चंद्रशेखर आजाद ने लॉन्च की राजनीतिक पार्टी', BSP के कई नेताओं ने थामा दामन

 चंद्रशेखर  ने अपनी पार्टी का नाम 'आजाद समाज पार्टी' रखा है. रविवार को कांशीराम की जयंती पर अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान किया. इस मौके पर समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस और आरएलडी के 98 नेताओं और कई पूर्व मंत्रियों ने 'आजाद समाज पार्टी' जॉइन की.

चंद्रशेखर आजाद ने लॉन्च की राजनीतिक पार्टी', BSP के कई नेताओं ने थामा दामन
भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद की फाइल फोटो.

नोएडा: भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया है. चंद्रशेखर ने अपनी पार्टी का नाम 'आजाद समाज पार्टी' रखा है. रविवार को कांशीराम की जयंती पर अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान किया. इस मौके पर समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस और आरएलडी के 98 नेताओं और कई पूर्व मंत्रियों ने 'आजाद समाज पार्टी' जॉइन की.

भीम आर्मी संगठन को राजनीतिक रुप देने के लिए चंद्रशेखर आजाद ने 15 मार्च की तारीख सोच समझकर तय की है. आपको बता दें कि 15 मार्च कांशीराम की जयंती है. कांशीराम बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक थे. वह 90 के दशक में देश में दलितों के प्रमुख नेता और चेहरा थे. 

कार्यक्रम स्थल का ताला तोड़ अंदर घुसे 'रावण' के सम​र्थक
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को ध्यान में रखते हुए चंद्रशेखर आजाद को नोएडा प्रशासन ने पार्टी लॉन्चिंग के मौके पर बड़ी भीड़ इकट्ठा नहीं करने का निर्देश दिया था. उनके कार्यक्रम को भी हरी झंडी नहीं दी गई थी. लेकिन चंद्रशेखर आजाद समर्थकों की बड़ी भीड़ कार्यक्रम स्थल पर जमा हो गई. भीड़ ने ताला तोड़कर कार्यकम स्थल में प्रवेश किया. चूंकि भीड़ इतनी ज्यादा थी कि पुलिस ने कोई रिस्क नहीं लिया. पुलिस ने कार्रवाई करने की हिदायत देते हुए कार्यक्रम की मंजूरी दे दी.

पेशे से वकील हैं चंद्रशेखर आजाद
चंद्रशेखर आजाद उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 6 नवंबर 1986 को हुआ. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की और लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) से उन्होंने वकालत की डिग्री हासिल की. चंद्रशेखर आजाद के पिता एक व्यापारी हैं और मां गृहणी हैं. चंद्रशेखर आजाद ने करीब 8 साल पहले साल 2012 में विनय रतन नाम के एक शख्स के साथ भीम आर्मी का गठन किया था.

मायावती की दलित राजनीति को चुनौती
मायावती की दलित राजनीति में सेंधमारी को उतावले चंद्रशेखर आजाद भी कांशीराम को ही अपना आर्दश मानते हैं. आपको बता दें कि मायावती भी कांशीराम को अपना राजनीतिक गुरु मानती हैं. वैसे चंद्रशेखर आजाद की कोई राजनीतिक विरासत नहीं रही है. वह इससे पूर्व में राजनीति में नहीं थे. चंद्रशेखर आजाद पेशे से वकील रहे हैं. वह सहारनपुर हिंसा के दौरान पहली बार सुर्खियों में आए थे.

सहारनपुर हिंसा के बाद आए थे चर्चा में
सहारनपुर में साल 2017 में राजपूतों और दलितों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था. इसमें चंद्रशेखर आजाद को मुख्य आरोपी बनाया गया था. इस हिंसा के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर भीम आर्मी ने प्रदर्शन किया था. यहां से चंद्रशेखर पूरे देश की नजरों में आए थे. भीम आर्मी के प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों से दलित प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंचे थे.

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