राजस्थान में मौत का दूसरा नाम बना 'स्वाइन फ्लू', 9 सालों में 1 हजार से ज्यादा की गई जानें

चिकित्सा विभाग मार्च आते-आते थोड़ा राहत की सांस ले रहा है. मौत और पॉजिटिव मरीजों का ग्राफ कुछ कम होता नजर आ रहा है

राजस्थान में मौत का दूसरा नाम बना 'स्वाइन फ्लू', 9 सालों में 1 हजार से ज्यादा की गई जानें
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: राजस्थान में मौत बनकर उभर रहे स्वाइन फ्लू से इस साल जनवरी-फरवरी की तुलना में भले की मार्च माह में स्वाइन फ्लू के तेवर कम हुए हों, लेकिन पिछले चार सालों के आंकड़ें देखें तो इस बार स्वाइन फ्लू को का अधिक कहर रहा है. राजस्थान में मौजूदा स्थिति ये है कि साल की शुरुआत से लेकर अब तक रोकथाम के लिए लाख कोशिशों के बाद भी इस पर कोई खास लगाम नहीं लगी है. 

जिसका नतीजा ये है कि साल के 86 दिनों में ''187'' लोगों की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है. राजस्थान में बीते 9 साल के दौरान 1 हजार से ज्यादा लोगों की स्वाइन फ्लू के चलते मौत हो चुकी है. भले ही चिकित्सा विभाग दावा कर रहा हो कि राजस्थान को बीमारू प्रदेश की स्थिति से बाहर ला दिया गया है, लेकिन सच्चाई ये है कि अकेले स्वाइन फ्लू ने इस साल 86 दिनों में 187 जानें लील ली है. 

इस दौरान रिकॉर्ड तोड 4 हजार 843 मरीज पॉजिटिव चिन्हित किए गए. हालांकि, चिकित्सा विभाग मार्च आते-आते थोड़ा राहत की सांस ले रहा है. मौत और पॉजिटिव मरीजों का ग्राफ कुछ कम होता नजर आ रहा है, लेकिन चिंता ये है कि यह आंकड़ा भी पिछले सालों की तुलना में काफी अधिक है. ऐसे में अब चिकित्सा विभाग स्वाइन फ्लू की जांच को लेकर केन्द्र सरकार की गाइडलाइन पर फोकस कर रहा है.

इन जिलों में सर्वाधिक मौत
- जोधपुर में सर्वाधिक 34 मौत, जयपुर 17, बाड़मेर में 16, कोटा 14, उदयपुर 11, चूरू 10 लोग गंवा चुके जान.

- सिरोही, बारां और झालावाड़ा जिले में कम रहा स्वाइन फ्लू का कहर.

- पॉजिटिव मरीजों के आंकड़े में जयपुर रहा सबसे ऊपर.

स्वाइन फ्लू के वायरस को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी ताकत फील्ड में झोंक रखी है. हालांकि, अभी इसके सकारात्मक परिणाम आने बाकी हैं. ऐसे में अब जरूरत इस बात की है कि विभाग जागरूकता पर और अधिक फोकस करे. खुद चिकित्सकों की मानें तो अगर स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखते ही उपचार लेना शुरू किया जाए, तो निश्चिततौर पर स्वाइन फ्लू से होने वाली मौतों पर लगाम कसी जा सकती है.