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कौमी एकता की मिशाल बनी एक ''गौशाला'',जानिए क्या है खास ?

गौशाला (Gaushala) की देखरेख में मुस्लिम समाज के लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं

कौमी एकता की मिशाल बनी एक ''गौशाला'',जानिए क्या है खास ?
चूरू के रतनगढ़ तहसील के गांव सेहला की गौशाला

नवरतन प्रजापत,चूरू: चूरू के रतनगढ़ तहसील के गांव सेहला की गौशाला (Gaushala)कौमी एकता की मिशाल बनी हुई है.एक तरफ जहां गायों को लेकर सियासत चलती है,गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग के मामले सामने आते हैं. वहीं सेहला की गौशाला कौमी एकता और भाईचारे का अनूठा संदेश दे रही है. इस गौशाला में गांव की बेसहारा एवं आवारा गायों के अगस्त 2016 में सेहला में सभी समाज के सहयोग से यह गौशाला करीब दो दर्जन गायों से स्थापित हुई थी. इसका संचालन बेखूबी गांव के कुछ जागरूक लोग कर रहे हैं. 
खास बात हैं, कि गौशाला (Gaushala) की देखरेख में मुस्लिम समाज के लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं.पिछले तीन वर्षों से सेहला गांव की गौशाला (Gaushala) समिति के अध्यक्ष पद पर हाजी निजाम खां पदस्थापित है.खेती व्यवसाय से जुड़े निजाम खां की उम्र 65 के पार है, लेकिन इस अवस्था में भी वे घरेलू कार्यों के साथ-साथ गायों की सेवा में लीन है.उनका ज्यादातर वक्त गौवंश की सेवा और गौशाला विकास की योजनाओं में ही व्यतीत होता है.गौशाला में 25 लोगों की कार्यकारिणी है, जिसमें हाजी निजाम खां अध्यक्ष पद को सुशोभित कर रहे हैं. इतना ही नहीं कार्यकारिणी में मुश्ताक खां और निजाम खां सदस्य के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं.गोशाला कार्यकारिणी में गोवर्धनलाल लोहिया व गिरधारीलाल इंदौरिया संरक्षक हैं.
गांव के लोगों के मुताबिक 1300 घरों की आबादी वाले इस गांव में 400 घर मुस्लिम भाइयों के हैं, जबकि 900 घर हिंदू समुदाय के हैं. खास बात ये हैं, कि गौशाला के कामों में सभी लोगों का सहयोग मिलता है. जिन लोगों ने अपने खेतों में ट्यूबवैल बना रखे हैं,वे लोग गोवंश के लिए चारा की व्यवस्था करते हैं. हिंदू-मुस्लिम(Hindu-Muslim)दोनों समुदाय के लोग गौशाला में गोवंश की सेवा में अनवरत रूप से जुटे हैं.सेहला गांव की ये गौशाला हिंदू-मुस्लिमों के बीच खाई और नफरत पैदा करने वालों को आईना दिखा रहा है.