close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

सरदारशहर: डॉक्टरों की कमी से बीमार हुआ अस्पताल, धूल फांक रही हैं मशीनें

अस्पताल में खाली पद महत्वपूर्ण समस्याओं में से एक है. चिकित्सकों से लेकर वार्ड बॉय तक के खाली पदों की लिस्ट लम्बी है

सरदारशहर: डॉक्टरों की कमी से बीमार हुआ अस्पताल, धूल फांक रही हैं मशीनें
स्त्री रोग, हड्डी रोग और नेत्र रोग विशेषज्ञ तक के पद खाली हैं

मनोज प्रजापत/सरदारशहर: जिले की सबसे बड़ी तहसील सरदारशहर के सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल व्यवस्थागत खामियों का शिकार है. ऐसे में मरीज बेबस और अस्पताल खुद बीमार हो गया है. पैंसठ बिस्तर वाले इस राजकीय चिकित्सालय के हालात बेदह खराब है. अस्पलात, डॉक्टरों के खाली पद, धूल फांकते महंगे उपकरण, ऑपरेटरों का अभाव, दवा की कमी, बेहतरतीब खड़े वाहन व ढंग से साफ सफाई नहीं होना जैसी तमाम खामियों से लैस है. 

अस्पताल में खाली पद महत्वपूर्ण समस्याओं में से एक है. चिकित्सकों से लेकर वार्ड बॉय तक के खाली पदों की फेहरिस्त लम्बी है. लम्बे इंतजार के बावजूद पद खाली पड़े होने से अस्तपाल में न केवल मरीजों का कोई धणी-धोरी नहीं बल्कि कई उपकरण का संचालन भी नहीं हो रहा है. कहने को तो सेठ छोटूलाल सेठिया राजकीय चिकित्सालय तहसील का सबसे बड़ा चिकित्सालय है मगर मरीजों को यहां पर केवल प्राथमिक उपचार ही मिलता है.

वहीं अस्पताल में सीटी स्केन, सोनोग्राफीजैसी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं मरीजों को नसीब नहीं हो रही. राजकीय अस्पताल में चिकित्सकों के पद 12 स्वीकृत है. वहीं वर्तमान में 7 चिकित्सक ही कार्यरत है. जिसमें स्त्री रोग व हड्डी रोग वह नेत्र रोग विशेषज्ञ के पद खाली पड़े है. यहां तक की अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के अभाव में महिलाओं को प्रसव के लिए भी जिला अस्पताल चुरु जाना पड़ता है या शहर के निजी अस्पतालों में मोटी रकम देकर प्रसव कराना पड़ता है. 

यहां तक कि अस्पताल में सोनोग्राफी की जांच नहीं होने के चलते मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर सोनोग्राफी की जांच करानी पड़ती है. जिससे निजी जांच केंद्र मनमानी से पैसे वसूलते हैं. अस्पताल में एक्स-रे मशीन है लेकिन टेक्नीशियन एमआरएस के माध्यम से लगा रखा है. जिसके कारण एमएलसी रिपोर्ट के लिए बाहर जाना पड़ता है. 

हनुमानगढ़ -किशनगढ़ मेगा हाइवे बनने के बाद क्षेत्र में सडक़ हादसे बढ़े है. लेकिन चिकित्सालय में हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण घायलों को प्राथमिक उपचार कर बीकानेर रैफर करने के अलावा कुछ चारा नहीं है. रैफर किए जाने वाले घायलों में कई घायल रास्ते में ही दम तोड़ देते है. 

ऐसा नहीं है कि सरदारशहर के अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के लिए आवाज नहीं उठी है. समय-समय पर शहर के जागरूक लोगों ने अस्पताल को 100 बेड का करने व बेहतर डॉक्टर लगाने सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन किए हैं लेकिन किन्हीं कारणों बस सफल नहीं हुए. क्षेत्र के लोग लम्बे समय से चिकित्सालय को 100 बेड का करने व ट्रोमा सेन्टर शुरू करने की मांग करते आ रहे है.

तत्कालीन पूर्व चिकित्सा मंत्री ने यहां आयोजित कार्यक्रम दो बार राजकीय अस्पताल को क्रमोन्नत करने का आश्वासन दिया था. फिर भी हॉस्पिटल में कोई सुधार नहीं हुआ. यहां तक की शहर के नौजवान युवा भूपेंद्र सिंह ने पिछले वर्ष सरदारशहर से जयपुर तक की पैदल यात्रा कर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को ज्ञापन दिया था लेकिन अस्पताल की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ.