जोधपुर की युवा पीढ़ी स्मैक के चंगुल में, उठी कार्रवाई की मांग

ग्रामीण इलाके में युवा पीढ़ी में तेजी से नशे की लत फैल रही है. नाबालिग से लेकर 20 से 25 साल के युवाओं में नशे की लत में फंसते जा रहे हैं.

जोधपुर की युवा पीढ़ी स्मैक के चंगुल में, उठी कार्रवाई की मांग
नशे से युवाओं की मानसिक स्थिति भी बिगड़ती जा रही है

जोधपुर: प्रदेश के जोधपुर जिले में युवा पीढ़ी नशे के चंगुल में फंस चुकी है. यह नशा शराब, सिगरेट, बीड़ी और डोडा अफीम का ही नहीं बल्कि स्मैक का है. जोधपुर जिले के भोपालगढ़, बिलाड़ा, पीपाड़, लूनी, फलौदी इलाके में नशे की आदत ने सैंकड़ो युवा तो बर्बादी के कगार पर पहुंच गए हैं, वहीं परिवार भी परेशान है. इन दिनों युवा पीढ़ी में तेजी से फैल रही नशे की लत के परिणाम यह हुआ कि इलाके में लगातार अपराध की वारदातें भी बढ़ रही है. हालांकि पुलिस के आंकड़ों को देखे तो जिस तरह से लगातार स्मेक के खिलाफ कार्रवाई हो रही है. इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में कितनी मात्रा में स्मैक की सप्लाई है या यूं कहें नशे का काला कारोबार धड़ल्ले से हो रहा होगा.

फिल्म 'उड़ता पंजाब' में ड्रग्स के नशे में डूबी दुनिया को पर्दे पर उतारा गया है, इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि नशे के चंगुल में फंस कर किस तरह लोग बर्बादी के कगार पर पहुंच रहे हैं. कुछ ऐसा ही जोधपुर जिले में देखने को मिल रहा है. ग्रामीण इलाके में युवा पीढ़ी में तेजी से नशे की लत फैल रही है. नाबालिग से लेकर 20 से 25 साल के युवाओं में नशे की लत में फंसते जा रहे हैं. नशे से युवाओं की मानसिक स्थिति भी बिगड़ती जा रही है. 

कई मरीजों का तो इलाज भी चल रहा है, वहीं इस नशे के आदि होने के बाद से क्षेत्र में क्राइम भी बढ़ते जा रहे है. क्षेत्र में युवा पिढ़ी द्वारा नशे के ज्यादा आदि हो जाने के बाद से क्षेत्र में चोरी, लूटपाट, मारपीट जैसी घटना लगातार बढ़ती जा रही है. अब क्षेत्र में चंद रुपयों के कारण युवाओं लूट जैसी वारदातें कर रहे है. क्षेत्र में पिछले दो वर्षों के आकड़े देखे जाए तो क्षेत्र में हुई चोरी, लूटपाट सहित वारदातों में सबसे ज्यादा युवा वर्ग के आरोपी थे. 

युवाओं के लिए स्मैक खरीदना आसान सी बात है, लेकिन कानून व्यवस्था से जुड़ी पुलिस को इसकी भनक तक नहीं कि अवैध स्मैक का कारोबार कहां और किस तरह हो रहा है. जिले के इन उपखंड के हर गांवों में युवाओं स्मैक तस्कर खुलेआम स्मैक बेचते है. अब स्थिति यह बन गई है कि फलौदी कस्बे के मुख्य बाजार चौराहों पर भी खुलेआम स्मैक की पुड़िया बिकने लगी है. जो 1 ग्राम स्मैक 5 सौ एक हजार रुपए में खरीद होती है, जो 4 हजार रुपए तक बिकती है.  

कभी चोरी-छिपे बिकने वाले नशे का सामान, आज धड़ल्ले से बिक रहा है. स्मैक के धुएं से जवानी सुलग रही और नशीले इंजेक्शन नशों में उतारे जा रहे हैं. शहर की गली-गली में नशे के दीवाने झूमते दिख रहे हैं. सुनसान स्थानों पर स्मैक और नशीले इंजेक्शन लगाते देखे जा सकते हैं. नशे के आदी युवाओं की बर्बादी का मंजर खुलेआम चलता जा रहा है. हालांकि कुछ दिनों पूर्व फलौदी में जागरूक लोगो ने प्रदर्शन कर उचित कार्रवाई की मांग भी उठाई है.

हालांकि बढ़ते नशे के काले कारोबार को लेकर पुलिस समय समय पर कारवाई करती रही है, लेकिन जिस तेजी से नशा फैल रहा है और बेखौफ होकर काले कारोबार में लगे लोग इसे बढ़ावा दे रहे है. ऐसे में जरूरत है तो सामाजिक संगठनों को भी पुलिस की मदद से कार्रवाई करने और समाज खासकर युवा पीढ़ी को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की. फिलहाल देखने वाली बात यह है कि इस काले कारोबार के खिलाफ पुलिस कब गंभीरता से कार्रवाई करती हैं.