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राजस्थान: पुलिस और SBI प्रबंधन में खींचतान, अधर में सुरक्षा गार्ड की भुगतान राशि

अब एसबीआई पर सुरक्षा के लिए बकाया को लेकर पुलिस मुख्यालय व बैंक के मुख्यालय में एक तरह से जंग छिड़ी हुई है.

राजस्थान: पुलिस और SBI प्रबंधन में खींचतान, अधर में सुरक्षा गार्ड की भुगतान राशि
पीएचक्यू ने राज्य सरकार से इस मामले में दखल देने की मांग की है.

जयपुर: बैंकों में पुलिस सुरक्षा गार्ड लगाने के बदले भुगतान को लेकर पुलिस मुख्यालय और एसबीआई बैंक प्रबंधन में लंबी खींचतान चल रही है. पीएचक्यू सुरक्षा के बदले 31 करोड़ रुपए मांग रहा है, वहीं बैंक प्रबंधन रिजर्व बैंक की गाइड लाइन का हवाला देकर राशि देने से इनकार कर रहा है. पीएचक्यू ने राज्य सरकार से इस मामले में दखल देने की मांग की है.

बैंकों की चेस्ट शाखाओं के साथ ही सामान्य शाखाओं को पुलिस की ओर से सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराई जा रही है. अलग-अलग बैंकों को अलग संख्या के हिसाब से पुलिस गार्ड उपलब्ध कराई जाती है. पुलिस गार्ड के बदले बैंक प्रबंधन पुलिस मुख्यालय को पुनर्भुगतान करते हैं. अन्य बैंकों ने पुलिस मुख्यालय को गार्ड के बदले भुगतान कर दिया, लेकिन एसबीबीजे व एसबीआई ने अडंगा लगा दिया. एसबीबीजे का एसबीआई में मर्जर हो गया, सुरक्षा गार्ड के पेटे एसबीआई प्रबंधन पर 51 करोड़ 99 लाख्र रुपए का बकाया हो गया. इसमें से एसबीआई ने 20 करोड़ का भुगतान कर दिया, लेकिन बकाया 31 करोड़ 99 लाख पर कुंडली मार दी. 

अब एसबीआई पर सुरक्षा के लिए बकाया को लेकर पुलिस मुख्यालय व बैंक के मुख्यालय में एक तरह से जंग छिड़ी हुई है. दोनों तरफ से तीरों की तरह पत्रों का वार हो रहा है. बैंक प्रबंधन ने 29 जून 2018 तथा 11 सितम्बर 2018 को पत्र लिखकर 20 करोड़ को फुल एंड फाइनल पेमेंट मानने का प्रस्ताव दिया. जवाब में पुलिस मुख्यालय ने 26 दिसम्बर 2018 व 28 फरवरी 2019 को पत्र लिखकर प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया. 

वहीं एसबीआई के मुख्य महाप्रबंधक ने 14 मार्च 2019 को एक बार फिर पत्र लिखा. रंजन ने 4 मई 2012 को केंद्रीय वित्त सचिव डीके मित्तल व राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव सीके मैथ्यू के निर्देशों व सुझावों का हवाला दिया. उनके निर्देशों के अनुसार करेंसी चेस्ट की सुरक्षा का जिम्मा राज्य सरकार का होगा. इसके बदले बैंक किसी प्रकार का भुगतान नहीं करेगा. इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट करते हुए गृह विभाग को लिखा कि भुगतान का मामला वर्ष 2012 से पुराना है, जिससे सुझाव लागू ही नहीं होते हैं.