राजस्थान: EC ने लोकसभा चुनाव में होने वाले खर्चों का रेट किया डिसाइड

पांच साल में महंगाई का ग्राफ जो भी रहा हो लेकिन इस बार गत चुनावों के मुकाबले प्रत्याशियों के खर्चे में जुड़ने वाली चीजों की दरें भी बढाकर तय की कर दी गई हैं. 

राजस्थान: EC ने लोकसभा चुनाव में होने वाले खर्चों का रेट किया डिसाइड
फाइल फोटो

जयपुर: राजनीतिक दलों के साथ प्रशासन ने भी लोकसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं. चुनाव में प्रत्याशी किस आइटम पर कितना खर्च कर सकेगा इसके रेट तय कर दिए गए हैं. इसमें चुनावी रैलियों के दौरान खाने-पीने पर होने वाले खर्च और चीजों के रेट भी तय कर दिए गए हैं. इसके आधार पर प्रत्याशियों के खर्च का ब्योरा तय होगा यानि लोकसभा चुनाव के दौरान वोटरों को चाय और समोसा खिलाना तो महंगा पड़ेगा ही. साथ ही वोटर्स से गले में माला पहनाना भी महंगा पड़ेगा.

वैसे तो नेताओं और फूलों की मालाओं का चोली दामन का साथ है लेकिन चुनावों में नेताजी को इन मालाओं से परहेज ही करना होगा क्योंकि जितनी ज्यादा माला, उतना ज्यादा खर्च जुड़ेगा. इस बार लोकसभा चुनावों में गत बार के मुकाबले खर्च की सीमा में ढाई गुणा की बढ़ोतरी की है. पिछले चुनावों में जहां खर्च सीमा 28 लाख रूपए थी. वहीं इस बार यह सीमा बढ़ाकर 70 लाख रूपए कर दी है. 

पांच साल में महंगाई का ग्राफ जो भी रहा हो लेकिन इस बार गत चुनावों के मुकाबले प्रत्याशियों के खर्चे में जुड़ने वाली चीजों की दरें भी बढाकर तय की कर दी गई हैं. राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के बीच इन दरों पर विचार विमर्श करने के बाद अंतिम मुहर लगा दी गई है. जिसमें गुलाब की माला के 20 रूपए और गेंदे की माला के 10 रूपए और साफा के 100 रूपए तय किए गए हैं. खर्च पर इस बार अफसरों का पहरा बैठा दिया गया है ताकि वे निर्धारित सीमा से अधिक खर्च न कर सकें.

प्रत्याशी की एक चाय 5 रुपये और कॉफी 12 रूपए और 1 समोसा 12 रुपये का होगा. इसी रेट लिस्ट रेट के आधार पर चुनाव के दौरान प्रत्याशी के कार्यक्रम पर होने वाले खर्चे का हिसाब-किताब लगाया जाएगा. वोटर और कार्यकर्ताओं को खिलाए जाने वाला साधारण खाना भी 40 और 50 रुपये थाली के हिसाब से खर्च में शामिल किया जाएगा. जिला निर्वाचन अधिकारी ने खाने-पीने के सामा से लेकर फूल मालाओं तक की रेट लिस्ट जारी कर दी है.

दरअसल, प्रत्याशी धन के बल पर क्षेत्र में धूम मचाते हैं. वोटरों को रिझाने के लिए धन की बौछार की जाती है. मतदाताओं के खान-पान से लेकर राजनैतिक कार्यक्रमों पर भी खूब पैसा फेंका जाता है. बड़ी-बड़ी जनसभाएं की जाती हैं. जिन पर लाखों रुपये खर्च कर दिए जाते हैं. जगह-जगह जोरदार स्वागत समारोह होते हैं, जहां फूलों की बारिश कर दी जाती है लेकिन इस बार प्रत्याशियों के फिजूल खर्च पर नकेल कस दी गई है. चाहे वे चुनाव में कितना ही धन खर्च करें लेकिन आयोग के शिकंजे से बच नहीं सकेंगे. इस बार नेताजी को गले में फूलों की माला डलवाने का भी हिसाब देना होगा.