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शिवसेना मुखपत्र 'सामना' में लिखा, '...तो राम मंदिर पर फैसला हो ही गया समझो'

'सामना' ने बीजेपी नेताओं की आलोचना की है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की तारीफों के पुल बांधे हैं.

शिवसेना मुखपत्र 'सामना' में लिखा, '...तो राम मंदिर पर फैसला हो ही गया समझो'
सामना के संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की तारीफों के पुल बांधे गए हैं.

नई दिल्‍ली: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Elections 2019) की सरगर्मी के बीच शिवसेना राममंदिर समेत हिंदुत्व जैसे मुद्दों को लेकर मुखर हो गई है. इसको लेकर शिवसेना अपनी सहयोगी पार्टी बीजेपी पर भी निशाना साधने में पीछे नहीं हट रही है. शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' ने शनिवार के अंक के संपादकीय में बीजेपी नेताओं के बड़बोलेपन की आलोचना की है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) की तारीफों के पुल बांधे हैं.

सामना के संपादकीय में लिखा है, ''प्रधानमंत्री मोदी ने नासिक में राम मंदिर के बारे में जोरदार मार्गदर्शन किया है. राम मंदिर का पेंच फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में फंसा है. हर दिन सुनवाई हो रही है. आगामी दो महीने में राम मंदिर पर फैसला आना अपेक्षित है. प्रधानमंत्री को ऐसा लग रहा है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कानूनी प्रक्रिया से हो इसलिए न्यायालय पर विश्वास रखो. प्रधानमंत्री ने ठीक ही कहा है कि राम मंदिर का मुद्दा न्यायालय में है और कुछ ‘बड़बोले’ तथा ‘बयान बहादुर’ निरर्थक चर्चा कर रहे हैं.

जुबान पर ताला लगाओ
मुखपत्र आगे लिखता है, 'अब ये बड़बोले कौन हैं? इस पर ‘बयानबाजी’ शुरू हो गई है. जब से मोदी सत्ता में आए हैं, उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ अपनी ही पार्टी के बड़बोलों से हो रही है. प्रधानमंत्री को अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों से हाथ जोड़कर कहना पड़ा था कि अपनी जुबान पर ताला लगाओ.'

मोदी की प्रतिमा को धूमिल करनेवाले बयान
इसके आगे संपादकीय में लिखा, ''भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर हों या मंत्री गिरिराज सिंह, इनके कई बयान मोदी की प्रतिमा को धूमिल करनेवाले हैं. ये सही है कि राम मंदिर का मामला न्यायालय में विचाराधीन है लेकिन राम मंदिर के मुद्दे पर मनमाने तरीके से बोलनेवाले वाचालवीर भाजपा में हैं. बलात्कार के आरोप में कल गिरफ्तार हुए स्वामी चिन्मयानंद ने भी राम मंदिर के मामले में बड़ा बयान दिया था. अब वे जेल भेजे गए हैं.''

आरके सिन्हा के बयान का जिक्र
शिवसेना के मुखपत्र में भारतीय जनता पार्टी के सांसद और संघ के अत्यंत विश्वसनीय आर. के. सिन्हा का जिक्र करते  हुए लिखा कि सिन्हा ने तो ऐसा बड़बोलापन किया कि पूछो मत. भाजपा सांसद सिन्हा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बैठे कुछ लोग नहीं चाहते कि अयोध्या में राम मंदिर बने. यह बयान सीधे-सीधे सुप्रीम कोर्ट पर अविश्वास था और ऐसा बयान था, जिसे प्रधानमंत्री पसंद नहीं करते. बड़बोलेपन की हद तो उत्तर प्रदेश के भाजपाई मंत्री मुकुटबिहारी वर्मा ने कर दी. भाजपा के मुकुटबिहारी का कहना है, ‘अयोध्या में राम मंदिर बनकर रहेगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट हमारा है! देश की न्याय व्यवस्था भाजपा की मुट्ठी में है इसलिए राम मंदिर का पै'सला हमारे अनुकूल ही होगा.''

प्रधानमंत्री की झुंझलाहट समझनी चाहिए
सामना लिखता है, ''इस बड़बोलेपन से सुप्रीम कोर्ट भी चौंक गया. मुख्य न्यायाधीश ने चिंता व्यक्त की और विरोधी प्रधानमंत्री मोदी की ‘न्यायप्रिय’ नीति पर आशंका व्यक्त करने लगे इसलिए नासिक में प्रधानमंत्री की झुंझलाहट समझनी चाहिए. बड़बोलेपन से प्रधानमंत्री की नीति पर सवाल उठ रहे हों तो भाजपा नेताओं को राम मंदिर के मुद्दे पर बोलने से बचना चाहिए. राम मंदिर के मामले पर भाजपा नेता संबित पात्रा ने परसों ही एक बड़ा बयान देकर मोदी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं-‘अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का कार्य शीघ्र ही शुरू होगा और ‘भगवा पार्टी’ का ये मुख्य एजेंडा है.’ यह सब सुनकर प्रधानमंत्री मोदी इन लोगों को दूर से ही नमस्कार करते होंगे. फिर भी सच ये है कि राम मंदिर के मामले में देश के लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं.''

मोदी-शाह के साहसी निर्णय
संपादकीय में आगे लिखा गया, ''जिस जोश के साथ कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया, उसी हिम्मत के साथ अयोध्या में भी भव्य राम मंदिर बनाया जाएगा, ऐसा विश्वास देश की जनता को होने लगा होगा तो इसमें उनका क्या दोष? मोदी और शाह जिस प्रकार साहसी निर्णय लेकर देश वासियों का मन जीत रहे हैं, उसे देखते हुए राम मंदिर के बारे में लोगों का विश्वास बढ़ता जा रहा है. राम मंदिर के बारे में गत 25 सालों से सिर्फ ‘बड़बोला’पन ही शुरू है. हालांकि इस बड़बोलेपन से राम मंदिर मामले की आंच कायम है.''

चुनाव आने पर बयान शुरू हो जाते हैं
बीजेपी पर हमला करते हुए शिवसेना मुखपत्र ने लिखा, ''विधानसभा या लोकसभा चुनाव आने पर राम मंदिर के मुद्दे पर बयान शुरू हो जाते हैं. राम मंदिर का मामला न्यायालय में है, ये स्वीकार्य है लेकिन अयोध्या में जब बाबरी का विध्वंस हुआ उस समय भी ये मामला न्यायालय में विचाराधीन था फिर भी लोगों ने बाबरी तोड़कर राम मंदिर बनाया. महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में शिवसैनिक अयोध्या पहुंचे और बाबरी पतन के पश्चात सभी ने हाथ ऊपर कर लिए. उस समय बाबरी विध्वंस की जिम्मेदारी सिर्फ शिवसेनाप्रमुख ने ली थी. किसी भी प्रकार का ‘बड़बोला’पन न करते हुए उन्होंने हिंदू अस्मिता के लिए इस अंगार को अपने आगोश में ले लिया था. अब न्यायालय की लड़ाई अंतिम चरण में है. भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री की बात मानकर अपने मुंह पर ताला लगा लिया तो राम मंदिर का निर्णय हो ही गया समझो! प्रधानमंत्री की भी यही इच्छा है!''