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कोटा: अस्पताल में मरीजों से पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली का भंडाफोड़

पार्किंग स्टैंड ठेकेदार ने अवैध वसूली का बड़ा कारोबार यंहा चला रखा था और किसी को इसकी भनक भी नहीं थी. अवैध वसूली के लिए ठेकेदार ने बेहद ही चालाकी दिखाते हुए नो-पार्किंग जोन में ही पार्किंग बना ली और  उसके लिए वहां एक कार्मिक भी नियुक्त किया था. 

कोटा: अस्पताल में मरीजों से पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली का भंडाफोड़
प्रतीकात्मक तस्वीर

केके शर्मा,कोटा: कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में नो-पार्किंग जोन में अवैध वसूली का भंडाफोड हुआ है.पार्किंग स्टैंड ठेकेदार ने अवैध वसूली का बड़ा कारोबार यंहा चला रखा था और किसी को इसकी भनक भी नहीं थी. अवैध वसूली के लिए ठेकेदार ने बेहद ही चालाकी दिखाते हुए नो-पार्किंग जोन में ही पार्किंग बना ली और ठेकेदार ने उसके लिए वहां एक कार्मिक भी नियुक्त किया था. ये कर्मचारी खुद वाहनों को पार्क करवाता था और उनको नो-पार्किंग की रसीद देकर 10 रूपए की वसूली करता था .

 मेडिकल कॉलेज में ईलाज के लिए आने वाले लोगों को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि वहां पर पार्किंग स्थल है या नहीं . जो लोग पहली बार ईलाज कराने आते थे उनको ये कर्मचारी गाड़ी पार्क करवाता फिर उनसे पार्किंग शुल्क के नाम पर अवैध वसूली की जाती.इतना ही नहीं ये शातिर वाहन मालिकों को एक पर्ची भी देता था जिससे वाहन मालिक को शक न हो. वहीं वाहन मालिक के वापस आने पर वो पर्ची वापस लेकर पर्ची फाड़ देता था. जिससे कोई सबूत भी न बचे

दरअसल अस्पताल में ईलाज के लिए आने वाले मरीजों को इस बात की जानकारी ही नहीं होती की यंहा पार्किंग है  या नहीं. अबरार नाम के एक युवक ने बताया की उसे पार्किंग की जानकारी नहीं थी , यहां खड़े कर्चमारी ने उससे 10 रूपए लिए और गाड़ी खड़ी करवा दी . ऐसा ही हाल यंहा पर आए बाकी मरीजों और उनके परिजनों का भी है. जिन्हें अवैध वसूली की जानकारी ही नहीं है.

हालांकि जब इस बात का खुलासा हुआ तो मेडिकल कॉलेज के नए अधीक्षक डॉ. सीएस सुशील खुद मौके पर पहुंचे और मामले की पड़ताल की तो पता चला कि पार्किंग ठेकेदार ने ही नो-पार्किंग क्षेत्र में अपना आदमी खड़ा किया और उसे अवैध वसूली पर लगा दिया. अब अस्पताल प्रशासन से पूरे मामले में कार्रवाई की बात कही है साथ ही नो पार्किंग जोन से ठेकेदार को हटा दिया गया है.

हालांकी इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं . लोगों का कहना है की बिना अस्पताल प्रशासन की मिलीभगत के इस तरीके कृत्य को अंजाम नहीं दिया जा सकता. वहीं देखना ये है की किस तरह की जांच पूरे मामले में की जाती है.