राजस्थान: रोक के बावजूद हो रही खनिज की बिक्री, पकड़ी गई 50 करोड़ रुपए की चोरी

राज्य राजस्व आसूचना निदेशालय ने खनिज फेलस्पार का प्रदेश के बाहर परिवहन पर रोक लगाए जाने के बावजूद राज्य के बाहर बेचे जाने के मामले का खुलासा किया है.

राजस्थान: रोक के बावजूद हो रही खनिज की बिक्री, पकड़ी गई 50 करोड़ रुपए की चोरी
पूरे मामले को डेटा एनालेटिक्स की मदद से उजागर किया गया.

जयपुर: प्रदेश में फेलस्पार खनिज की अन्य राज्यों को सप्लाई बंद है. मार्च महीने में गहलोत सरकार ने स्थानीय ईकाईयों को प्रोत्साहन की दलील देकर फेलस्पार के लम्प्स, ग्रेन्स एवं चिप्स के अन्य राज्यों में परिवहन पर रोक लगाई थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अवैध परिवहन से करोड़ों रुपए की चपत लगी. स्टेट डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस की टीम ने तकनीक का इस्तेमाल कर राजस्व चोरी पकड़ी, जब आंकड़े जुटाए गए तो यह राशि पचास करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गई. डेटा एनालेटिक्स की मदद से 87 डीलर्स के 3,583 वाहनों की जांच की गई. इसकी विस्तृत जांच रिपोर्ट खान एवं भू-विज्ञान विभाग को सौपी गई है. 

राज्य राजस्व आसूचना निदेशालय ने खनिज फेलस्पार का प्रदेश के बाहर परिवहन पर रोक लगाए जाने के बावजूद राज्य के बाहर बेचे जाने के मामले का खुलासा किया है. पूरे मामले को डेटा एनालेटिक्स की मदद से उजागर किया गया. मामले में सामने आया कि फेलस्पार के लम्प्स, ग्रेन्स एवं चिप्स के अवैध रूप से परिवहन कर राज्य सरकार को लगभग 50 करोड़ की राजस्व हानि हुई है. 

राजस्थान में पूरे देश का लगभग 90 प्रतिशत फेलस्पार का खनन होता है, जिसकी मुख्यतः गुजरात की सेरेमिक इण्डस्ट्रीज में भारी मांग रहती है. अधिकतर फेलस्पार का राज्य के बाहर चले जाने से राज्य के स्थानीय लघु उद्योगों को यह खनिज मिल नहीं पाता था. जिससे वे बन्द होने की कगार पर पहुंच गये थे. राज्य के इन लघु उद्योगों को जीवनदान दिए जाने के उद्देश्य से 10 मार्च 2019 को अधिसूचना जारी कर फेलस्पार खनिज के लम्प्स एवं इसमें निर्मित ग्रेन्स, चिप्स एवं गिट्टी को 3 वर्ष के लिए राज्य के बाहर परिवहन करने पर रोक लगाई गई थी.

अब प्रोसेसिंग के पश्चात केवल फेलस्पार पाउडर ही राजस्थान प्रदेश के बाहर भेजा जा सकता है. रोक के बावजूद भी यदि फेलस्पार पावडर के अलावा यह खनिज किसी भी अन्य रुप में राज्य के बाहर भेजा जाना पाया जाता है तो इस पर 5 साल की सजा अथवा 5 लाख तक का जुर्माना का प्रावधान किया गया है.

राज्य राजस्व आसूचना निदेशालय को हाल ही में इस संबंध में एक शिकायत प्राप्त हुई थी कि रोक लगाने के बावजूद भी भारी मात्रा में ई-रवन्ना एवं ट्रांजिट पास के द्वारा राज्य के विभिन्न खननकर्ताओं एवं डीलर्स के द्वारा फेलस्पार राज्य के बाहर भेजा जा रहा है. जिसका सत्यापन निदेशालय द्वारा डेटा एनालेटिक्स की मदद से किया गया. ई-रवन्ना खनन विभाग द्वारा खान मालिकों को वेब-पोर्टल के माध्यम से जारी किया जाता है. जिसमें वाहन, माल, माल भेजने वाले, माल पाने वाले एवं मिनरल का सम्पूर्ण विवरण दर्ज किया जाता है. वही ट्रांजीट पास स्टॉकिस्ट, ट्रेडर और डीलर को जारी किया जाता है. जिसमें ये सारे विवरण दर्ज किये जाते हैं. 

एसडीआरआई ने डेटा एनालेटिक्स की मदद से माइनिंग विभाग द्वारा जारी फेलस्पार, लम्प्स, ग्रेन्स एवं चिप्स हेतु ई-रवन्ना एवं ट्रांजिट पास के डेटा का विश्लेषण किया. जिसमें 35 माइनिंग लीज़ होल्डर्स को जारी 1,069 ई-रवन्ना से यह मिनरल ट्रको के द्वारा राज्य के बाहर भेजा जाना प्रमाणित पाया गया जिस पर 13.73 करोड़ रूपये की राशि वसूल की जानी है वही 87 डीलर्स द्वारा 3,583 वाहनों से जिनके लिए ट्रांजिट पास जारी किये गये थे से माल राज्य के बाहर भेजा जाना पाया गया. जिस पर 35.82 करोड़ का जुर्माना वसूल किया जाना है. राज्य राजस्व आसूचना निदेशालय ने इस पूरे प्रकरण का खुलासा करते हुए विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर खान एवं भू-विज्ञान विभाग को आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी है.