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पद्मश्री गुलाबो सपेरा ने उठायी राजस्थान में लोक कला बोर्ड बनाने की मांग

गुलाबो को पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा जा चुका है. वहीं पिछले माह जापान में यूनेस्को पुरस्कार भी गुलाबो को ही मिला

पद्मश्री गुलाबो सपेरा ने उठायी राजस्थान में लोक कला बोर्ड बनाने की मांग
गुलाबो ने कहा कि वह लोक कला बोर्ड बनाने की मुहिम को वो आगे बढ़ाने वाली है

झुंझुनूं: राजस्थान की प्रसिद्ध पद्मश्री महिला कलाकार, अब प्रदेश के कलाकारों के हक के लिए संघर्ष करने को तैयार है. कालबेलिया नृत्य को ना केवल देश, बल्कि विदेशों में पहचान दिलाने वाली नृत्यांगना पद्मश्री गुलाबो सपेरा ने कलाकारों के लिए संघर्ष करने का पूरा मन बना लिया है. हर कोई जानता है कि गुलाबो ना केवल इस राजस्थान की सबसे बड़ी और ख्यातनाम नृत्यांगना है. वहीं देश और विदेश में कालबेलिया नृत्य को गुलाबो के नाम से ही जाना-पहचाना जाता है. 

वहीं बिग बॉस में भागीदार बनने से तीन साल पहले गुलाबो को पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा जा चुका है. पिछले माह जापान में यूनेस्को पुरस्कार भी गुलाबो को मिला. जिसके बाद से ना केवल गुलाबो, बल्कि पूरे प्रदेश के लोक कलाकार काफी खुश है. इसी के चलते लोक कलाकार इसी माह 28 मार्च को एक बड़ा कार्यक्रम राजस्थान में करने जा रहे है.

गुलाबो के जीवन की कहानी भी कोई कम फिल्मी नहीं है. कालबेलिया समाज में दशकों पहले बेटी के जन्म को अपशकुन माना जाता था. इसलिए गुलाबो को भी जन्म के बाद जमीन में गाड़ दिया गया था. लेकिन गुलाबो के परिजनों ने उसे ना केवल जमीन से निकाला, बल्कि उसे नई जिंदगी भी दी. खुद गुलाबो मानती है कि उन्हें समाज ने कभी अपनी बेटी नहीं माना. उनके बारे में बुरा-बुरा बोलते थे, लेकिन अब उन्हें उसी समाज ने अपना ना केवल अध्यक्ष चुना है बल्कि सम्मान भी देते है तो खुशी होती है. गुलाबो ने बताया कि वह अपने पद्मश्री और यूनेस्को का सम्मान प्रदेश के लोक कलाकारों को समर्पित कर रही है. साथ ही 28 मार्च को होने वाले कार्यक्रम में कालबेलिया नृत्य का अलग से घराना घोषित कराने और प्रदेश में लोक कलाकारों के लिए बोर्ड बनाने की मांग की जाएगी. 

गुलाबो बताती है कि लोक कला बोर्ड बनाने की मुहिम को वो आगे बढ़ाने वाली है. उनका कहना है कि कलाकार स्टेज पर रहता है तब तक कलाकार होता है. लेकिन स्टेज से उतरते ही वो लावारिस हो जाता है. कई ऐसे कलाकार देखें और सुने है, जिन्होंने कला को नई ऊंचाई तक पहुंचाया और उनकी मौत एक लावारिस की तरह हुई. इसलिए वे चाहती है कि एक बोर्ड बने और कलाकार को ता उम्र तक कलाकार ही पदवी ही मिले. साथ ही उन्होंने राजस्थानी कलाकारों को लेकर एक बड़ा बयान भी दिया . उन्होंने कहा कि राजस्थान कलरफुल है, यहां की संस्कृति और परंपरा पूरे विश्व में सराही जाती है, लेकिन विडंबना है कि मुंबई जाने वाले राजस्थानी कलाकार, खुद को राजस्थानी कहलाने में शर्म महसूस करते है. 

गुलाबो अब कालबेलिया नृत्य को ना केवल घराना घोषित कराने के लिए लड़ाई लडऩे वाली है. बल्कि पुष्कर में जल्द ही एक डांस स्कूल भी शुरू करने जा रही है. जिसमें वे युवाओं को इस नृत्य की बारीकियां बताएगी. गुलाबो ने इस मामले में भी कहा है कि उन्हें अपनी स्कूल के लिए सरकार से कोई सहयोग नहीं चाहिए. वे चाहती है कि स्कूल से निकले कलाकारों को सरकार अधिक से अधिक कार्यक्रम दिलाने की योजना बनाए या फिर दें, ताकि कलाकार भूखा ना रहे और वह इसे करिअर के रूप में लें.