अयोध्या फैसले को चुनौती देने के लिए बाबरी एक्शन कमेटी का आखिरी दांव, पढ़िए पूरी खबर

अयोध्या फैसले के खिलाफ दायर की गई सभी 18 पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने के बाद अब बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने जा रही है.

अयोध्या फैसले को चुनौती देने के लिए बाबरी एक्शन कमेटी का आखिरी दांव, पढ़िए पूरी खबर
क्यूरेटिव याचिका कब दाखिल होगी ये अभी तय नहीं हो पाया है.

लखनऊ: अयोध्या फैसले के खिलाफ दायर की गई सभी 18 पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने के बाद अब बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने जा रही है.

दरअसल, इसी महीने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल मुस्लिम पक्षकारों की पुनर्विचार याचिकाओं पर पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने सुनवाई करते हुए सभी को खारिज कर दिया था. ऐसे में अब बाबरी एक्शन कमेटी (Babri Action Committee) इस मामले में क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने जा रही है. इस याचिका को मुस्लिम पक्षकारों की आखिरी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है. क्योंकि इसके बाद अब मुस्लिम पक्षकारों के पास आगे कोई विकल्प नहीं बचेगा. हालंकि ये याचिका कब दाखिल होगी ये अभी तय नहीं हो पाया है.

ऐसे दाखिल हो सकती है अयोध्या मामले में क्यूरेटिव पिटीशन
अयोध्या मामले में अब मुस्लिम पक्षकारों के पास सिर्फ क्यूरेटिव पिटीशन की रेमिडी बाकी रह गई है. ये क्यूरेटिव पिटीशन सुप्रीम कोर्ट के किसी सीनियर वकील द्वारा सर्टिफाइड होनी जरूरी होगी. जिसके बाद इस पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट के जिन जजों ने फैसला सुनाया था उसके पास भी भेजा जाएगा. अगर, अयोध्या मामले की सुनवाई कर चुके जज इस बात को कहते हैं की इस मामले की दोबारा से सुनवाई होनी चाहिए, तब क्यूरेटिव पिटीशन को दोबारा से इन्हीं जजों के पास सुनवाई के लिए भेज दिया जाएगा.

क्यूरेटिव पिटीशन के साथ ही बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बाबरी मस्जिद का मलबा मुस्लिम समुदाय को सौंपने के लिए भी कोर्ट में प्रार्थनापत्र देगी. कमेटी का मानना है कि मस्जिद में प्रयोग हुई सामग्री किसी दूसरी मस्जिद या भवन में नहीं लगाई जा सकती है और न ही इसका अनादर किया जा सकता है. 

जानिए क्या है क्यूरेटिव पिटीशन

क्यूरेटिव पिटीशन किसी भी मामले में अभियोग की अंतिम कड़ी होती है. क्यूरेटिव पिटीशन तब दाखिल की जाती है, जब सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई हो. ऐसे में क्यूरेटिव पिटीशन अंतिम मौका होता है, जिसके जरिए एक आखिरी बार गुहार लगाई जा सकती है. क्यूरेटिव पिटीशन के तहत सुप्रीम कोर्ट अपने ही फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार होता है. Curative Petition शब्द का जन्म Cure शब्द से हुआ, जिसका मतलब होता है उपचार. क्यूरेटिव पिटीशन में ये बताना जरूरी होता है कि आखिर किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दी जा रही है.