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मथुरा में खेलते हुए 100 फुट गहरे गड्ढे में जा गिरा था मासूम, 9 घंटे बाद निकाला गया

मासूम प्रवीण बोरवेल में शनिवार को उस समय अचानक गिर गया था जब वह दोपहर करीब 3 बजे अपने पिता के साथ बकरी चराते समय खेत पर गया था. मासूम के बोरवेल में गिरने से पूरे इलाके में हड़कप मच गया था.

मथुरा में खेलते हुए 100 फुट गहरे गड्ढे में जा गिरा था मासूम, 9 घंटे बाद निकाला गया
बच्‍चे को इलाज के लिए ले जाया गया.

मथुरा : मथुरा के एक बोरवेल में करीब 100 फुट गहरे गड्ढे में गिरे 5 वर्षीय मासूम प्रवीण को निकालने में कड़ी मशक्‍कत के बाद आखिर एनडीआरएफ और सेना की टीम को सफलता मिल गई. मासूम प्रवीण को रविवार सुबह-सुबह सकुशल बोरवेल से निकल लिया गया है. उसे बोरवेल से निकालने में 9 घंटे बाद सफलता मिली है.

मासूम प्रवीण बोरवेल में शनिवार को उस समय अचानक गिर गया था जब वह दोपहर करीब 3 बजे अपने पिता के साथ बकरी चराते समय खेत पर गया था. मासूम के बोरवेल में गिरने से पूरे इलाके में हड़कप मच गया था. आनन-फानन में जिला प्रशासन को सूचना दी गई थी. जिसके बाद मौके पर आला अधिकारी पहुंच गए थे.

इनमें उप जिलाधिकारी छाता रामदत्त राम और क्षेत्राधिकारी जगदीश काली रमन भी शामिल थे. लेकिन बोरवेल में गिरे बच्‍चे को निकालने में पुलिस फायर ब्रिगेड के प्रयास विफल नजर आए थे. ऐसे में प्रशासन ने एनडीआरएफ गाजियाबाद का सहयोग मांगा और मासूम बच्चे को बचाने के लिए प्रयास तेज किए गए.


100 फुट गहरे गड्ढे में गिरा था मासूम. फोटो ANI

रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए एनडीआरएफ की टीम मथुरा पहुंची और टीम के द्वारा बच्चे को ऑक्सीजन भी दी गई. एनडीआरएफ की टीम ने कैमरे की मदद से बच्चे के बारे में जानकारी लेने के बाद रस्सी में कपड़े की टोकरी बनाकर बोरवेल में डाली. कैमरे की मदद से बच्चे को देखते हुए उससे बात की मगर बच्चा एनडीआरएफ की टीम की भाषा को जब नहीं समझ पाया तो उसकी मां ने अपनी भाषा में बच्चे से बात की. बच्चे ने मां की बात को मानते हुए एनडीआरएफ की टीम द्वारा डाली गई कपड़े की टोकरी में पैर फंसाकर बैठ गया. इसके बाद उसे सकुशल बाहर निकालने में सफलता मिली. 

अब प्रवीण सकुशल है और उसे प्राथमिक उपचार के लिए वृन्दावन के सौ सैया अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है. जहां उसकी हालत ठीक बताई जा रही है. इस पूरे रेस्क्यू आपरेशन में एनडीआरएफ के असिस्टेंड कमाण्डेन्ट अनिल कुमार सहित जहां उनकी की टीम के करीब एक दर्जन अधिकारी-कर्मचारियों ने सहयोग किया और सेना के जवान भी बड़ी ही मुस्तैदी से लगे हुए थे. वहीं जिला प्रशासन और पुलिस के साथ ही स्वास्थ विभाग की टीम की कड़ी मेहनत के बाद ही सफलता हाथ लगी है.