कोटा: राजस्थान स्वास्थ्य विभाग सचिव को NCPCR ने जारी किया शो कॉज नोटिस

आयोग ने अपनी तरफ से इंक्वायरी की थी और पाया था कि हॉस्पिटल की व्यवस्था बहुत लचर है. वहां सूअर घूम रहे हैं और बच्चों के लिए बिल्कुल भी अच्छे इंतजाम नहीं है.

कोटा: राजस्थान स्वास्थ्य विभाग सचिव को NCPCR ने जारी किया शो कॉज नोटिस
कोटा के अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. एस सी दुलारे को इंक्वारी कमेटी ने बड़ा लापरवाह भी बताया था.

कोटा: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights) ने राजस्थान स्वास्थ्य विभाग सचिव को 77 बच्चों की मौत के मामले में शो कॉज नोटिस दिया. वहीं चीफ मेडिकल ऑफिसर को सम्मन किया और 3 जनवरी को दिल्ली NCPCR के ऑफिस बुलाया है.

दरअसल, आयोग ने अपनी तरफ से इंक्वायरी की थी और पाया था कि हॉस्पिटल की व्यवस्था बहुत लचर है. वहां सूअर घूम रहे हैं और बच्चों के लिए बिल्कुल भी अच्छे इंतजाम नहीं है. वार्ड की हालत भी खस्ता थी. वहीं कोटा के अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. एस सी दुलारे को इंक्वारी कमेटी ने बड़ा लापरवाह भी बताया था.

दरअसल, शिक्षा नगरी के जेके लोन अस्पताल में 2019 में 940 बच्चों की मौत को बीजेपी ने गंभीरता से लिया है. एक महीने में 77 बच्चों की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है. बीजेपी ने मामले की जांच के लिए सोमवार को चार महिला सांसदों की फैक्ट-फाइंडिंग टीम गठित की है.

राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आंकड़े जारी किए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि कोटा में मौत की दर राजस्थान में सबसे कम है. अस्पताल प्रशासन से पिछले साल हुई मौत के आंकड़े लिए गए. आंकड़ों के मुताबिक 2014 में 15719 बच्चे भर्ती हुए थे, जिसमें 1198 बच्चों की मौत हुई. 2015 में 17579 बच्चों में 1260 बच्चों की मौत हुई थी. पिछले साल 2018 में 16436 बच्चे भर्ती हुए थे, जिसमें 1005 बच्चों की मौत हुई. इस वर्ष 2019 में 16892 बच्चे भर्ती हुए हैं, इनमें से 940 बच्चों की मौत हो चुकी है.

हरकत में आ गईं सरकारें
राजस्थान के कोटा के जेके लोन अस्पताल (JK Lon Hospital) में दो दिन में 10 बच्चों की मौत हुई तो जैसे भूचाल आ गया. जयपुर से दिल्ली तक सरकारें हरकत में आ गईं. हर कोई बच्चों मौत के कारणों का पता लगाने अस्पताल पहुंचने लगा. अस्पताल में निरीक्षण करने की होड़ से लग गई.