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डूंगरपुर का 'रावण' पूरे देश में विख्यात, 200 साल से बांसड़ समाज के लोग बना रहे हैं पुतला

डूंगरपुर जिला यहां बने रावण के पुतलों के लिए पूरे देश में विख्यात है. 

डूंगरपुर का 'रावण' पूरे देश में विख्यात, 200 साल से बांसड़ समाज के लोग बना रहे हैं पुतला
बांसड़वाड़ा क्षेत्र में बांसड़ समाज के घर घर में पुतले बनाए जाते हैं.

अखिलेश शर्मा, डूंगरपुर: प्रदेश के आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले के बांसड समाज के लोगो द्वारा बनाए गए रावण का राजस्थान सहित गुजरात, महाराष्ट्र, एमपी और यूपी में दहन होगा. दरअसल इस बार बांसड समाज को 40 से अधिक रावण बनाने का ऑर्डर मिला है. इस दौरान राजस्थान के डूंगरपुर के साथ साथ सम्बंधित राज्यों में बांसड समाज के लोग रावण के पुतले को अंतिम रूप देने में लगे है.

200 सालों से रावण का पुतला बना रहा है बांसड़ समाज
जानकारी के अनुसार पुतलों का निर्माण करना बांसड़ समाज का पुश्तैनी पेशा है. बांस को अपने औजारों से आकार देते हुए हर प्रकार के दैनिक उपयोगी सामान बनाने में माहिर बांसड़ समाज पिछले 200 सालों से रावण और उसके परिवार के पुतले बना रहे हैं. यहां बने पुतले कम खर्चीले, पर्यावरण के लिए लाभकारी और सुंदर आकर्षक बनाए जाते है. इस बार करीब 40 से ज्यादा शहरों में डूंगरपुर के कारीगर रावण के पुतले बना रहे हैं.

पुतले बनाने में लगे 50 से 60 परिवार
बांसड़ समाज के कुछ लोगों ने दशकों पूर्व बांस की छाबड़ियां, टोकरे बनाने व बांस बेचने के पारंपरिक काम के साथ ही रावण, कुंभकर्ण व मेघनाथ के पुतले बनाने का काम भी शुरु किया था. जो कि अब  कमाई का जरिया बन गया है.

दरअसल बांसड़ समाज के लोग पुतलों का कुछ भाग तैयार कर निर्धारित स्थान पर ले जाकर पुतलों का पूरा ढांचा तैयार करते हैं. इस काम में करीब 50 से 60 परिवारों मुखिया से लेकर बच्चे तक इसमें जुटे हुए है.

पुतलों से होने वाली आय का 10 फीसदी हिस्सा जाता है बाबा रामदेव मंदिर
जानकारी के अनुसार बांसड़ समाज के लोग रावण बनाने के काम के लिए देशभर के अलग-अलग शहर और कस्बों में जाते हैं. ऐसे में अपने रावण को पुतले से मिलने वाली आय का 10 प्रतिशत हिस्सा बाबा रामदेव मंदिर के लिए देने का प्रावधान हैृ. इस 10 प्रतिशत हिस्से से बाबा रामदेव मंदिर के माध्यम से उत्सव बनाया जाता है, इसके साथ ही ये पैसा समाज के विकास में लगाया जाता है.

Lakshmi Upadhyay, News Desk