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राजस्थान: सरकार की कोशिशों के बाद भी बदहाल स्वास्थ्य केंद्र, मरीज परेशान

दीगोद तहसील क्षेत्र का सबसे बड़े राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सुल्तानपुर इस दिनों अव्यस्थाओं से जूझ रहा है

राजस्थान: सरकार की कोशिशों के बाद भी बदहाल स्वास्थ्य केंद्र, मरीज परेशान
सुल्तानपुर के इस स्वास्थ्य केंद्र को 2 वर्ष पूर्व कोटा मेडिकल कॉलेज के अधीन किया गया था

हेमंत सुमन/कोटा: लोगो को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए नई सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है. गांव गांव अस्पताल खोले जा रहे है तो मरीजो की सुविधा को लेकर अस्पतालों में हर सम्भव साधन और संसाधन भी जुटाए जा रहे है. बावजूद इसके अस्पतालो में लोगो को समुचित उपचार और सुविधाओ का लाभ नहीं मिल पा रहा है. 

कुछ ऐसी ही हालत कोटा जिले के सुल्तानपुर अस्पताल की भी हो रही है. दीगोद तहसील क्षेत्र का सबसे बड़े राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सुल्तानपुर इस दिनों अव्यस्थाओं से जूझ रहा है. सुल्तानपुर का राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र का सबसे बड़ा अस्पताल है. मरीजो को यहां बीमारी के उपचार की पूरी उम्मीद भी रहती है इसी उम्मीद में यहां क्षेत्र के सैकड़ों मरीज रोजाना मर्ज के उपचार की आस में आते है लेकिन अस्पताल में खाली पड़ी कुर्सियां और संसाधन कक्षों के लटके ताले मरीजो को मर्ज के उपचार के पहले अव्यवस्थाओ का दर्द दे रहे है. अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक नहीं है तो कर्मचारियों के अभाव में संसाधनों का भी मरीजो को लाभ नहीं मिल पा रहा. 

सुल्तानपुर अस्पताल में 9 डॉक्टर कार्यरत है लेकिन अधिकांश समय यहां 4 या 5 डॉक्टर ही मिलते है. इनमें भी ओपीडी समय समाप्त होने के बाद रात में पूरा अस्पताल एक ही डॉक्टर के भरोसे चलता है. रात्रि में महिला चिकित्सक यहां नजर ही नहीं आती ऐसे में रात्रि के समय आने वाले मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है. इन सबके बीच चिकित्सालय में उपचार करवाने से पहले पर्ची, जांच व दवा लेने तक मे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है.

गौरतलब है कि सुल्तानपुर अस्पताल को 2 वर्ष पूर्व कोटा मेडिकल कॉलेज के अधीन किया गया था. सरकार की इस कवायद से मरीजों को अस्पताल की व्यवस्थाओ में सुधार की उम्मीद बंधी, इसका कुछ फायदा भी मिला. चिकित्सकों के साथ करोड़ो रूपये के साधन और संसाधन भी अस्पताल को मिले लेकिन बावजूद इसके अस्पताल की व्यवस्थाओ में सुधार नहीं हुआ. कार्मिको की कमी से जूझ रहे अस्पताल में मरीजो को समुचित लाभ नहीं मिल रहा. कई बार महिला चिकित्सक तक नहीं मिलती ऐसे मे मजबूरन कोटा जाना पड़ता है.