर्व प्रशासनिक अधिकारी सीआर चौधरी को नागौर लोकसभा का उम्मीदवार बना दिया और जनता ने एसा जनादेश दिया की मिर्धा परिवार का गढ़ रही नागौर लोकसभा सीट इस बार भाजपा के खाते में चली गई है. भाजपा के सीआर चौधरी ने मिर्धा परिवार का गढ़ ढहाते हुए 75 हजार से अधिक मतों से 2014 में जीत दर्ज की. सीआर चौधरी ने नागौर लोकसभा सीट से 4 लाख 14 हजार 791 वोट लिए, जबकि प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी और निवर्तमान सांसद डॉ. ज्योति मिर्धा 3 लाख 39 हजार 573 वोट लेकर द्वितीय स्थान पर रहीं.

खेती और किसान है मुख्य मुद्दा
नागौर में वैसे तो जनता कई सारे विकास चाहती है लेकिन मुख्य रूप से शिक्षा, उद्योग, रोजगार और इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. वहीं, उच्च संस्थान खुलवाने तथा पॉलिटेक्निक कॉलेज और केन्द्रीय विद्यालय को खोलना भी यहां के विकास कार्यों में से एक है. नागौर में रेलवे का ओर ज्यादा विस्तार भी किया जाना है. जनसंख्या की दृष्टि से बड़ा जिला होने के कारण यहां मेडिकल कॉलेज खुलवाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं. इसके अलावा कई और ऐसे चुनावी मुद्दे हैं जिनके नाम पर यहां पार्टियों द्वारा वोट की मांग की जाती है. 

जाट मतदाताओं की बहुलता
यह जिला जाट राजनीति का केंद्र माना जाता है. मिर्धा परिवार के दो सदस्य रामनिवास मिर्धा और नाथूराम मिर्धा के समय जाट राजनीति शिखर पर थी. इन्हीं के चलते नागौर जाट राजनीति का सियासी केंद्र बना. जिले में कुल 10 विधानसभा सीट हैं, जिनमें से 8 सामान्य वर्ग के लिए हैं, जबकि 2 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं.