राजस्थान: हैंडीक्राफ्ट उद्यमियों के प्रोडक्ट अब विदेश से नहीं होंगे रिटर्न, शुरू हुई लैब

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने उद्घाटन करते हुए कहा कि यह सेंटर राजस्थान की कलाकृति को समर्पित हैं. राजस्थान के शिल्पकारों से लगातार मिलना हुआ हैं, कुछ मांगें उठाई गई जो पूरी की गई. 

राजस्थान: हैंडीक्राफ्ट उद्यमियों के प्रोडक्ट अब विदेश से नहीं होंगे रिटर्न, शुरू हुई लैब
केंद्र सरकार की योजना के तहत 75 फीसदी फीस वहन की जाएगी.

जयपुर: प्रदेश के हैंडीक्राफ्ट निर्यातकों के उत्पादों का अब सैंपल फेल नहीं होगा. विदेशों के तय मापदंडों के आधार लैब जांच सुविधा जयपुर में उपलब्ध होगी. केंद्रीयस वस्त्र मंत्री स्मृति ईरानी ने हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्टिविटी सेंटर और टेस्टिंग लैब का सोमवार को उद्घाटन किया. हैंडीक्राफ्ट लैब में 135 तरह की जांच हो सकेगी. इसके लिए अंतराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मुहैया करवाई गई हैं. कुल 6 करोड़ रुपए की लागत से बनी हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्टिविटी सेंटर और टेस्टिंग लैब अब प्रदेश से ही उत्पादों की क्लीयरेंस देकर भेजेगी. 

135 तरह की होंगी टेस्टिंग
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने उद्घाटन करते हुए कहा कि यह सेंटर राजस्थान की कलाकृति को समर्पित हैं. राजस्थान के शिल्पकारों से लगातार मिलना हुआ हैं, कुछ मांगें उठाई गई जो पूरी की गई. यह टेस्टिंग लैब इसका एक उदाहरण हैं. इसमें 135 अगल अलग उत्पादों के टेस्ट हो सकेंगे. इस सेंटर के जरिये कौशल विकास को भी बल मिलेगा. 

कारीगरों को करें शिक्षित
हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्टिविटी सेंटर और टेस्टिंग लैब के उद्धघाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने निर्यातकों से अपील करते हुए शिक्षा का प्रसार कारीगरों और उनके परिवारों तक करने की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि कारीगरों और उनके बच्चों की शिक्षा का शेष ध्यान रखें. केंद्र सरकार की योजना के तहत 75 फीसदी फीस वहन की जाएगी. वहीं शिल्पकारों के लिए टूल किट खरीदने के लिए मुफ्त व्यवस्था की गईं हैं. 

इस अवसर पर केंद्रीय योजनाओं से लाभांवित शिल्पकारों, बुनकरों और कारीगरों को प्रमाण पत्र सौंपे गए. साथ ही हैंडीक्राफ्ट क्षेत्र में पदमश्री से सम्मानित प्रदेशवासियों का भी केंद्रीय मंत्री ने सम्मान किया. प्रदेश के हैंडीक्राफ्ट उत्पादों की विश्व में भारी मांग है. देश में शीर्ष हैंडीक्राफ्ट प्रदेश में से एक राजस्थान हैं. इस टैस्टिंग लैब के संचालित होने से विदेशों में पहुंचे उत्पादों के उनके मापदंडों पर फेल होने का खतरा कम होगा.