कोटा: डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार से अस्पतालों में अव्यवस्था, मरीज रहे परेशान

इस दौरान मेडिकल कॉलेज से संबंध रखने वाले नए अस्पताल, जेके लोन व एमबीएस में मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

कोटा: डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार से अस्पतालों में अव्यवस्था, मरीज रहे परेशान
अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक इंतजाम के दावे करता रहा.

मुकेश सोनी, कोटा: एनएमसी बिल के विरोध में रेजीडेंट डॉक्टरर्स द्वारा एक दिन के कार्य बहिष्कार से अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई. इस दौरान मेडिकल कॉलेज से संबंध रखने वाले नए अस्पताल, जेके लोन व एमबीएस में मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

कार्य बहिष्कार के दौरान अस्पतालों की ओपीडी में मरीजो को घंटों इंतजार करना पड़ा. सेवारत चिकित्सक संघ से जुड़े डॉक्टरर्स ने भी सुबह 2 घण्टे का ओपीडी सेवाओ का बहिष्कार करने से मरीजो की मुशिकलें बढ़ गई. वहीं वार्डों में भर्ती मरींजो को परेशानियां उठानी पड़ी.

इस दौरान इलाज के लिए बूंदी जिले के केपाटन से आई महिला सीता ने मीडिया को बताया कि अपने बेटे को दिखाने के लिए एमबीएस अस्पताल की ओपीडी में उसे करीब डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा.

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वही, सुल्तानपुर निवासी सोनू को अपनी आंखों की परेशानियों के लिए आई ओपीडी में डॉक्टर नहीं मिल पाए. सोनू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हॉस्पिटल में कार्यरत कर्मियों ने उसे डॉक्टरों के आई ओपीडी के ऑपरेशन थियेटर में होने की बात कही.

एक अन्य मरीज मोसिना ने बताया कि वार्ड में डॉक्टर साहब राउंड पर नहीं आये. इस दौरान कोई दा हो रही है. हड़ताल का पता नही है. यहा दवा भी नही मिली, बाजार से दवा लाकर बेटी को दी है. हम तो यहाँ परेशान हो गए.

रेजिडेंट्स डॉक्टरर्स को चिकित्सा की रीढ़ माना जाता है. वार्ड भर्ती मरीजो ट्रीटमेंट में रेजिडेंट्स का रोल ज्यादा होता है. रेजिडेंट के कार्य बहिष्कार से कई वार्डो में डॉक्टरर्स के राउंड नही हो पाए. मेडिसिन इमरजेंसी, सर्जरी वार्ड सहित ओपीडी में रेजिडेंट्स डॉक्टर के नही जाने से मरीज परेशान रहे. रेजिडेंट डॉक्टर की हड़ताल का रूटीन ऑपरेशन पर भी असर पड़ा. 

हालांकि अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक इंतजाम के दावे करता रहा. रेजिडेंट्स की हड़ताल को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने फेकल्टी मेम्बर व मेडिकल ऑफिसर्स को लगाया फिर भी मरीजो की परेशानियां कम नही हुई. इलाज के लिए मरीज इधर से उधर चक्कर लगाते रहे.