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राजस्थान: सरकार से नहीं मिला ब्याजमुक्त ऋण तो साहूकारों से लेने को मजबूर हुए किसान

मानसून से पहले किसानों को ये उम्मीद रहती है कि इस बार पिछली बार से अच्छा मानसून रहेगा. इन्ही उम्मीदों को बांधकर अन्नदाता खेतों में बुआई की तैयारी शुरू कर देते हैं. 

राजस्थान: सरकार से नहीं मिला ब्याजमुक्त ऋण तो साहूकारों से लेने को मजबूर हुए किसान
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: प्रदेश में मानसून से पहले किसानों की कमर टूटती हुई दिखाई दे रही है लेकिन इस बार मौसम नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम कमर तोड़ रहा है. वैसे तो फसली सहकारी ऋण के लिए आवेदन 1 अप्रैल से शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार 2 जून से आवेदन और ऋण वितरण की प्रक्रिया शुरू की गई है. दो महीने की देरी होने के बाद भी किसानों को अब तक कर्ज ही नहीं मिल पा रहा है.

मानसून से पहले किसानों को ये उम्मीद रहती है कि इस बार पिछली बार से अच्छा मानसून रहेगा. इन्ही उम्मीदों को बांधकर अन्नदाता खेतों में बुआई की तैयारी शुरू कर देते हैं. खेतों में बीज बोते हैं, खाद डालते हैं, लेकिन लगता है इस बार मरूधरा की मिट्टी सूखी ही रह जाएगी. लगता है इस बार मानसून के वक्त फसलों के लिए बुआई नहीं हो पाएगी. वो इसलिए क्योंकि इस बार समय से किसानों का कर्ज नहीं मिल पाया इसलिए इस बार राजस्थान के किसान मानसून का स्वागत अपने अंदाज में नहीं कर पाएंगे. 

इस बार ऐसा ही लग रहा है जैसे खुशियों के कमल खेतों ने नहीं खिलेंगे क्योंकि राजस्थान के अन्नदाताओं को समय से ब्याजमुक्त सरकारी कर्ज नहीं मिल पाएगा. जी मीडिया की पड़ताल में ये सामने आया है. अब तक किसानों को कर्ज मिलना तो दूर की बात ये तक नहीं पता कि आवेदन कैसे करना है. अबकी बार 25 लाख से ज्यादा किसानों को फसली ऋण योजना का लाभ मिलने का दावा सहकारिता विभाग कर रहा था, जिसमें से 10 लाख नए किसानों को ऋण मिलता लेकिन लगता नहीं है कि लाखों किसानों को सरकारी मदद मिल पाएगी.

हर बार मानसून आने के साथ दुल्हन की तरह खेत सजते हुए दिखाई देते हैं, लेकिन अबकी बार दुल्हन की तरह हर खेत कैसे सजेंगे. क्योंकि सरकारी आदेश निकले 11 दिन हो गए. लेकिन इसके बावजूद भी सहकारिता विभाग अभी तक फसली ऋण नहीं बांट रहा है. ऐसे में सरकारी सिस्टम की परिकाष्ठा किसानों की परीक्षा लेती हुई दिखाई दे रही है. किसानों का कहना है कि कुछ दिन में यदि पैसे नहीं मिले तो ऊंट के मुंह में जीरा वाली कहावत सही साबित हो जाएगी. यदि मानसून के बाद किसानों को कर्ज मिला तो उस कर्ज का कोई उपयोग नहीं होगा. कई किसान ऐसे भी हैं जिन्हें मोटी ब्याज दर पर साहूकारों से कर्जा लेना पड़ा. क्योंकि सरकारी फसली ऋण बांटने में देरी जो हो गई. जबकि सरकारी फसली ऋण में कोई ब्याज नहीं देना पड़ता, लेकिन सही समय पर ऋण नहीं बटने से किसानों को मजबूरन साहूकारों से कर्ज लेना पड़ रहा है.