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इलाज के लिए जा रहे है कोटा के सरकारी अस्पताल? साथ ले जाएं पंखा और कूलर!

मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल के कई वार्डों में कूलर- पंखे खराब रहने के कारण मरीजों को मजबूरन घरों से पंखे-कूलर लाकर इलाज करवाना पड़ रहा है. 

इलाज के लिए जा रहे है कोटा के सरकारी अस्पताल? साथ ले जाएं पंखा और कूलर!
प्रशासन की लापरवाही का रवैया कोढ़ में खाज बन गई. (फाइल फोटो)

कोटा/मुकेश सोनी: यदि आप कोटा के सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने आ रहे है तो घर से पंखा, कूलर साथ लेकर जाए. गर्मी के इस मौसम में भी अस्पताल प्रशासन मरीजों की पीड़ा दो दूर करने में नाकाम साबित हो रही है. 

आपको बता दें कि शहर का पारा 45 डिग्री तक पहुंच चुका है. इस प्रचंड गर्मी में आम लोगों के साथ मरीज व उनके परिजनों का हाल बेहाल है. खास कर सरकारी अस्पतालों में जो वार्ड में भर्ती है. वहां की गर्मी ने मरीजों को बेचैन कर दिया है.

मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल के कई वार्डों में कूलर- पंखे खराब पड़े है. मरीजों को मजबूरन घरों से पंखे-कूलर लाकर इलाज करवाना पड़ रहा है. जबकि गायनिक पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड की में  दो कूलर गर्म हवा फेंक रहे है. ऐसे में जज्जा-बच्चा को हवा नहीं मिल पा रही है. जिसके कारण मरीज घरों से कूलर-पंखे लाकर काम चला रहे है. अव्यवस्था का आलम इतना है कि मेल मेडिसिन वार्ड में रेजीडेंट व नर्सिंग स्टाफ मोबाइल की रोशनी में मरीजों का इलाज करते मिले.

सड़क दुर्घटना में गंभीर घायलों को समय व तुरंत इलाज मिल सके. इसके लिए अस्पताल में ट्रोमा वार्ड बनाया था. ट्रोमा वार्ड याने जीवन की टूटती सांसों को सहारा देने वाला सबसे अहम वार्ड. लेकिन इस वार्ड की भी बुरी हालात है. 

भीषण गर्मी में इस वार्ड में अंगारे बरस रहे है. 20 बेडों के इस वार्ड में 23 एसी व 20 पंखे लगे है. साथ ही 23 में से केवल 6 एसी ही काम कर रहे हैं. जिनमें तीन स्टाफ और तीन मरीज के लिए लगे हैं. इस सेंटर में करीब 15 मरीज भर्ती है. अस्पताल अधीक्षक को एसी व पंखे चालू करवाने के लिए कई बार लिखित आवेदन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है. 

सरकार आम लोगो को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को प्रयासरत है. लेकिन जिम्मेदारो का लापरवाह का रवैया कोढ़ में खाज का काम कर रहा है. जिसका सीधा असर सरकार की छवि के साथ साथ मरीजो की सेहत व जेब पर भी पड़ रहा है.