मंदिर के नाम पर मुस्लिमों को भड़काने का खेल कब तक? हिंदुओं से इतनी नफरत क्यों?

अयोध्या केस में सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की तरफ से दलील रखने वाले वकील राजीव धवन के एक बयान ने फिर हलचल मचा दी है.

मंदिर के नाम पर मुस्लिमों को भड़काने का खेल कब तक? हिंदुओं से इतनी नफरत क्यों?
राजीव धवन ने भड़काऊ बयान देते हुए हिंदुओं को शांति में रोड़ा बताया है.

नई दिल्ली: अयोध्या में करीब 500 साल से चले आ रहे जमीन विवाद पर आखिरकार फुल स्टॉप लग गया. देश की सबसे बड़ी अदालत के फैसले के बाद नए भारत ने धार्मिक सौहार्द की नई मिसाल पेश की. इस मामले के पक्षकार सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ने भी फैसले को मानते हुए इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर न करने की बात कही लेकिन अदालत में सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की तरफ से दलील रखने वाले वकील राजीव धवन के एक बयान ने फिर हलचल मचा दी है. अयोध्या मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने भड़काऊ बयान देते हुए हिंदुओं को शांति में रोड़ा बताया है. अयोध्या केस के फैसले को मुस्लिमों के साथ अन्याय बताया है. बड़ा सवाल यही कि आखिर हिंदुओं से इतनी नफरत क्यों? 

मंदिर के नाम पर मुस्लिमों को भड़काने की साजिश क्यों ? सुप्रीम कोर्ट में हारे तो हिंदुओं के खिलाफ साजिश के सहारे? मंदिर के नाम पर मुस्लिमों को भड़काने का 'खेल' कब तक? सौहार्द वाले 'न्यू इंडिया' में साज़िश का खेल क्यों? हिंदुओं के खिलाफ अब कौन कर रहा है साजिश? 
 
अयोध्या पर 'सुप्रीम' कोर्ट ने दिया है फैसला
अयोध्या केस में 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के फैसले में श्रीराम की जन्मभूमि रामलला विराजमान को दी गई. कोर्ट ने कहा कि राम की जन्मभूमि का बंटवारा नहीं होगा. केंद्र सरकार 3 महीने में मंदिर पर ट्रस्ट बनाए
मस्जिद के लिए मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह अयोध्या में 5 एकड़ ज़मीन मिलेगी. 

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अयोध्या फैसला किसे मंजूर, किसे नामंजूर?
सुन्नी सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड को अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर है लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को नामंज़ूर है. अयोध्या केस के मुस्लिम पक्षकार इक़बाल अंसारी को कोर्ट का फैसला मंजूर है. अंसारी ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेंगे. लेकिन एमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी को कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं है. उधर, हिंदू पक्षकार को कोर्ट का फैसला मंजूर है.