close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान सरकार को देना होगा सुप्रीम कोर्ट को जवाब, अवमानना याचिका पर मिला नोटिस

. राजस्थान में अवैध बजरी खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर हमारे आदेश के बावजूद राजस्थान में अवैध खनन हो रहा तो जल्द बंद हो.

राजस्थान सरकार को देना होगा सुप्रीम कोर्ट को जवाब, अवमानना याचिका पर मिला नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में पूरे राजस्थान में बजरी खनन पर रोक लगा दी थी.

नई दिल्ली: बजरी खनन पर रोक मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है. अब 4 हफ्ते में राजस्थान के चीफ सेक्रेटरी को सुप्रीम कोर्ट में जवाब देना होगा. दरअसल, यह याचिका बजरी ऑपरेटर वेलफेयर सोसायटी अध्यक्ष नवीन शर्मा की तरफ से दाखिल की गई थी. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में पूरे राजस्थान में बजरी खनन पर रोक लगा दी थी. 

याचिकाकर्ता का आरोप है कि कोर्ट के रोक के आदेश के बावजूद धड़ल्ले से प्रदेश में बजरी खनन हो रहा है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बजरी खनन पर रोक को बरकरार रखा था. राजस्थान में अवैध बजरी खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर हमारे आदेश के बावजूद राजस्थान में अवैध खनन हो रहा तो जल्द बंद हो. कोर्ट ने अवैध खनन पर जवाब दाखिल करने के लिए राजस्थान सरकार को और वक्त दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय से कहा था कि वो पर्यावरणीय स्वीकृति का काम जल्द पूरा करे. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि आप खनन माफियाओं को पैदा कर रहे हैं और खनन माफिया लोगों की हत्या कर रहे हैं.जस्टिस लोकुर (अब रिटायर) ने राजस्थान सरकार के वकील पी एस नरसिम्हा से पूछा था कि आप ये बताएं कि निर्माण कार्यों के लिए बालू कैसे आवश्यक है? कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा था कि अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंट्रल टावर के निर्माण में बालू का इस्तेमाल नहीं हुआ था. कोर्ट ने भूटान और अन्य देशों का भी उदाहरण देते हुए कहा था कि इन देशों में निर्माण कार्यों में बालू का इस्तेमाल नहीं हुआ.

सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को 6 सप्ताह के भीतर अध्ययन रिपोर्ट पेश करने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट में पर्यावरण मंत्रालय को ये भी बताने को कहा है कि निर्माण कार्यों के लिए बजरी या फिर बालू क्यों आवश्यक है. राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर राज्य में पूरी तरह से बजरी पर बैन को गलत बताया था. राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि जिन 12 लाइसेंस होल्डरों को पर्यावरण मंजूरी मिल गई है, उन्हें बजरी खनन की इजाजत दी जाए. 

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि बजरी खनन के लिए सबसे पहले यह बताना होगा कि निर्माण कार्यों के लिए बजरी या फिर बालू क्यों आवश्यक है और इनके बिना निर्माण क्यों नहीं हो सकता. आपको बता दें कि 2017 सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बजरी खनन से जुड़े 82 लाइसेंस को रद्द कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि बिना पर्यावरणीय मंजूरी और अध्ययन रिपोर्ट के खनन की इजाजत नहीं दी जा सकती है.