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राजस्थान के यह निवासी गरीब छात्रों के लिए चला रहे PMT का सुपर 30, जानें पूरा मामला

यह संस्थान रेगिस्तान के बाड़मेर जिले के अलग-अलग ग्रामीण इलाकों से उन बच्चों का चयन करती है जो दसवीं कक्षा में फर्स्ट डिवीजन से पास होते हैं और सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर रहे होते हैं. 

राजस्थान के यह निवासी गरीब छात्रों के लिए चला रहे PMT का सुपर 30, जानें पूरा मामला
फोटो साभार- ANI

बाड़मेर/ भुपेश आचार्य: रेगिस्तान के ग्रामीण इलाकों में जरूरतमंद बच्चों को डॉक्टर बनाने को लेकर एक सरकारी डॉक्टर ने ऐसी अनोखी मुहिम शुरू की जिसके चलते उनकी संस्थान के 30 से अधिक छात्र डॉक्टर बन चुके हैं. ये सभी छात्र एम्स सहित अन्य संस्थानों में लगे हुए हैं. 50 विलेजर्स नाम की यह संस्थान हर साल गरीब तबके के 50 बच्चों को पीएमटी और नीट के लिए तैयारी करवाती है और इसी वजह से इस संस्था का नाम 50 विलेजर्स रखा गया है. 

इन शर्तों पर मिलता है एडमिशन
यह संस्थान रेगिस्तान के बाड़मेर जिले के अलग-अलग ग्रामीण इलाकों से उन बच्चों का चयन करती है जो दसवीं कक्षा में फर्स्ट डिवीजन से पास होते हैं और सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर रहे होते हैं. हालांकि, मात्र इतने भर से ही किसी भी छात्र को यहां एडमिशन नहीं मिलता है इसके लिए छात्र का गरीब तबके और ग्रामीण परिवेश से होना जरूरी है. साथ ही उस छात्र में कुछ बनने की चाहत होनी चाहिए. 

2012 में डॉ. भरत सारण ने की थी इसकी शुरुआत
यह संस्था उन छात्रों की मदद के लिए है जो पैसों के अभाव के चलते कुछ बन नहीं पाते. ऐसे बच्चों की खोज करके यह संस्थान उन बच्चों को बाड़मेर जिला मुख्यालय पर एक प्लेटफार्म देती है. जिसमें पढ़ना, लिखना, खाना, पीना इन सब का खर्च यह संस्थान उठाती है. आज इस संस्थान की चर्चा राजस्थानी नहीं पूरे देश में हो रही है. बाड़मेर जिले के सरकारी अस्पताल में काम करने वाले डॉ. भरत सारण ने 2012 में इस संस्थान को शुरू किया था. 

खुद गांव से ताल्लुक रखते हैं डॉ. भरत
डॉ. भरत सारण खुद गांव से आते हैं. जब वह जिला मुख्यालय पर पढ़ने आए तो फिर यहां ऐसा माहौल देखा कि ट्यूशन के लिए उनके पास पैसे नहीं थे. बिना ट्यूशन के ही अपनी पढ़ाई पूरी करने के कारण सारण 7 साल बाद डॉक्टर बने और उसी दिन उन्होंने ठान लिया कि राजस्थान के ग्रामीण इलाकों से जो बच्चे जरूरतमंद हैं उनको डॉक्टर बनाकर ही रहेंगे. शुरू में इस मुहिम का काफी लोगों ने मजाक उड़ाया लेकिन जब इस मुहिम के परिणाम आने लगे तो हर कोई भरत सारण की तारीफ करने लगा. 

इस संस्थान की खास बात यह है कि इनमें अधिकांश बच्चे ऐसे हैं जिनके माता या पिता नहीं है या किसी के माता-पिता मजदूर हैं या किसान का काम करते हैं. उन बच्चों को ही यहां पर परीक्षा के बाद दाखिला दिया जाता है. इस संस्थान के परिसर की एक और खास बात है कि यहां पर कोई भी वॉर्डन नहीं है. बच्चे अपनी मर्जी से रहते हैं और सब कुछ मैनेज बच्चे ही करते हैं. खाना बनाना, पीना, सुबह उठना, पढ़ाई करना सब कुछ बच्चे अपनी दिनचर्या के हिसाब से करते हैं. इन पर कोई भी टीचर नजर नहीं रखता है. 

गौरतलब है कि बाड़मेर जिले के रेगिस्तान में आज भी ऐसे कई सरकारी अस्पताल हैं जहां पर कोई डॉक्टर लगना नहीं चाहता है क्योंकि यहां पर आज भी ग्रामीण इलाकों में पानी और बिजली को लेकर लोग संघर्ष करते हैं. जिसके चलते कोई भी एमबीबीएस डॉक्टर यहां लगना नहीं चाहता है.