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राजस्थान: तीसरी कक्षा में रूपा का हुआ बाल विवाह, अब बनने जा रही हैं डॉक्टर

महज 8 साल की उम्र में रूपा को बाल विवाह की बेड़ियों ने जकड़ लिया था. जिस वक्त रूपा की शादी हुई वे तीसरी कक्षा में पढ़ती थी. जैसे तैसे उन्होंने दसवीं की पढ़ाई तो पीहर में कर ली

राजस्थान: तीसरी कक्षा में रूपा का हुआ बाल विवाह, अब बनने जा रही हैं डॉक्टर
रूपा की इस कामयाबी के सामने उनके टीचर वेद जाखड़ का भी अहम योगदान है

जयपुर: राजस्थान के लिए बाल विवाह अभिशाप है. यहां बचपन में शादी कर माता पिता अपने बच्चों का भविष्य अंधेरे में धकेल देते है. उनमें से एक जयपुर के शाहपुरा की रूपा यादव भी हैं. जिनकी महज 8 साल की उम्र में शादी हो गई. तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली रूपा जब शायद शादी का मतलब भी नहीं जानती थी. लेकिन उनकी काबिलियत और जज्बे ने परिवार और समाज की सोच बदल दी और आज रूपा डॉक्टर बनने जा रही है.

महज 8 साल की उम्र में रूपा को बाल विवाह की बेड़ियों ने जकड़ लिया था. जिस वक्त रूपा की शादी हुई वे तीसरी कक्षा में पढ़ती थी. जैसे तैसे उन्होंने दसवीं की पढ़ाई तो पीहर में कर ली, लेकिन 13 साल की उम्र में रूपा का गौना कर उन्हें ससुराल भेज दिया गया. अब इतनी कम उम्र में रूपा को परिवार भी संभालना था और उनकी सोच भी बदलनी थी. इन सबमे उनका साथ दिया उनके पति शंकर ने. अब रूपा की पूरी पढ़ाई की जिम्मेदारी शंकर ने अपने कंधों पर ले ली. इतना ही नहीं उन्होंने खुद की पत्नी को बढ़ाने के लिए अपनी पढ़ाई भी छोड़ दी. रूपा ने ससुराल में स्कूल की परीक्षा पास करने के बाद में बीटेक की पढ़ाई कोटा से की. रूपा का कहना है कि वह खेतों में काम के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी पूरी करती थी उन्हें इतना कम वक्त मिल पाता था कि वे एग्जाम से कुछ ही दिन पहले पढ़ाई कर पाती थी. 

बीटेक की पढ़ाई होने के बाद रूपा पीएमटी का एग्जाम दिया, लेकिन उस वक्त भी उनके सामने कई मुसीबतें सामने खड़ी हो गई थी. एक तरफ तो उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी और दूसरी ओर उन्हें पीएमटी के लिए महाराष्ट्र में कॉलेज मिला, जिसके बाद तो उम्मीद बिल्कुल खत्म हो गई थी लेकिन रूपा ने फिर भी हार नहीं मानी और एक बार फिर से पीएमटी का एग्जाम दिया. जिसके बाद में रूपा अब लगातार आगे बढ़ रही हैं और वे एक कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती है. रूपा के पति शंकर का कहना है कि एक वक्त ऐसा आया था जब मैंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी लेकिन समय के साथ-साथ मैंने भी फिर से पढ़ाई शुरू की और अब मैं भी अपनी पत्नी की तरह आगे बढ़ रहा हूं.

रूपा की इस कामयाबी के सामने उनके टीचर वेद जाखड़ का भी अहम योगदान है, जो लगातार रूपा को मोटिवेशन करते रहे. रूपा के पति शंकर भी अब बी फार्मा कर रहे हैं. समय के साथ साथ रूपा के सास बादामी देवी और ससुर कानाराम की सोच भी बदल गई और आज उन्हें अपनी बहू पर नाज है.